विस्तारित मानसून चरण (Extended Monsoon Phase): दक्षिण-पश्चिम मानसून की विलंबित वापसी
चर्चा में क्यों?
हाल के वर्षों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी सामान्य समय से आगे तक जारी रहने के कारण सितंबर के अंतिम सप्ताह तथा अक्टूबर के प्रारंभ में भी देश के कई हिस्सों में वर्षा की स्थिति बनी रहती है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दाब क्षेत्र एवं अवदाब मानसूनी गतिविधियों को पुनः सक्रिय कर सकते हैं, जिससे मानसून की वापसी में विलंब होता है।
मानसून का सामान्य चक्र
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आगमन: दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल में प्रवेश करता है।
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इसके बाद यह क्रमशः उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम की ओर आगे बढ़ते हुए जून-जुलाई में देश के अधिकांश भागों को प्रभावित करता है।
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वापसी: मानसून की वापसी सामान्यतः सितंबर में उत्तर-पश्चिमी भारत से प्रारंभ होती है और धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ती है।
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सितंबर के अंत से अक्टूबर के प्रारंभ तक देश के अधिकांश भाग मानसूनोत्तर संक्रमण की अवस्था में प्रवेश करने लगते हैं।
विस्तारित मानसून चरण क्या है?
विस्तारित मानसून चरण उस स्थिति को कहा जाता है, जब मानसूनी गतिविधियाँ अपनी सामान्य वापसी अवधि के बाद भी जारी रहती हैं अथवा पुनः सक्रिय हो जाती हैं।
इस दौरान:
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मानसून की वापसी में विलंब होता है।
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बंगाल की खाड़ी से नमी की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है।
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बंगाल की खाड़ी में नए निम्न दाब क्षेत्र एवं अवदाब विकसित हो सकते हैं।
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ये मौसमी तंत्र स्थल की ओर बढ़कर मध्य, पूर्वी तथा उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में पुनः वर्षा करा सकते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
देर तक वर्षा:
मानसूनी गतिविधि का पुनर्सक्रियण:
मानसून की विलंबित वापसी:
इसके प्रमुख कारण
विस्तारित मानसून गतिविधि के पीछे प्रमुख कारक हैं:
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बंगाल की खाड़ी से निरंतर आर्द्रता की आपूर्ति
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निम्न दाब क्षेत्रों एवं अवदाबों का निर्माण
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अनुकूल मानसूनी परिसंचरण का बने रहना
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उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियों तथा व्यापक वायुमंडलीय परिसंचरण के बीच अंतःक्रिया
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समुद्र की सतह के तापमान तथा वायुमंडलीय परिस्थितियों में परिवर्तन
प्रभाव एवं महत्त्व
कृषि:
देर से होने वाली वर्षा से खरीफ फसलों की कटाई एवं भंडारण प्रभावित हो सकते हैं।
बाढ़ एवं जलभराव:
लगातार वर्षा से शहरी जलभराव तथा बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।
आपदा प्रबंधन:
मानसूनोत्तर अवधि में भी आपदा-प्रबंधन एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को सक्रिय रखना आवश्यक हो सकता है।
स्वास्थ्य:
लंबे समय तक आर्द्र परिस्थितियाँ कुछ वेक्टर-जनित रोगों के प्रसार के लिए अनुकूल हो सकती हैं।
मौसम पूर्वानुमान:
मानसून की वास्तविक वापसी का समय अधिक परिवर्तनशील होने से मौसम पूर्वानुमान की जटिलता बढ़ती है।
UPSC Prelims के लिए तथ्य
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दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है।
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मानसून की वापसी सामान्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत से प्रारंभ होती है।
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बंगाल की खाड़ी निम्न दाब प्रणालियों एवं अवदाबों के निर्माण का प्रमुख क्षेत्र है।
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बंगाल की खाड़ी से प्राप्त आर्द्रता मानसूनी वर्षा को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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विस्तारित मानसून चरण का संबंध सामान्य अवधि के बाद भी मानसूनी गतिविधियों के जारी रहने अथवा पुनः सक्रिय होने से है।
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मानसून की वापसी निश्चित तिथि की घटना नहीं, बल्कि एक क्रमिक वायुमंडलीय प्रक्रिया है।
UPSC Mains Perspective
विस्तारित मानसून चरण भारतीय मानसून की गतिशील एवं परिवर्तनशील प्रकृति को दर्शाता है। मानसून की विलंबित वापसी और देर से होने वाली वर्षा का कृषि, जल संसाधन, शहरी बाढ़, स्वास्थ्य तथा आपदा प्रबंधन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अतः बेहतर मौसम पूर्वानुमान, पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा जलवायु-सहनीय योजना इस बदलते मानसूनी स्वरूप से निपटने के लिए आवश्यक हैं।