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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

G7शिखर सम्मेलन क्या है?

समाचार में क्यों?        पिछले दिनों फ्रांस के नगर Biarritz में G7 का 45वाँ वार्षिक शिखर सम्मेलन सम्पन्न हुआ I इस शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता फ्रांस ने कीI फ्रांस ने इस बैठक के लिए पाँच उद्देश्यों का निर्धारण किया जो निम्न प्रकार के हैं –

  • अवसरों में असमानता दूर करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, शिक्षा और उच्चकोटि की स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता प्रदान करना।
  • पर्यवारणगत असमानता घटाना।
  • वैश्वीकरण के सामाजिक आयाम को सुदृढ़ करना।
  • सुरक्षागत खतरों और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई करना।
  • डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धि से उत्पन्न अवसरों का पता लगाना।

G7 का इस साल का एजेंडा क्या रहा?

  • अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापार युद्ध।
  • यूरोपीय संघ के द्वारा समर्थित ईरान के साथ आणविक समझौते का प्रस्ताव जिसका अमेरिका विरोध कर रहा है।
  • हौंग-कौंग में चीन के विरुद्ध चल रहा आन्दोलन।

 

 

G7शिखर सम्मेलन क्या है?

  • यह 7 प्रमुख राष्ट्रों के प्रमुखों की बैठक है। पहले इसमें 8 देश थे। इसकी स्थापना 1975 में हुई थी।
  • इसमें विश्व के 7 प्रमुख सशक्त देश शामिल होते हैं – अमेरिका, कनाडा, UK, फ्रांस, जर्मनी, जापान और इटली। इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ के नेतागण भी इस बैठक में बुलाये जाते हैं। वे आपसी सहमति से नीतियाँ बनाते हैं और फिर सम्बंधित मुद्दों का समाधान ढूँढते हैं।
  • इस सम्मलेन में विश्व भर के Toyar मुद्दों पर चर्चा होती है। जहाँ यह सम्मलेन होता है उसी देश का राष्ट्र प्रमुख बैठक की अध्यक्षता करता है और उसे यह अधिकार होता है कि वह अपनी इच्छा से किसी एक और देश को बैठक में आमंत्रित करे।
G7 का माहात्म्य:

Ø  G7 में विश्व की बड़ी-बड़ी आर्थिक शक्तियाँ सम्मिलित होती हैं। अतः G7 जो भी निर्णय लेता है उसका पूरे विश्व पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

Ø  यद्यपि G7 के निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, परन्तु इनका राजनैतिक प्रभाव अत्यंत प्रबल होता है।’

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Topic:  For prelims and mains:

आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन :

समाचार में क्यों?        प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सहायक सचिवालय कार्यालय सहित आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन ¼International Coalition for Disaster Resilient Infrastructure-CDRI) की स्थापना को कार्योत्तर मंजूरी प्रदान कर दी है। इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री ने 13 अगस्त, 2019 को मंजूरी दी थी।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • 23 सितंबर, 2019 को अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन ¼UN Climate Action Summit½ के दौरान CDRI की शुरुआत किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा।
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा आयोजित यह शिखर सम्मेलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और इसके परिणामस्वरूप होने वाली आपदाओं से निपटने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिये बड़ी संख्या में राष्ट्राध्यक्षों को एक साथ लाएगा तथा CDRI के लिये आवश्यक उच्च स्तर पर ध्यान देने योग्य बनाएगा।

अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित पहलों को मंजूरी दी गईः

  1. नई दिल्ली में सहायक सचिवालय कार्यालय सहित आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन ¼CDRI½ की स्थापना।
  2. सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (Societies Registration Act) 1860 के अंतर्गत संस्था के रूप में CDRI के सचिवालय की नई दिल्ली में स्थापना ‘CDRI संस्था’ अथवा इससे मिलते-जुलते नाम से उपलब्धता के आधार पर की जाएगी।
  • संस्था का ज्ञापन और ‘CDRI संस्था’ के उपनियमों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा यथासमय तैयार किया जाएगा और इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।
  1. CDRI को तकनीकी सहायता और अनुसंधान परियोजनाओं का निरंतर आधार पर वित्त पोषण करने, सचिवालय कार्यालय की स्थापना करने तथा बार-बार होने वाले खर्चों के लिये वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 तक पाँच वर्ष की अवधि के लिये आवश्यक राशि हेतु भारत सरकार की ओर से 480 करोड़ रुपए (लगभग 70 मिलियन डॉलर) की सहायता को सैद्धांतिक मंजूरी देना।
  2. चार्टर दस्तावेज का समर्थित स्वरूप CDRI के लिये संस्थापक दस्तावेज का कार्य करेगा। NDMA द्वारा विदेश मंत्रालय के परामर्श से संभावित सदस्य देशों से जानकारी लेने के बाद इस चार्टर को अंतिम रूप दिया जाएगा।

प्रमुख प्रभावः

  • CDRI एक ऐसे मंच के रूप में सेवाएँ प्रदान करेगा, जहाँ आपदा और जलवायु के अनुकूल अवसंरचना के विविध पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी और उसका आदान-प्रदान किया जाएगा।
  • यह विविध हितधारकों की तकनीकी विशेषज्ञता को एक स्थान पर एकत्र करेगा। इसी क्रम में यह एक ऐसी व्यवस्था का सृजन करेगा, जो देशों को उनके जोखिमों के संदर्भ तथा आर्थिक जरूरतों के अनुसार अवसंरचनात्मक विकास करने के लिये उनकी क्षमताओं और कार्यपद्धतियों को उन्नत बनाने में सहायता करेगी।
  • इस पहल से समाज के सभी वर्ग लाभांवित होंगे।
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिलाएँ और बच्चे आपदाओं के प्रभाव की दृष्टि से समाज का सबसे असुरक्षित वर्ग होते हैं तथा ऐसे में आपदा के अनुकूल अवसंरचना तैयार करने के संबंध में ज्ञान और कार्यपद्धतियों में सुधार होने से उन्हें लाभ पहुँचेगा। भारत में पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्र भूकंप के खतरे, तटवर्ती क्षेत्र चक्रवाती तूफानों एवं सुनामी के खतरे तथा मध्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र सूखे के खतरे वाले क्षेत्र हैं।

नवाचारः

  • विभिन्न प्रकार की आपदा के जोखिम तथा विकास के संदर्भों वाले विभिन्न देशों में आपदा के जोखिम में कमी से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अनेक तरह की पहल तथा अवसंरचना विकास से संबंधित अनेक तरह की पहल मौजूद है।
  • आपदा के अनुकूल अवसंरचना के लिये वैश्विक संगठन उन चिंताओं को दूर करेगा, जो विकासशील और विकसित देशों, छोटी और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अवसंरचना विकास की आरंभिक एवंर उन्नत अवस्था वाले देशों तथा मध्यम या उच्च आपदा जोखिम वाले देशों में समान रूप से विद्यमान हैं।
  • अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित करते हुए सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework½, सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals-SDGs½ और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन ¼Climate Change Adaptation½ के मिलन-बिंदु पर ठोस पहल से संबंधित कुछ कार्य हैं।
  • आपदा के अनुकूल अवसंरचना पर फोकस करने से एक ही समय पर सेंदाई फ्रेमवर्क के अंतर्गत हानि में कमी लाने से संबंधित लक्ष्यों पर ध्यान दिया जाएगा, अनेक SDGs पर ध्यान दिया जा सकेगा तथा जलवायु परिवर्तन से संबंधित अनुकूलन में भी योगदान मिलेगा। इसलिये आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के लिये स्पष्ट अवसर है।
  • भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक जोखिम के खतरे से संबंधित सूचना का प्रकाशन होने से लोगों को अपने क्षेत्रों के जोखिम के बारे में समझने का अवसर मिलेगा तथा वे स्थानीय और राज्य सरकारों से जोखिम में कमी लाने तथा उससे निपटने के उपायों की मांग कर सकेंगे।

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प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

  • कोप्रोलाइट (खुदी हुई गोबर):
  • वैज्ञानिकों ने अर्जेंटीना के एक प्रागैतिहासिक प्यूमा के कोप्रोलाइट में सबसे पुराने परजीवी के DNA (Deoxyribonucleic Acid)की खोज की है।
  • ऐसे जानवरों के जीवाश्म मल ¼Fossilised Faeces½ को कोप्रोलाइट्स ¼Coprolites½ कहा जाता है जो लाखों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर पाए जाते थे।
  • वैज्ञानिक कोप्रोलाइट्स के आकार और रूपरेखा का विश्लेषण तथा अध्ययन कर यह पता कर सकते हैं कि ये किस प्रकार के जानवर से उत्पन्न मल है और ये जानवर क्या खाते थे।
  • उदाहरण के लिये, यदि मल में हड्डी के टुकड़े पाए जाते हैं, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि जानवर मांसाहारी रहा होगा।

 

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