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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी

5th October, 2020

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सार्वजानिक पटल पर उपलब्ध आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के प्रबंधन से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने वाले प्रमुख सलाहकार निकायों में से 85% निकायों में अधिकांशतः पुरुष ही शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु-

  • इस अध्ययन के दौरान 87 देशों के 115 निर्णय लेने और प्रमुख सलाहकार निकायों के विश्लेषण में पाया गया कि 85% से अधिक निकायों में अधिकांशतः या पूर्णतः पुरुषों का वर्चस्व है, वहीं 11% सलाहकार निकायों में महिलाओं की प्रमुख भूमिका है, जबकि केवल 3.5% निकाय ही ऐसे हैं जहाँ लैंगिक समानता देखने को मिली है।
  • अध्ययन के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य निकायों में भी महिला प्रतिनिधित्त्व की स्थिति कुछ ख़ास नहीं है, उदाहरण के लियेविश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization-WHO) की आपातकालीन समिति की पहली, दूसरी और तीसरी बैठक में सदस्यों की संख्या में महिला प्रतिनिधित्त्व क्रमशः8%, 23.8% और 37.5% ही था।

निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी-

आवश्यकता-

  • महामारी से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने वाले निकायों में महिलाओं की कम भागीदारी से महामारी के दौरान महिलाओं के लिये प्रासंगिक मुद्दों को संबोधित नहीं किया जा पाता है, ऐसे में महिलाओं को इस प्रक्रिया में शामिल करने से उनके लिये प्रासंगिक मुद्दों को सही ढंग से संबोधित किया जा सकेगा।
  • कई जानकार मान रहे हैं कि महिलाओं पर कोरोना वायरस महामारी का दीर्घकालीन सामाजिक-आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेगा, ऐसे में यदि इन मुद्दों को अभी संबोधित नहीं किया गया तो भविष्य में घातक परिणाम हो सकते हैं।
  • पिछली कई महामारियों जैसे ज़ीका और इबोला आदि का महिलाओं पर काफी प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला है, प्रायः महामारी के पश्चात् मातृत्त्व मृत्यु और असुरक्षित गर्भपात की दर में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

महत्त्व-

  • अध्ययन में कहा गया है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक-से-अधिक महिलाओं को शामिल करने से हमें कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी से संबंधित इस मुकाबले में एक नवीन दृष्टिकोण मिलेगा और महामारी की निगरानी तथा इसका जोखिम प्रबंधन अधिक प्रभावपूर्ण होगा।
  • कई अन्य अध्ययनों में भी सामने आया है कि उन देशों ने महामारी के प्रबंधन के प्रति बेहतर कार्य किया है, जिनका नेतृत्त्व किसी महिला द्वारा किया जा रहा है, साथ ही इन देशों में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या भी कम है।

भागीदारी में कमी के कारण-

  • महिलाओं और लैंगिक अल्पसंख्यकों को महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल न करने के मुख्य कारणों में लैंगिक पूर्वाग्रह, भेदभाव और कार्यस्थल संस्कृति आदि अन्य कारक शामिल है।
  • यद्यपि वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी तकरीबन 70% हैं, किंतु वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने वाली भूमिका में केवल 25% महिलाएँ हैं।
  • इस प्रकार महिलाओं को निर्णयन की प्रक्रिया में शामिल न करके एक विशिष्ट दृष्टिकोण को दरकिनार किया जाता है, जिससे हमारा दायरा काफी सीमित हो जाता है और इस सीमित दायरे में समय के साथ आने वाली नवीन चुनौतियों का सामना करना काफी मुश्किल होता है।

आगे की राह-

  • लिंग आधारित कोटा सार्वजनिक क्षेत्र में असमानताओं को समाप्त करने और लैंगिक समानता के माध्यम से प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन हो सकता है।
  • यद्यपि महिलाओं के प्रतिनिधित्त्व में बढ़ोतरी करना लैंगिक असमानता को दूर करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम हो सकता है, किंतु इसे एकमात्र कदम के रूप में नहीं देखा जा सकता है।
  • नेतृत्त्व में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने से यह ज़रूरी नहीं है कि महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक पूर्वाग्रह में भी कमी आएगी।
  • जानकार मानते हैं कि महिलाओं के प्रति इस दृष्टिकोण को समाप्त करने के लिये औपचारिक माध्यमों जैसे- रोज़गार संबंधी कानून में बदलाव और सकारात्मक भेदभाव की नीति आदि के साथ-साथ उन अनौपचारिक माध्यमों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, जो महिलाओं की भागीदारी को प्रभावित करते हैं, उदाहरण के लिये कार्य स्थल पर महिला विशिष्ट प्रतिबंधों को समाप्त करना।

ज़ॉम्बी फायर

G.S. Paper-III (Environment)

चर्चा में क्यों?

जमे हुए टुंड्रा (Tundra) क्षेत्र में लगने वाली आग की घटनाओं के साथ–साथ ‘ज़ॉम्बी फायर’ (Zombie Fire) की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

ज़ॉम्बी फायर क्या है?

  • ज़ॉम्बीफायर आग का एक ऐसा स्वरुप हैजो भूमिगत रूप से जलती रहती है और फिर कुछ समय पश्चात् सतह पर उत्पन्न होती है।

इससे सम्बंधित क्या चिंतायें हैं?

आर्कटिक क्षेत्र  में  आग  उन क्षेत्रों में भी फैल रही है, जो पहले आग प्रतिरोधी क्षेत्र थे। आर्कटिक वृत्त के

उत्तर में स्थित टुंड्रा क्षेत्र शुष्क होता जा रहा है और वहां की वनस्पति जैसे मॉस, घास, छोटी झाड़ियाँ आदिआग पकड़ने लगी हैं।

  • आगऔर रिकॉर्ड तापमान में कार्बन सिंक को कार्बन स्रोत में परिवर्तित करने एवं वैश्विक तापन में वृद्धि करने की क्षमता है।

समय की मांग:

  • आर्कटिकक्षेत्र में विकसित होने वाली एवं  तीव्रता  से  परिवर्तित  होने वाली आग की प्रकृति को समझने  तत्काल आवश्यकता है।
  • इसमुद्दे को वैश्विक महत्व के मुद्दे के रूप में उठाए जाने की आवश्यकता है।
  • आगको नियंत्रित करने के लिए वैश्विक सहयोग, निवेश और कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • इसके अतिरिक्त आर्कटिक  क्षेत्रके स्थानीय लोगों से यह सीखने की आवश्यकता है कि आग का पारंपरिक उपयोग कैसे किया जाता था।
  • आर्कटिकक्षेत्र की रक्षा के लिए नवीन पर्माफ्रॉस्ट एवं जंगली क्षेत्रों में आग पर काबू पाने के लिए पीट संवेदनशील दृष्टिकोण को अपनाने की भी आवश्यकता है।

25वां सौर चक्र

G.S. Paper-I (Geography)

संदर्भ:

हाल ही में, नासा औरनेशनल ओशनिक एंड एटमास्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के वैज्ञानिकों द्वारा एक नए सौर चक्र के शुरू होने के अनुमानों की घोषणा की गयी है। इसे 25वां सौर चक्र (Solar Cycle 25) कहा जा रहा है।

मुख्य निष्कर्ष:

  1. सौर चक्र 25 के लिए सौर न्यूनतम(Solar Minimum) दिसंबर 2019 में घटित हुआ था।
  2. वैज्ञानिकों के अनुसार सौर अधिकतम(Solar maximum), [सौर चक्र के मध्य की स्थिति], जुलाई 2025 में घटित होगी।
  3. यह सौर चक्र पिछले सौर चक्र की भांति मजबूत होगा। पिछला सौर चक्र ‘औसत से कम’ सक्रिय चक्र था।

सौर चक्र क्या होता है?

सूर्य एक विद्युत आवेशित गर्म गैस की एक विशाल गेंद है। यह आवेशित गैस गति करती हुई एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र एक चक्र से गुजरता है, जिसे सौर-चक्र (Solar Cycle) कहा जाता है।

  1. प्रत्येक 11 साल बादसूर्य का चुंबकीय क्षेत्र पूरी तरह से उलट जाता है।इसका अर्थ है कि सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव परस्पर स्थान परिवर्तित कर लेते हैं। इसके पश्चात सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को फिर से अपनी पूर्व स्थिति में आने के लिए लगभग 11 वर्ष का समय लगता है।
  2. अब तक खगोलविदों ने ऐसे 24 सौर चक्रों के लिखित प्रमाण तैयार किये है। इनमे से आखिरी सौर चक्र 2019 में पूरा हुआ था।

वैज्ञानिक सौर गतिविधियों पर किस प्रकार निगाह रखते हैं?

  1. वैज्ञानिक, सौर-कलंकों (Sunspots) के माध्यम से सौर चक्र का पता लगाते हैं।
  2. किसी सौर चक्र की शुरुआत में आमतौर पर केवलकुछ सौरकलंक (Sunspots) होते है और इसलिए इसे ’सौर न्यूनतम’ (Solar Minimum) कहा जाता है।

‘सौर न्यूनतम’ तथा ‘सौर अधिकतम’ क्या होते है?

सौर चक्र पर निगाह रखने की एक विधि सौर-कलंकों (Sunspots) की संख्या की गणना होती है।

  1. सौर चक्र की शुरुआत में ’सौर न्यूनतम’ (Solar Minimum) की स्थिति होती है, अर्थात सूर्य में सबसे कम सौर-कलंक होते हैं। समय के साथ, सौर गतिविधि – और सौर-कलंकों की संख्या ने वृद्धि होती जाती है।
  2. सौर चक्र की मध्य स्थिति में ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum) होता है, अर्थात सूर्य में सौर-कलंकों की संख्या सर्वाधिक होती है। जैसे ही चक्र समाप्त होता है, यह वापस सौर न्यूनतम पर आ जाता है और फिर से एक नया चक्र शुरू होता है।

पृथ्वी पर सौर चक्र के प्रभाव:

  1. सौर विस्फोटों से आकाश में बिजली उत्पन्न हो सकती है, जिसे औरोरा (Aurora) कहा जाता है, तथा ये रेडियो संचार को प्रभावित करते है। चरम विस्फोट होने पर ये पृथ्वी पर स्थित बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं।
  2. सौर गतिविधियां, इलेक्ट्रॉनिक्स उपग्रहों को प्रभावित कर सकती है तथा उनके जीवनकाल को प्रभावित कर सकती है।
  3. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सौर विकिरण हानिकारक हो सकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन

वर्तमान में, परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI)  परमाणु ऊर्जा उत्पादन में संलग्न हैं।

  1. परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में गैर-सरकारी क्षेत्र को अनुमति देने के लिए वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
  2. वर्तमान में देश में6780 मेगावाट की क्षमता वाले बाईस 22 रिएक्टर कार्यरत हैं।

 

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