October 6, 2026
Two studies published in Cell and Science have identified a new family of bacterial reverse transcriptases (DRT3) that can synthesise DNA without a nucleic-acid template, raising new questions about the traditional understanding of the central dogma of molecular biology.
Proposed by Francis Crick in 1958, the central dogma explains the flow of genetic information:
DNA → RNA → Protein
In 1970, Howard Temin and David Baltimore identified reverse transcription in retroviruses.
RNA → DNA
The enzyme reverse transcriptase uses RNA as a template to produce DNA. This did not fundamentally violate Crick’s central dogma, because information was still transferred between nucleic acids.

Defence-associated reverse transcriptases (DRTs) help bacteria defend themselves against bacteriophages.
The newly identified DRT3 system contains:
The remarkable feature is that DRT3b itself determines the nucleotide sequence.
It produces an ordered repeating sequence:
C-A-C-A-C-A-C-A…
rather than a random DNA sequence.
This discovery does not establish that the central dogma has been completely disproved.
The key novelty is that DRT3b generates a defined DNA sequence without a nucleic-acid template. It is therefore better understood as a new mechanism that challenges existing assumptions about information transfer, rather than a complete overthrow of the central dogma.
Cell और Science पत्रिकाओं में प्रकाशित दो अध्ययनों में बैक्टीरियाई रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस (DRT3) के एक नए समूह की पहचान की गई है, जो किसी न्यूक्लिक अम्ल टेम्पलेट के बिना DNA का संश्लेषण कर सकता है। यह खोज आणविक जीव विज्ञान के केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma) की पारंपरिक समझ पर नई वैज्ञानिक चर्चा को जन्म देती है।
फ्रांसिस क्रिक ने 1958 में आनुवंशिक सूचना के प्रवाह को समझाने के लिए केंद्रीय सिद्धांत प्रस्तुत किया।
DNA → RNA → Protein
DNA: आनुवंशिक सूचना का भंडारण करता है।
mRNA: DNA में मौजूद आनुवंशिक निर्देशों की अस्थायी प्रति के रूप में कार्य करता है।
Protein: कोशिका के अधिकांश जैविक कार्यों को संपादित करते हैं।
परंपरागत रूप से सूचना का प्रवाह न्यूक्लिक अम्लों के बीच तथा न्यूक्लिक अम्ल से प्रोटीन तक संभव माना जाता है, जबकि प्रोटीन से वापस न्यूक्लिक अम्ल तक सूचना का स्थानांतरण संभव नहीं माना जाता।
एवरी, मैक्लियोड और मैकार्टी (1944): उन्होंने प्रदर्शित किया कि बैक्टीरिया में रूपांतरण के लिए DNA उत्तरदायी है, न कि प्रोटीन या RNA।
हर्शी और चेज (1952): बैक्टीरियोफेज पर किए गए प्रयोगों से प्रमाणित किया कि DNA बैक्टीरिया में प्रवेश करता है और आनुवंशिक सूचना वहन करता है।
वॉटसन और क्रिक: DNA की द्विकुंडलीय संरचना (Double Helix) का मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने DNA के प्रतिकृति निर्माण की प्रक्रिया को समझाने में सहायता की।
1970 में हॉवर्ड टेमिन और डेविड बाल्टीमोर ने रेट्रोवायरस में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन की प्रक्रिया की पहचान की।
RNA → DNA
इस प्रक्रिया में रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस नामक एंजाइम RNA को टेम्पलेट के रूप में उपयोग करके DNA का निर्माण करता है।
यह क्रिया क्रिक के केंद्रीय सिद्धांत का पूर्ण उल्लंघन नहीं मानी गई, क्योंकि सूचना का स्थानांतरण अभी भी न्यूक्लिक अम्लों के बीच ही हो रहा था।
Defence-associated Reverse Transcriptases (DRTs) बैक्टीरिया को बैक्टीरियोफेज के संक्रमण से बचाने में सहायता करते हैं।
नव-चिह्नित DRT3 प्रणाली में दो एंजाइम महत्वपूर्ण हैं:
DRT3a: RNA को टेम्पलेट के रूप में उपयोग करके DNA की पहली श्रृंखला बनाता है।
DRT3b: किसी न्यूक्लिक अम्ल टेम्पलेट के बिना DNA की दूसरी श्रृंखला बनाता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि DRT3b स्वयं DNA में न्यूक्लियोटाइडों के क्रम को निर्धारित करता है।
यह एक निश्चित दो-न्यूक्लियोटाइड क्रम उत्पन्न करता है:
C-A-C-A-C-A-C-A…
बैक्टीरियोफेज के संक्रमण के दौरान DRT3 को नियंत्रित करने वाली नियामक प्रणाली बाधित हो जाती है।
इसके परिणामस्वरूप DRT3 द्वारा निर्मित DNA बैक्टीरियाई कोशिका में जमा होने लगता है।
DNA का संचय कोशिका को निष्क्रिय/सुप्त अवस्था में जाने के लिए प्रेरित करता है।
इससे बैक्टीरियोफेज अपनी प्रतिकृति पूरी नहीं कर पाता और उसका प्रसार रुक जाता है।
यह दर्शाता है कि एक प्रोटीन एंजाइम न्यूक्लिक अम्ल टेम्पलेट के बिना एक निश्चित DNA अनुक्रम निर्धारित कर सकता है।
यह आनुवंशिक सूचना के निर्माण एवं स्थानांतरण की पारंपरिक समझ को चुनौती देता है।
यह बैक्टीरियाई एंटी-फेज रक्षा तंत्र की समझ को विस्तृत करता है।
इससे प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के बीच सूचना संबंधी प्रक्रियाओं तथा आणविक विकास के अध्ययन को नई दिशा मिल सकती है।
यह खोज केंद्रीय सिद्धांत को पूर्णतः खारिज नहीं करती।
इसका मुख्य महत्व यह है कि DRT3b बिना किसी न्यूक्लिक अम्ल टेम्पलेट के एक निश्चित DNA अनुक्रम का निर्माण कर सकता है। इसलिए इसे केंद्रीय सिद्धांत के पूर्ण खंडन के बजाय आनुवंशिक सूचना के निर्माण और प्रवाह संबंधी मौजूदा अवधारणाओं के लिए एक नई चुनौती के रूप में समझना अधिक उचित है।
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