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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

RBI द्वारा सरकार को धन का हस्तांतरण

समाचार में क्यों?    

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) और सरकार के मध्य आरक्षित निधि के बँटवारे का विवाद बिमल जालान समिति (Bimal Jalan Committee) की रिपोर्ट के साथ ही सुलझ गया है।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • समिति ने वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) का संकट उत्पन्न होने की दशा में इससे निपटने हेतु जोखिम प्रावधान के तहत आवश्यक आरक्षित निधि की मात्रा को स्पष्ट किया है।
  • RBI बोर्ड ने भी इन सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपए हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है।

RBI एवं सरकार:

  • हालाँकि RBI पूरी तरह से सरकार से संबंधित है परंतु देश में वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करने और डॉलर की परिवर्तनशीलता जैसे बाजार के जोखिमों से निपटने के लिये इसकी बैलेंस शीट (Balance Sheet) को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है।

समिति द्वारा संज्ञान में लिये गये प्रमुख बिंदु:

  • समिति ने वित्तीय सलाह में क्रॉसकंट्री प्रैक्टिस (Cross&country Practices), सांविधिक (statutory) प्रावधानों एवं इसकी सार्वजनिक नीतियों और कार्यात्मक वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव आदि बिंदुओं पर RBI की भूमिका को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की है।
  • इन कारकों के आधार पर समिति ने आर्थिक संकट की स्थिति में वित्तीय प्रणाली का समर्थन करने के लिये आवश्यक आरक्षित निधि की मात्रा पर निर्णय लिया। इसने निष्कर्ष निकाला कि वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये विकसित देशों की तुलना में प्रावधान अधिक कठोर होने चाहिये।
  • समिति ने इसके लिये भारत की कम रेटिंग वाली अर्थव्यवस्था और भारतीय रुपए का डॉलर की तरह आरक्षित मुद्रा का दर्जा न होने को विशेष आधार माना है।

समिति क्या कहती है:

  • इसने एक संशोधित आर्थिक पूंजी ढाँचे (Capital Framework) का सुझाव दिया जो ’’रिवैल्यूएशन रिजर्व’(Revaluation Reserves) और ’’वास्तविक इक्विटी’’ (Realized Equity) के बीच RBI की आर्थिक पूंजी को पृथक करता है। रिवैल्यूएशन रिजर्व को कैपिटल रिजर्व के रूप में माना जाता है क्योंकि इसे लाभांश के रूप में वितरित नहीं किया जा सकता है। यह बैलेंस शीट में किसी परिसंपति से संबद्ध होता है।
  • ’’रिवैल्यूएशन रिजर्व (Revaluation Reserves) बाजार जोखिमों के विरुद्ध एक बफर रिजर्व है जिसका हस्तांतरण सरकार को नहीं किया जा सकता है।
  • समिति ने बाजार के जोखिम को मापने के लिये अपेक्षित कमी Expected Shortfall-ES पद्धति का उपयोग किया। इस पद्धति में बाजार जोखिमो का मूल्यांकन किया जाता है।
  • संशोधित ढाँचे के अनुसार, आर्थिक पूंजी को बैलेंस शीट के5% से 20% के स्तर पर होना चाहिये। समिति ने बैलेंस शीट के 6.5% से 5.5% के बीच इक्विटी सीमा की भी सिफारिश की है।

RBI पूंजी हस्तांतरण (Capital Transfer) से सरकार को लाभ:

  • RBI ने वर्ष 2018-19 के दौरान अर्जित 1,23,414 करोड़ रुपए के पूरे अधिशेष को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। यह फरवरी 2019 में अंतरिम लाभांश के रूप में 28,000 करोड़ रुपए पहले ही स्थानांतरित कर चुका है और शेष राशि चालू वित्त वर्ष में हस्तांतरित की जाएगी।
  • वर्ष 2018-2019 में केंद्र का वास्तविक शुद्ध कर राजस्व संग्रह9 लाख करोड़ रुपए था। वर्ष 2019-2020 में 19.78 लाख करोड़ रुपए के राजस्व संग्रह लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये शुद्ध कर राजस्व में लगभग 25% की वृद्धि और सकल कर राजस्व में 26.5% की वृद्धि को प्राप्त करना होगा।
  • केंद्र सरकार के कर राजस्व में लगभग 70,000 करोड़ रुपए की अपेक्षित कमी होने की संभावना है, जिसकी प्रतिपूर्ति रिजर्व बैंक द्वारा हस्तांतरित राशि से की जा सकेगी।

राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करना :

  • आर्थिक मंदी (Economy Slowing Down)और वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax-GST) से कर संग्रह न हो पाने के कारण राजकोषीय घाटे में वृद्धि हो सकती है।
  • रिजर्व बैंक द्वारा हस्तांतरित राशि से सरकार सामाजिक क्षेत्र और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में धन आवंटन मे कटौती किये बिना राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य प्राप्त कर सकेगी।

आगे की राह:

  • यदि कर राजस्व वृद्धि होने से सरकार अतिरिक्त धन का उपयोग सार्वजनिक उपक्रमों के ऋण को चुकाने के लिये कर सकती है ताकि अगले वित्तीय वर्ष के राजस्व घाटे को कम करने में सहायता किया जा सके।
  • हस्तांतरित धन का उपयोग बुनियादी ढाँचे जैसे पूंजीगत व्यय पर खर्च करने के लिये भी किया जा सकता है।

निष्कर्ष:

  • RBI बोर्ड के निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिये और आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) से निपटने के लिये तथा राजकोषीय लक्ष्यों (Fiscal Targets) के अनुरूप सरकार की मदद करनी चाहिये। सरकार को भी इस हस्तांतरित निधि का विवेकपूर्ण उपयोग में करना चाहिये।

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Topic:  For prelims and mains:

बेसल बैन संशोधन :

समाचार में क्यों?

6 सितंबर, 2019 को क्रोएशिया (Croatia) द्वारा बेसल बैन संशोधन (Basel Ban Amendment), 1995 की पुष्टि  के बाद वैश्विक अपशिष्ट डंपिंग निषेध एक अंतर्राष्ट्रीय कानून बन गया है।

वैश्विक अपशिष्ट डंपिंग के खिलाफ बेसल कन्वेंशन  :

  • बेसल एक्शन नेटवर्क (Basel Action Network-BAN) के अनुसार, 1995 में बेसल कन्वेंशन, मानव स्वास्थ्य की रक्षा और खतरनाक कचरे के दुष्प्रभावों के खिलाफ पर्यावरण की रक्षा के लिये किया गया।
  • बैन एक संयुक्त राज्य-आधारित चैरिटी संगठन (United States-based Charity Organisation) है और उन संगठनों एवं देशों में से एक है जिन्होंने वैश्विक पर्यावरणीय न्याय के लिये ऐतिहासिक समझौते के रूप में बेसल बैन संशोधन का समर्थन किया।
  • बैन संशोधन पर कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज की दूसरी बैठक में निर्णय लिया गया और इसे मूल रूप से मार्च 1994 में अपनाया गया था।
  • बैन संशोधन OECD के 29 सबसे अमीर देशों से गैर OECD देशों को इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट और पुराने पानी के जहाजों सहित खतरनाक अपशिष्ट के सभी प्रकार के निर्यात को प्रतिबंधित करता है।
  • कन्वेंशन के तहत निम्नलिखित अपशिष्टों को सीमा-पारीय आवागमन (Trans boundary Movement) हेतु खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Wastes) की श्रेणी में रखा गया हैरू
  • एनेक्स- I (Annex I) में शामिल किसी भी श्रेणी के अपशिष्ट जब तक कि वे एनेक्स III (Annex III) में निहित किसी भी विशेषता से युक्त नहीं हैंय तथा
  • वे अपशिष्ट जो अनुच्छेद () के तहत कवर नहीं किये गए हैं, लेकिन निर्यात, आयात या पारगमन हेतु किसी पक्षकार देश के घरेलू कानून द्वारा खतरनाक अपशिष्ट के रूप में परिभाषित किये गए हैं।
  • वे अपशिष्ट जो सीमा-पारीय आवागमन एवं एनेक्स- II से संबंधित किसी भी श्रेणी में आते हों इस कन्वेंशन के लिये ’अन्य अपशिष्ट’ (Other Wastes) होंगे।
  • रेडियोधर्मी होने के परिणामस्वरूप अन्य अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण प्रणालियों के अधीन आने वाले अपशिष्टों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में शामिल रेडियोधर्मी सामग्रियों को इस कन्वेंशन के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • पानी के जहाजों के सामान्य संचालन से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट इसके तहत आते हैं।
  • परंतु वह अपशिष्ट जिसको किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय समझौते (international instruments) द्वारा कवर किया जाता है, को इस कन्वेंशन के दायरे से बाहर रखा गया है।

पुष्टिकर्त्ता देश :

  • अधिकांश देशों जैसे- अमेरिका, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस, भारत, ब्राजील और मेक्सिको द्वारा इस प्रतिबंध की पुष्टि किया जाना शेष है।
  • अमेरिका प्रति व्यक्ति सबसे अधिक अपशिष्ट का उत्पादन करता है लेकिन इसके द्वारा बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) की पुष्टि नहीं की गई है। अमेरिका बैन संशोधन का भी सक्रिय रूप से विरोध करता है।
  • खतरनाक अपशिष्ट के सीमा-पारीय आवागमन पर नियंत्रण और उसके निपटान को लेकर वर्ष 1989 में बेसल कन्वेंशन को अपनाया गया था और यह वर्ष 1992 में लागू हुआ था।
  • यह खतरनाक कचरे और अन्य कचरे को लेकर सबसे व्यापक वैश्विक पर्यावरण समझौता है। 181 पक्षकारों (वर्ष 2014 में) के साथ इसकी लगभग सार्वभौमिक सदस्यता है

अन्य प्रमुख बिंदु:

  • कन्वेंशन का उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरनाक अपशिष्ट के उत्पादन, सीमा पारीय आवगमन और प्रबंधन एवं अन्य कचरे के परिणामस्वरूप होने वाले प्रतिकूल प्रभावों से बचाना है।
  • बेसल कन्वेंशन खतरनाक अपशिष्ट और अन्य कचरे के सीमा पारीय आवगमन को नियंत्रित करता है और अपने पक्षकारों को यह सुनिश्चित करने के लिये बाध्य करता है कि इस तरह के अपशिष्ट का प्रबंधन और सुरक्षित तरीके से निपटारा किया जाना चाहिये।
  • कन्वेंशन के तहत विषैले, जहरीले, विस्फोटक, संक्षारक, ज्वलनशील, इकोटॉक्सिक और संक्रामक अपशिष्ट शामिल हैं।
  • कन्वेंशन के सभी पक्षकारों का यह दायित्व है कि वे अपशिष्ट की न्यूनतम मात्रा का परिवहन करने, अपशिष्ट का उपचार और निपटान उत्पादन स्थल के निकट करने और स्रोत पर ही अपशिष्ट उत्पादन को रोकने या कम करने के लिये प्रयास करें
  • वर्ष 2014 में इस कन्वेंशन के तहत 14 बेसल कन्वेंशन क्षेत्रीय और समन्वय केंद्र स्थापित किये गए हैं। ये केंद्र अर्जेंटीना, चीन, मिस्र, अल साल्वाडोर, इंडोनेशिया, ईरान, नाइजीरिया, रूस, सेनेगल, स्लोवाक गणराज्य, दक्षिण प्रशांत क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यक्रम, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और उरुग्वे में स्थित हैं।
  • ये केंद्र खतरनाक अपशिष्ट और अन्य अपशिष्ट के प्रबंधन तथा इसके उत्पादन के न्यूनीकरण के संबंध में प्रशिक्षण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदान करते हैं ताकि कन्वेंशन के कार्यान्वयन में पार्टियों की सहायता एवं समर्थन प्राप्तकिया जा सके।

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प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

Pulikali :

  • पुलिकली अर्थात् व्याघ्र नृत्य केरल की एक लोककला है जो ओणम पर्व के चैथे दिन संपादित होती हैं।
  • इसमें कलाकार लोग बाघ का मुखौटा पहनकर और शरीर पर बाघ जैसी धारियाँ रंग कर पारम्परिक ताल वाद्यों, जैसेथकिल, उडुक्कु और छेंडा की लय पर नाचा करते हैं।

 

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