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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

हिमालय क्षेत्र में भूतापीय जल-स्रोतों से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन: अध्ययन

12th August, 2020

G.S. Paper-III (Environment & Ecology)

संदर्भ-

हाल ही में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) के वैज्ञानिकों द्वारा हिमालय क्षेत्र में भूतापीय जल-स्रोतों पर एक अध्ययन किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष

  1. भूतापीय जल-स्रोत (Geothermal springs) हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र मेंलगभग 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं।
  2. हिमालय क्षेत्र में विभिन्न तापमान और रासायनिक स्थितियों वाले लगभग 600 गर्म पानी के सोते हैं, और वे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन करते हैं।
  3. इनतापीय जलस्रोतों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की प्राप्ति, हिमालय क्षेत्र के कोर में मौजूद कार्बोनेट चट्टानों के मेटामोर्फिक डेकार्बोनाइजेशन तथा ग्रेफाइट के मैग्मा में परिवर्तित होने और इसका ऑक्सीकरण होने से होती है।
  4. अधिकांशतापीय जलस्रोतों में बड़े पैमाने पर वाष्पीकरण होता है, इसके पश्चात सिलिकेट चट्टानों का अपक्षय होता है।

भूतापीय जलस्रोत क्या हैं?

भू-गर्भ में स्थित जल के भूतापीय प्रक्रियाओं द्वारा गर्म होकर पृथ्वी की सतह पर बाहर निकलने से उत्पन्न जल-स्रोत को भूतापीय जलस्रोत कहा जाता है

भूतापीय जल के पीछे विज्ञान

जैसा कि हम जानते हैं, पृथ्वी की गहराई में जाने पर तापमान बढ़ता जाता है और पृथ्वी की बाहरी कोर में मैग्मा की प्राप्ति होती है। इस मैग्मा (8001300 ° C) के चारो ओर पृथ्वी की विभिन्न परतें होती हैं।

पृथ्वी की परतों में भूगार्भिक संचालनों के कारण दरार या भ्रंश उत्पन्न होने पर, पृथ्वी की मैग्मा परत से ऊपर की ओर भारी मात्रा में ऊष्मा का प्रवाह होता है।

यह ऊष्मा भ्रंशो/दरारों के माध्यम से पृथ्वी की सतह की ओर स्थानांतरित होती है तथा भू-गर्भ में स्थित जल को गर्म करती है।

जैसे-जैसे पानी का तापमान बढ़ता है, इसका घनत्व कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भ्रंशो से होकर तप्त पानी ऊपर उठकर सतह पर गर्म झरनों के रूप स्फुटित होता है।

‘डाटा रिकवरी केन्द्र कृषि मेघ’

G.S. Paper-II (National)

केंद्र सरकार के प्रमुख अनुसंधान निकाय आईसीएआर के महत्वपूर्ण आंकड़ों जानकारियों की सुरक्षा हेतु, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 11 अगस्त 2020 को हैदराबाद में स्थापित एक डेटा रिकवरी सेंटर’- ‘कृषि मेघ का शुभारंभ किया.

मौजूदा समय में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का मुख्य डेटा सेंटर राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (आईएएसआरआई) में है. डेटा रिकवरी सेंटर की स्थापना राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (एनएएआरएम), हैदराबाद में की गई है.

मुख्य बिंदु

  • कृषि मेघ की स्थापना राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचएचईपी) के तहत की गई है, जो सरकार और विश्व बैंक दोनों द्वारा वित्त पोषित है.
  • नई दिल्ली में आईसीएआर-आईएएसआरआई में डेटा सेंटर के बजाय एक अलग भूकंपीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण हैदराबाद को चुना गया है.
  • हैदराबाद इसलिए भी उपयुक्त है क्योंकि अन्य उपयुक्त जलवायु परिस्थितियों जैसे निम्न जलवायु स्तर के साथ कुशल आईटी पेशेवरों की वहां उपलब्धता है.
  • बयान के मुताबिक इस डेटा केन्द्र को भारत में कृषि के क्षेत्र में ई-गवर्नेंस, अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा की गुणवत्ता, उपलब्धता और पहुंच को बढ़ाने, जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है.
  • आभासी रूप से इस केन्द्र के शुभारंभ के बाद, कृषि मंत्री ने देश और दुनिया के किसी भी कोने में कहीं भी अपनी पहुंच को सक्षम बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण डिजिटल रूप में महत्वपूर्ण शोध-आधारित डेटा को सहेजने और संरक्षित करने पर जोर दिया.
  • कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मेघन्यू इंडियाके डिजिटल कृषि की दिशा में एक कदम आगे है, जैसा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित किया गया है.
  • डेटा सेंटर को भारत में कृषि के क्षेत्र में ई-गवर्नेंस, अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा की गुणवत्ता, उपलब्धता और पहुंच को बढ़ाने, जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है.

उद्देश्य

एनएएचईपी भारत में राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है, जो कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को अधिक प्रासंगिक और उच्च-गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने के लिए है और जो नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है.

ऑनलाइन प्रत्यायन प्रणाली भी शुरू

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केवीसी एलयूएनईटी (कृषि विश्व विद्यालय छत्र पूर्व छात्र नेटवर्क) और उच्च कृषि शैक्षिक संस्थानों के लिए ऑनलाइन प्रत्यायन प्रणाली भी शुरू किया.

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC)

(International Finance Corporation)

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों-

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (International Finance Corporation– IFC) द्वारा एंडिया पार्टनर्स’ फंड-II (Endiya Partners Fund II) में $ 10 मिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की गयी है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) के बारे में

  1. यह एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो विकासशील देशों में निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश, सलाहकार और संपत्ति प्रबंधन सेवाएं प्रदान करता है।
  2. यहविश्व बैंक समूह का सदस्य है और इसका मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन, डी.सी. में है।
  3. इसकी स्थापना वर्ष 1956 मेंविश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्रक शाखा के रूप में की गयी थी, तथा इसका उद्देश्य गरीबी को कम करने तथा विकास को बढ़ावा देने हेतु केवल लाभकारी तथा व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश करके आर्थिक विकास को आगे बढ़ाना है।
  4. अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम कास्वामित्व तथा प्रशासन सदस्य देशों द्वारा किया जाता है, किंतु इसके कार्य-संचालन के लिए इसका निजी कार्यकारी कार्यालय तथा कर्मचारी हैं।
  5. यह एक निगम है जिसके शेयरधारक सदस्य देशों की सरकारें होती हैं।ये सदस्य देश निवेश हेतु राशि प्रदान करते है, तथा इन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम से संबंधित विषयों पर मतदान का अधिकार है।
  6. वर्ष 2009 से, IFC ने नए विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिन्हें इसकी परियोजनाओं द्वारा पूरा किया जायेगा।इसका लक्ष्य संवहनीय कृषि के अवसरों को बढ़ाना, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में सुधार, माइक्रोफाइनेंस, अवसंरचना निर्माण, छोटे व्यवसायों की राजस्व वृद्धि तथा जलवायु स्वास्थ्य में निवेश करने में सहायता करना है।
  7. यहविभिन्न प्रकार के ऋण तथा इक्विटी फाइनेंसिंग सेवायें प्रदान करता है और कंपनियों को ऋण जोखिम का सामना करने में सहायता करता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

नैनो मिशन

भारत सरकार ने मिशन क्षमता निर्माण कार्यक्रम के रूप में वर्ष 2007 में नैनो मिशन प्रारम्भ किया था.

इसका कार्यान्वयन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) द्वारा किया जा रहा है.

इस मिशन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं– 

  • बुनियादी अनुसंधान को प्रोत्साहन देना.
  • बुनियादी ढाँचे का विकास करना.
  • नैनो अनुप्रयोगों एवं प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहन देना.
  • मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देना.
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना.
  • नैनो मिशन के नेतृत्व में किये गए कोशिशों के परिणामस्वरूप वर्तमान में भारत नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में विश्व के शीर्ष पाँच देशों में सम्मिलित है.

 

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