July 3, 2026
Graded Response Action Plan (GRAP) & Delhi’s Air Pollution
Context:
What is GRAP:
Key Stages & Restrictions:
| Stage | Primary Restrictions |
| Stage 1 & 2 | Focus on dust control, waste burning, vehicular emissions, and diesel generator usage. |
| Stage 3 | Economic Impact: Halts non-essential construction and demolition activities. |
| Stage 4 | Severe Restrictions: Ban on entry of non-essential trucks, restrictions on BS-IV diesel heavy vehicles, hybrid schooling for classes 9 & 11, and 50% attendance in government offices. |
The Shift in Strategy:
Key Issues & Criticisms (Expert View – CEEW Report):
Way Forward:
वर्तमान स्थिति (जुलाई 2026): हालिया विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले तीन सर्दियों के दौरान, दिल्ली-NCR ने अपनी कुल अवधि का लगभग एक-तिहाई समय GRAP के दो सबसे सख्त चरणों (चरण 3 और 4) के तहत बिताया है।
नीतिगत बदलाव: प्रदूषण के लगातार उच्च स्तर को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने अब हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक एंटी-पॉल्यूशन उपायों को अनिवार्य कर दिया है। यह ‘AQI-आधारित’ मॉडल से हटकर ‘निश्चित समय-सीमा’ (fixed-timeline) मॉडल की ओर एक बदलाव है।
परिभाषा: ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) आपातकालीन उपायों का एक सेट है जिसे दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर लागू किया जाता है।
कार्यप्रणाली: यह एक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली है जो एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आधार पर विशिष्ट प्रतिबंधों को लागू करती है।
| चरण | मुख्य प्रतिबंध |
| चरण 1 और 2 | धूल नियंत्रण, कचरा जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और डीजल जनरेटर के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना। |
| चरण 3 | आर्थिक प्रभाव: गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस (construction and demolition) गतिविधियों पर रोक। |
| चरण 4 | सख्त प्रतिबंध: गैर-आवश्यक ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध, BS-IV डीजल भारी वाहनों पर रोक, कक्षा 9 और 11 के लिए हाइब्रिड स्कूलिंग, और सरकारी कार्यालयों में 50% उपस्थिति। |
प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय (Reactive to Proactive): पहले, GRAP केवल तब लागू किया जाता था जब AQI ‘गंभीर’ (Severe) स्तर पर पहुंच जाता था। नए निर्देश ने इन उपायों को पूरी सर्दी (नवंबर-फरवरी) के लिए अनिवार्य बना दिया है, चाहे दैनिक AQI का स्तर कुछ भी हो।
तर्क: सरकार का उद्देश्य प्रणाली में पूर्वानुमेयता (predictability) लाना है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों में वायु गुणवत्ता लगातार ‘खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई है।
प्रतिक्रियात्मक प्रकृति: विशेषज्ञों का तर्क है कि यह प्रणाली अभी भी AQI ट्रिगर्स पर बहुत अधिक निर्भर है।
स्रोत-आधारित दृष्टिकोण का अभाव: विशेषज्ञ बार-बार प्रतिबंधों को लगाने और हटाने के बजाय एक “पूर्वानुमेय, स्रोत-आधारित और अति-स्थानीय” (hyperlocal) दृष्टिकोण की वकालत करते हैं।
अनिश्चितता: बार-बार नियमों में बदलाव से व्यवसायों, निर्माण कंपनियों, स्कूलों और आम जनता के लिए अनिश्चितता पैदा होती है।
पूर्वानुमान का अभाव: वर्तमान में कार्यान्वयन स्रोत-योगदान पूर्वानुमानों (source-contribution forecasts) से पर्याप्त रूप से जुड़ा नहीं है, जिससे निवारक कार्रवाई में बाधा आती है।
डेटा-आधारित योजना: AQI-आधारित ट्रिगर्स से हटकर डेटा-समर्थित पूर्वानुमानों की ओर बढ़ना चाहिए, जो प्रदूषण के हॉटस्पॉट और उनके स्रोतों की पहले से पहचान कर सकें।
नीतिगत स्थिरता: अचानक प्रतिबंध लगाने या हटाने से होने वाली आर्थिक और सामाजिक बाधाओं को दूर करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करना।
एकीकृत प्रबंधन: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और स्थानीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना ताकि NCR में एकसमान कार्यान्वयन हो सके।
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