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हिमाचल प्रदेश का जल संकट

G.S. Paper-III

संदर्भ:

हिमाचल प्रदेश में, इस वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की भारी कमी होने की संभावना है। इस दौरान कई जल योजनाएं बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। पीने के पानी की कमी के कारण राज्य को सबसे मुश्किल दौर से गुजरना पड़ सकता है।

बारहमासी जल स्रोतों वाले राज्य में जल संकट के कारण:

  1. बीती सर्दियों के मौसम में कम बर्फ गिरना और बारिश का कम होना।
  2. इससे भूजल के साथ-साथ पहाड़ियों के निचले भागों में स्थित अन्य जल स्रोतों जैसे झरनों, कुओं, बावड़ियों, झीलों, नालों, धाराओं और नदियाँ प्रभावित हुई है।
  3. राज्य में बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी की मांग बढ़ रही है, लोग अब जल के पारंपरिक स्रोतों जैसेकि झरनों और बावड़ियों के बजाय पाइप से जलापूर्ति संबंधी योजनाओं पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।

प्रभाव:

पानी की कमी से फसल के नुकसान और चारे की कमी होने की भी संभावना है।

प्रस्तावित समाधान क्या हैं?

  1. जल-स्तर में गिरावट को देखते हुए हैंड-पंप और बोरवेल लगाने पर रोक लगा दी गई है।
  2. पूरे राज्य में वाटर हार्वेस्टिंग टैंकों का निर्माण किया जाएगा।
  3. भविष्य में, जल शक्ति विभाग द्वारा अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में “स्नो हार्वेस्टिंग” के विकल्प खोजने का प्रयास किया जाएगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

जापी

  1. यह, बांस से निर्मित तथा सूखे हुए तोकोऊ पत्तों (तोकोऊ: ऊपरी असम के वर्षावनों में पाया जाने वाला ताड़ का पेड़) से ढकी हुई एक शंक्वाकार टोपी होती है।
  2. बहुधा, आधिकारिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग मेहमानों को सम्मानित करने के लिए किया जाता है।
  3. इसके अलावा, असम के ग्रामीण क्षेत्रों में, किसान खेतों में काम करते समय, कठोर मौसम, धूप और बारिश से खुद को बचाने के लिए ‘जापी’ टोपी पहनते हैं।

 

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