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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

हिरासत में ‘वकील का अधिकार’

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में गिरफ्तार किए गए मुंबई पुलिस के एक अधिकारी सचिन वझे ने पूछताछ के दौरान अपने वकील के उपस्थिति रहने की मांग की है, जबकि /राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण’ अर्थात ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ (National Investigation Agency- NIA) ने तर्क दिया है, कि यह ज़िद जांच में बाधा उत्पन्न कर रही है।

क्या ‘वकील की सहायता लेना’ किसी आरोपी का अधिकार है?

भारत में, इस प्रकार की परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को उपलब्ध सुरक्षा उपायों का संविधान में उल्लेख किया गया है।

  1. संविधान के अनुच्छेद 20 (3)के अंतर्गत आत्म अभिशंसन से मुक्ति दी गई है। किसी भी अभियोजन में आरोपी को आत्म अभिशंसन (witness against himself) के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  2. अनुच्छेद 22 के अनुसार, गिरफ्तार किये गए किसी व्यक्ति को अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा। इस अनुच्छेद के अंतर्गत ऐसे प्रावधान भी किए गए हैं, जिनमे अभियुक्त को एक वकील से “परामर्श करने का अधिकार” प्रदान किया गया है।
  3. दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41Dके अनुसार किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपने पसंद के वकील से मिलने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है, हालांकि पूछताछ के दौरान हर समय यह अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

इस प्रकार के मामलों से संबंधित उच्चतम न्यायालय के फैसले:

1997 के डी के बसु मामले में:

अदालत ने गिरफ्तारी या हिरासत संबंधी मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा निर्देशित सिद्धांतों के अनुपालन पर विचार किया।

  1. इस निर्णय में अदालत ने कहा, कि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जा सकती है, हालांकि पूरी पूछताछ के दौरान हर समय के लिए इसकी अनुमति नहीं होगी।
  2. उच्चतम न्यायालय ने आरोपियों के लिए सुरक्षा उपायों पर जोर दिया, लेकिन ‘अपराधों का खुलासा करने में होने वाली कठिनाइयों, विशेषकर “कट्टर अपराधियों” के मामलों में, के बारे भी बात की। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि पूछतांछ के दौरान हर समय वकील को मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वरिष्ठ खुफिया अधिकारी बनाम जुगल किशोर शर्मा (2011) मामले में:

शीर्ष अदालत ने आरोपी के वकील को ‘दूर से अथवा शीशे के दूसरी ओर से कार्यवाही देखने’ की अनुमति दी, और साथ में यह भी कहा कि, वकील सुनाई देने योग्य सीमा से बाहर रहेगा, और उसके लिए पूछताछ के दौरान उत्तरदाता को परामर्श देने की अनुमति नहीं होगी’।

हालांकि, कई आपराधिक मामलों में, यह, पुलिस की हिरासत में भेजने वाली अदालत के विवेक पर छोड़ दिया जाता है, कि वह पूछताछ के दौरान, जब पूछताछ नहीं चल रही हो, उस समय निजी रूप से, किसी निर्धारित समय के लिए, वकील को आरोपी से मिलने की अनुमति देती है अथवा नहीं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

जापी

  1. यह, बांस से निर्मित तथा सूखे हुए तोकोऊ पत्तों (तोकोऊ: ऊपरी असम के वर्षावनों में पाया जाने वाला ताड़ का पेड़) से ढकी हुई एक शंक्वाकार टोपी होती है।
  2. बहुधा, आधिकारिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग मेहमानों को सम्मानित करने के लिए किया जाता है।
  3. इसके अलावा, असम के ग्रामीण क्षेत्रों में, किसान खेतों में काम करते समय, कठोर मौसम, धूप और बारिश से खुद को बचाने के लिए ‘जापी’ टोपी पहनते हैं।

 

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