MISSION CLAT-2020 | English Version | View Blog +91 9415011892/93

डेली करेंट अफेयर्स 2019

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

Eastern Economic Forum

2nd September 2019

समाचार में क्यों?    5 सितम्बर को रूस के सुदूर-पूर्व (Far-East) में स्थित व्लाडिवोस्टक में आयोजित होने वाले पूर्वी आर्थिक मंच  (Eastern Economic Forum) की बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।

पूर्वी आर्थिक मंच क्या है?

  • विश्व की आर्थिक व्यवस्था, क्षेत्रीय एकीकरण, नए औद्योगिक एवं तकनीकी क्षेत्रों के विकास तथा रूस और अन्य राष्ट्रों द्वारा सामना की जा रही वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए पूर्वी आर्थिक मंच की स्थापना 2015 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक आदेश के द्वारा की थी।
  • इस मंच की बैठक प्रत्येक वर्ष व्लाडिवोस्टक में ही होती है।
  • इस मंच में होने वाले विचार-विमर्श के निमित्त कई पैनल सत्र, गोलमेज वार्ताएँ, दूरदर्शन पर प्रसारित वाद-विवाद, व्यावसायिक कलेवे  (business breakfasts) एवं व्यावसायिक संवाद आयोजित होते हैं जिनमें मुख्य रूप से विविध देशों के साथ रूस के रिश्तों पर चर्चा होती है।
  • इस मंच के व्यावसायिक कार्यक्रम में एशिया प्रशांत क्षेत्र और आसियान के अग्रणी प्रतिभागी देशों के साथ अनेक व्यावसायिक संवाद भी होते हैं।
सुदूर-पूर्व  (FAR-EAST) किसे कहते हैं?

·        रूस के सबसे पूर्वी भाग को सुदूर-पूर्व अर्थात् फार ईस्ट कहते हैं. यह भूभाग प्रशांत और आर्कटिक दो महासागरों की सीमाओं को छूता है और इसके समीप ये पाँच देश पड़ते हैं – चीन, जापान, मंगोलिया, अमेरिका और उत्तर कोरिया।

·        रूस के सुदूर-पूर्वी संघीय जिले के अन्दर देश की एक-तिहाई से अधिक भूमि आती है।

·        संसाधन रू रूस का सुदूर-पूर्वी भाग प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। ये संसाधन हैं – हीरे, टीन, बोरेक्स, सोना, टंग्स्टन, मछलियाँ और समुद्री भोज्य पदार्थ. रूस के कोयला भंडार और हाइड्रो-इंजीनियरिंग संसाधनों का एक एक-तिहाई अंश इसी क्षेत्र में अवस्थित है.। पूरे रूस के जंगलों का 30% क्षेत्र इसी क्षेत्र में पड़ता है।

*************

 

Topic:  For prelims and mains:

एक देश दो प्रणाली :

समाचार में क्यों?

हॉन्गकॉन्ग में लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच चीन की एक देश दो प्रणाली (One Country Two Systems)नीति फिर से चर्चा में आ गई है।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • हॉन्गकॉन्ग की स्थानीय सरकार द्वारा एक विवादास्पद कानून लाए जाने के बाद से ही स्थानीय लोग इसे हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता का उल्लंघन मान रहे हैं जिसकी वजह से चीन के विरुद्ध वहाँ पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन इस प्रकार के प्रदर्शन को देश विरोधी बता रहा है।
  • हॉन्गकॉन्ग और मकाउ क्षेत्र चीन के मुख्य भू-भाग से आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भिन्न हैं इसलिये उन्हें विशेष प्रशासनिक क्षेत्र घोषित किया गया है।

नीति की उत्पत्तिः

  • डेंग शियाओपिंग (Deng Xiaoping) द्वारा वर्ष 1970 के आसपास देश के शासन की बागडोर संभालने के बाद एक देश दो प्रणाली (One Country Two Systems) नीति प्रस्तावित की गई थी। डेंग की इस योजना का मुख्य उद्देश्य चीन और ताइवान को एकजुट करना था।
  • इस नीति के माध्यम से ताइवान को उच्च स्वायत्तता देने का वादा किया गया था। इस नीति के तहत ताइवान चीनी संप्रभुता के अंतर्गत अपनी पूंजीवादी आर्थिक प्रणाली का पालन कर सकता है, एक अलग प्रशासन चला सकता है और अपनी सेना रख सकता है। हालाँकि ताइवान ने कम्युनिस्ट पार्टी के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
  • चीन के राष्ट्रवादी समर्थकों को वर्ष 1949 में कम्युनिस्टों ने गृहयुद्ध में हरा दिया था। कम्युनिस्टों से हारने के बाद चीन के राष्ट्रवादी ताइवान चले गए थे।
  • राष्ट्रवादियों द्वारा तब से ताइवान में चीन से एक अलग शासन चलाया जा रहा है, हालांकि चीन ने ताइवान पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ा।

ताइवान और मकाउ का इतिहासः

  • हॉन्गकॉन्ग और मकाउ क्रमशः ब्रिटेन और पुर्तगाल के उपनिवेश थे। वर्ष 1842 के प्रथम अफीम युद्ध के बाद अंग्रेजों ने हॉन्गकॉन्ग पर अधिकार कर लिया था। ब्रिटिश सरकार और चीन के किंग राजवंश ने पेकिंग के दूसरे कन्वेंशन पर वर्ष 1898 में हस्ताक्षर किये , जिसके अनुसार हॉन्गकॉन्ग को 99 वर्षों के लिये चीन ने लीज पर ब्रिटेन को दे दिया। वहीं दूसरी ओर मकाउ पर वर्ष 1557 से पुर्तगालियों का शासन था। पुर्तगाल ने 1970 के दशक के मध्य से ही अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया था।
  • डेंग शियाओपिंग ने 1980 के दशक से ही दोनों क्षेत्रों का हस्तांतरण चीन को करने के लिये ब्रिटेन और पुर्तगाल के साथ बातचीत शुरू की। बातचीत के दौरान ही चीन ने एक देश दो प्रणाली के तहत इन क्षेत्रों की स्वायत्तता का सम्मान करने का वादा किया था।
  • चीन और ब्रिटेन के बीच 19 दिसंबर, 1984 को बीजिंग में चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए थे, जिसके तहत हॉन्गकॉन्ग हेतु वर्ष 1997 से कानूनी, आर्थिक और सरकारी प्रणालियों में स्वायत्तता का निर्धारण किया गया था।
  • इसी तरह 26 मार्च, 1987 को चीन और पुर्तगाल ने मकाउ के प्रश्न पर संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये, जिसमें चीन ने मकाउ को भी हॉन्गकॉन्ग की भांँति स्वायत्तता देनी की बात कही थी।
  • उपरोक्त दो अनुबंधों के बाद एक देश दो प्रणाली की नीति को व्यावहारिक स्तर पर लागू किया गया था।
  • 1 जुलाई, 1997 को हॉन्गकॉन्ग और 20 दिसंबर, 1999 को मकाउ चीनी नियंत्रण में आ गए। चीन ने दोनों देशों को विशेष प्रशासनिक क्षेत्र घोषित किया।
  • इस प्रकार इन देशों की अपनी मुद्राएँ, आर्थिक और कानूनी प्रणालियां होंगी, लेकिन रक्षा तथा विदेशी कूटनीति चीन द्वारा तय की जाएगी।
  • इसके तहत 50 वर्षों के लिये एक मिनी संविधान बनाया गया जो हॉन्गकॉन्ग हेतु वर्ष 2047 तक और मकाउ के लिये वर्ष 2049 तक वैध होगा। इस समयावधि के बाद की संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया गया है।

वर्तमान संकटः

  • हाल के वर्षों में हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता को नष्ट करने के संबधी चीन के कथित प्रयासों के विरुद्ध यहाँ के लोकतंत्र समर्थक नागरिक समाज में तनाव बढ़ गया है। जिसके परिणामस्वरूप यहाँ के युवाओं ने स्थानीय सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
  • हॉन्गकॉन्ग की एक स्थानीय पार्टी हॉन्गकॉन्ग नेशनल पार्टी को वर्ष 2018 में गैर कानूनी घोषित कर दिया गया था।
  • इस वर्ष हॉन्गकॉन्ग की मुख्य कार्यकारी कैरी लैम ने प्रत्यर्पण विधेयक का प्रस्ताव रखा, जिसमें हॉन्गकॉन्ग के लोगों को उन स्थानों पर प्रत्यर्पित करने का प्रावधान किया गया था जो हॉन्गकॉन्ग के प्रत्यर्पण समझौते के तहत नहीं आते हैं, इसमें चीन भी शामिल है।
  • इस प्रकार के प्रत्यर्पण समझौते से चीन, हॉन्गकॉन्ग से किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित कर सकता है जो सीधे-सीधे यहाँ की स्वायत्तता पर हमला होगा इसका विरोध हॉन्गकॉन्ग में बड़े स्तर पर हो रहा है।
  • वर्तमान में विरोध के बाद इस समझौते के मसौदे को वापस ले लिया है लेकिन गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और शहर की चुनावी प्रणाली में सुधार हेतु अभी प्रदर्शन जारी हैं।

*************

प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

इंडोनेशिया की नई राजधानी:

  • हाल ही में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति द्वारा की गई एक घोषणा के अनुसार, बोर्नियो द्वीप के पूर्वी कालीमंतन प्रांत (East Kalimantan province) को देश की नई राजधानी बनाया जाएगा।
  • वर्तमान में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है।
  • जकार्ता 1 करोड़ लोगों की आबादी वाला सबसे बड़ा इंडोनेशियाई शहर है और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले द्वीप जावा के उत्तरी-पश्चिमी तट पर स्थित है।

राजधानी स्थानांतरण का कारण:

  • जकार्ता शहर धीरे-धीरे पानी में डूबता जा रहा है, कुछ सालों में इस शहर के पूरी तरह जलमग्न हो जाने की संभावना जताई जा रही है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण जावा सागर का जल स्तर बढ़ रहा है और मौसम की घटनाएँ अधिक विषम होती जा रही हैं।
  • इसके अलावा यातायात की गंभीर समस्या भी दिन-ब-दिन और विकराल रूप धारण करती जा रही हैं।
  • जकार्ता दुनिया के सबसे तेजी से डूबते शहरों में से एक है।
  • इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इंडोनेशिया बोर्नियो द्वीप को अपनी नई राजधानी बनाने की योजना बना रहा है।

हालाँकि इंडोनेशिया ही इकलौता ऐसा देश नहीं है जो अपनी राजधानी बदलने की योजना बना रहा है, इससे पहले भी कई देश जैसे- कजाखस्तान, नाइजीरिया, म्याँमार, बोलीविया, ब्राजील ने अपनी राजधानी को स्थानांतरित कर चुके हैं।

 

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow