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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

COVID-19 महामारी के बाद की चिकित्सा जटिलताएँ

17th July, 2020

G.S. Paper-I/II

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (Directorate General of Health Services – DGHS) द्वारा सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital), राम मनोहर लोहिया अस्पताल (Ram Manohar Lohia Hospital) तथा ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (All India Institute Of Medical Sciences-AIIMS) के साथ-साथ भारत के प्रमुख केंद्रीय सरकारी अस्पतालों से COVID-19 के बाद की चिकित्सा जटिलताओं (Medical Complications) से संबंधित डेटा एकत्र करने का कार्य शुरू किया गया है।

प्रमुख बिंदु-

  • COVID-19 महामारी से ठीक हुए उन मरीज़ों का डेटा देश भर से एकत्र किया जा रहा है जो COVID-19 महामारी के साथ-साथ मधुमेह, फेफड़े, हृदय, यकृत एवं मस्तिष्क संबंधी अन्य          चिकित्सा जटिलताओं से भी पीड़ित थे।
  • इस डेटा को एकत्र करने का उद्देश्य आगे की देखभाल और उपचार के लिये दिशा-निर्देश जारी करना है क्योंकि महामारी का प्रभाव लोगों पर देखा जा रहा है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में COVID-19 के 86% मामले देश के 10 राज्यों में देखे गए         हैं।
  • जिसमें 50% मामले महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हैं।
  • वर्तमान में (31 मई तक) कुल रिकवरी रेट (Recovery Rate) 47.6%  से बढ़कर02% हो गया है।

सही होने की स्थिति-

  • COVID-19 के साथ-साथ अन्य चिकित्सा जटिलता से पीड़ित व्यक्तियों को सुस्ती की शिकायत, मानसिक रूप से ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता तथा उदासी की स्थिति से पूरी तरह से ठीक      होने में लंबा समय लगा है।
  • जिन लोगों में निमोनिया के लक्षण विद्यमान थे उनके फेफड़े की कार्य क्षमता में कुछ महीनों के       भीतर ही सुधार देखा गया है लेकिन कुछ लोगों में फाइब्रोसिस के कारण ऐसे नहीं हो पाया।
    • फाइब्रोसिस एक रेशेदार संयोजी ऊतक है जो शरीर के किसी हिस्से में चोट या क्षति के दौरान  विकसित होता है।
    • यह शरीर के किसी अंग में चोट लगने या कट जाने पर रक्त का थक्का जमाने में सहायक होता है।
  • चिकित्सा जटिलताओं से पीड़ित व्यक्तियों में लंबे समय तक फेफड़ों के संक्रमित होने के कारण संवहनी रोगों (Vascular Diseases) के होने का खतरा बना रहता है।
    • संवहनी रोगों को ‘पेरिफेरल आर्टरी ऑक्ल्यूसिव डिज़ीज़’ भी कहा जाता है।
    • इसमें हाथ एवं पैरों में बड़ी धमनियों के संकरा होने के कारण रक्त के प्रवाह में रुकावट हो जाती है।
  • COVID-19 के रोगियों में मधुमेह से पीड़ित चिकित्सा जटिलता वाले लोग भी शामिल थे।

COVID-19 के बाद के प्रभाव-

  • महामारी के बाद के प्रभाव जो मनुष्यों को प्रभावित कर सकते हैं उसके बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा गया है फिर भी चिकित्सा समुदाय के अनुसार इस महामारी में फेफड़े प्रभावित    होते हैं।
  • फेफड़ों के प्रभावित होने पर थ्रोंबोसिस (Thrombosis) के कारण शरीर की भीतरी धमनियों में रक्त     थक्के के रूप में जम जाता है ये थक्के फेफड़ों में पहुँचकर रक्त प्रवाह को अवरूद्ध कर सकते हैं।           जिसे पल्मोनरी एम्बोलिज़्म (Pulmonary Embolism) कहा जाता है।पल्मोनरी एंबोलिज़्म (Pulmonary Embolism) एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों में एक या एक से अधिक धमनियाँ           रक्त के थक्के द्वारा अवरुद्ध हो जाती हैं।

हॉन्गकॉन्ग के विशेष दर्जे की समाप्ति

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉन्गकॉन्ग के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया है।

प्रमुख बिंदु-

  • इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉन्गकॉन्ग स्वायत्तता अधिनियम (Hong Kong Autonomy Act) पर भी हस्ताक्षर किये हैं, जो कि उन चीनी अधिकारियों और हॉन्गकॉन्ग पुलिस             के अधिकारियों को भी प्रतिबंधित किया जाएगा, जो हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता को नष्ट करने    और मानवाधिकारों के उल्लंघन में शामिल हैं।।
    • इसके अलावा उन बैंकों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो प्रतिबंधित लोगों के साथ आर्थिक लेन-देन में शामिल होंगे।
  • इस संबंध में घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब हॉन्गकॉन्ग को मुख्य चीन का एक हिस्सा माना जाएगा और उसे किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं दिया जाएगा और ही   उसे संवेदनशील प्रौद्योगिकियों का निर्यात किया जाएगा।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ‘चीन द्वारा इस कानून के माध्यम से हॉन्गकॉन्गवासियों की स्वतंत्रता छीनी जा रही है और उनके मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है।

हॉन्गकॉन्ग के विशेषाधिकार-

  • वर्ष 1842 में चीन राजवंश के प्रथम अफीम युद्ध में पराजित होने के बाद चीन ने ब्रिटिश साम्राज्य को हॉन्गकॉन्ग द्वीप सौंप दिया था, उसके बाद हॉन्गकॉन्ग का (एक अलग भू-भाग) अस्तित्त्व   सामने आया।
  • लगभग एक शताब्दी तक ब्रिटेन का उपनिवेश रहने के पश्चात् वर्ष 1997 में यह क्षेत्र चीन को वापस सौंप दिया गया और इसी के साथ ही एक देश दो व्यवस्था (One Nation Two System) की अवधारणा भी सामने आई।
    • इस व्यवस्था के अनुसार हॉन्गकॉन्ग को विशेष दर्जा दिया गया अर्थात् हॉन्गकॉन्ग की शासन व्यवस्था चीन के मुख्य क्षेत्र से अलग होनी थी।
  • अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अपनी कूटनीति में हॉन्गकॉन्ग और चीन के बीच अंतर को मान्यता दी, जिसे अमेरिका-हॉन्गकॉन्ग नीति अधिनियम, 1992 के तहत शामिल किया गया।
  • तदनुसार, हॉन्गकॉन्ग को अमेरिका के साथ लेन-देन में उन सभी तरजीहों का फायदा मिलता है जो या तो चीन को नहीं मिलता या चीन के लिये प्रतिबंधित है।
    • इसमें न्यून व्यापार शुल्क और एक अलग आव्रजन नीति जैसे विषय शामिल हैं।

चीन का पक्ष-

  • अमेरिका के इस कदम का विरोध करते हुए चीन ने कहा कि अमेरिका का यह हॉन्गकॉन्ग स्वायत्तता अधिनियम स्पष्ट तौर पर हॉन्गकॉन्ग में चीन के कानून को दुर्भावनापूर्ण रूप से        बदनाम करने का कार्य कर रहा है।
  • चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘चीन अपने हितों की रक्षा के लिये आवश्यक प्रतिक्रिया देगा और इस संबंध में आवश्यक पड़ने पर अमेरिका के अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों की       घोषणा भी करेगा।’
  • कड़े शब्दों में अमेरिका का विरोध करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम को चीन के घरेलू मामले में ‘अमेरिकी हस्तक्षेप’ के रूप में परिभाषित किया है।

इस कदम के निहितार्थ-

  • हॉन्गकॉन्ग के संबंध में अमेरिका द्वारा चीन के अधिकारियों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध और अमेरिका के नए कानून को लेकर चीन की धमकी स्पष्ट तौर पर दोनों देशों के संबंधों में पहले से    मौजूद तनाव को और अधिक बढ़ाएगी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम के कारण सबसे अधिक नुकसान ‘हॉन्गकॉन्ग’ को झेलना पड़ेगा और इस कदम से चीन के हित काफी सूक्ष्म स्तर पर प्रभावित होंगे।
  • हॉन्गकॉन्ग में बीजिंग की कार्रवाई के अलावा डोनल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने, दक्षिण चीन सागर में सैन्य निर्माण, उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार उल्लंघन और कई देशों के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार अधिशेषों को लेकर भी चीन की आलोचना की।
  • हॉन्गकॉन्ग के विशेष दर्जे को रद्द करने के निर्णय से गैर-चीनी कंपनियां हॉन्गकॉन्ग में अपने कार्य को संचालित करने पर विचार करने के लिये बाध्य होंगी।
  • गौरतलब है कि अधिकांश पश्चिमी देशों की कंपनियों ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के रूप में हॉन्गकॉन्ग को चुना है, क्योंकि इसके माध्यम से चीन के साथ-साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया,इंडोनेशिया और भारत जैसे देशों को भी कवर किया जा सकता है।
  • अनुमान के अनुसार, हॉन्गकॉन्ग में 1,500 से भी अधिक विदेशी व्यवसायों का एशियाई मुख्यालय स्थित है, जिसमें से 300 अमेरिकी कंपनियाँ हैं, यही कारण है कि यह स्थान काफी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
  • यदि कुछ कंपनियाँ भी अपने व्यवसाय को किसी अन्य क्षेत्र पर हस्तांतरित करती हैं, तो इससे हॉन्गकॉन्ग की स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी अधिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
  • हालाँकि विशेषज्ञों के मतानुसार, अमेरिका के इस निर्णय का चीन की अर्थव्यवस्था पर कुछ खासा प्रभाव नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि जब ब्रिटेन ने एक स्वायत्त क्षेत्र के रूप में हॉन्गकॉन्ग को चीन को दिया था, तब चीन की अर्थव्यवस्था में हॉन्गकॉन्ग की काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी और   हॉन्गकॉन्ग चीन के सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 18 प्रतिशत हिस्से का उत्तरदायी था।
  • हालाँकि वर्तमान में यह आँकड़ा पूरी तरह से बदल चुका है, चीन ने बीते 25 वर्षों में काफी बड़े पैमाने पर विकास किया है और अब हॉन्गकॉन्ग चीन की अर्थव्यवस्था में केवल 2-3  प्रतिशत का ही योगदान देता है।

माता नी पछेड़ी

G.S. Paper-III

15 जुलाई, 2020 को गुजरात की टेक्सटाइल आर्ट फॉर्म ‘माता नी पछेड़ी’ (Mata Ni Pachedi) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication- GI) टैग हेतु आवेदन पंजीकृत किया गया।

प्रमुख बिंदु-

  • यह आवेदन ‘गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ (Gujarat Council on Science and Technology- GUJCOST) द्वारा जुलाई, 2020 के दूसरे सप्ताह में दायर किया गया था।
  • आवेदन के जीआई रजिस्ट्री (GI Registry) में पंजीकृत होने के बाद इसके मूल्यांकन एवं अनुमोदन में लगभग तीन महीने का समय लगता है।

‘माता नी पछेड़ी’ (Mata Ni Pachedi)-

  • ‘माता नी पछेड़ी’ एक गुजराती शब्द है जिसका अनुवाद ‘मातृ देवी के पीछे’ (Behind The Mother Goddess) है।
  • ‘पछेड़ी’ एक धार्मिक वस्त्र लोक कला (Religious Textile Folk Art) है,  जिसके केंद्र में मातृ देवी का उल्लेख किया जाता है और शेष कपड़े में उनकी कहानियाँ एवं किवदंतियों को निरुपित किया जाता है।
  • इसेगुजरात की कलमकारी (Kalamkari of Gujarat) भी कहा जाता है।

वघारी समुदाय-

  • वर्तमान में इस कला को गुजरात के खानाबदोश वघारी समुदाय (Nomadic Vaghari Community) के 10-15 परिवारों के 70-80 लोग ही जानते हैं।
  • वघारी समुदाय स्वयं को मातृपूजक या देवीपूजक कहता है।

‘माता नी पछेड़ी’ की विशेषताएँ-

  • परंपरागत रूप से इन पछेड़ियों को कपड़े पर हाथ से पेंट या ब्लॉक-प्रिंट द्वारा निरूपित किया जाता है।
  • हाथ से काटे गए आयताकार कपड़े में प्राकृतिक एवं खनिज रंगों का उपयोग रिक्त स्थान को भरने तथा रंगाई प्रक्रिया में किया जाता है।
  • यदि कपड़ा आकार में चौकोर है तो उसे माता नो चंदार्वो’ (Mata No Chandarvo) के नाम से जाना जाता है।

उपयोग-

  • यह वस्त्र लोक कला पूरी तरह से देवी माँ की कहानियों को चित्रित करने के लिये समर्पित है।
  • इसकी पवित्र प्रकृति के कारण इसे अक्सर पवित्र कपड़े, मंदिर का कपड़ा, मंदिर का लटकाना या देवी माँ के अनुष्ठान कपड़े के रूप में जाना जाता है।
  • यदि इसे (माता नी पछेड़ी) मंज़ूरी मिल जाती है तो यह गुजरात का 16वाँ जीआई टैग होगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

कौशल भारत मिशन

  • ‘कौशल भारत’ मिशन की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री, नरेंन्द्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को अन्तर्राष्ट्रीय युवा कौशल दिवस पर की थी.
  • इस मिशन के अंतर्गत पूरे भारत में लगभग 40 करोड़ भारतीयों, को विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत, 2022 तक प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था.
  • इस योजना का लक्ष्य भारत में तकनीकी शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाकर उसे विश्व मांग के अनुरूप ढालना है.
  • “कौशल भारत” मिशन के अंतर्गत आने वाली अन्य योजनाएँ हैं-
  • राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन
  • कौशल विकास एवं उद्यमियता के लिए राष्ट्रीय नीति
  • प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना
  • स्किल लोन स्कीम
  • राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन

 

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