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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

स्थानीय स्वशासन और महिलाएँ

26th August, 2020

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों?

हरियाणा सरकार, पुरुषों और महिला उम्मीदवारों के लिये पंचायत चुनावों में 50:50 फीसदी आरक्षण प्रदान करने के लिये एक विधेयक लाने की योजना बना रही है, जिसके तहत प्रत्येक कार्यकाल की समाप्ति के बाद महिला और पुरुष उम्मीदवारों के बीच सीटों की अदला-बदली की जाएगी।

प्रमुख बिंदु-

  • गौरतलब है कि हरियाणा इस प्रकार की विधि को अपनाने वाला देश का पहला राज्य होगा।
  • हरियाणा का यह फॉर्मूला सरपंचों और ग्राम वार्डों, खंड समितियों और ज़िला परिषदों के सदस्यों के पद पर लागू किया जाएगा।
  • हरियाणा में नियम के लागू होने पर यदि किसी वार्ड या गांव की अध्यक्षता एक पुरुष द्वारा की जाती है, तो इसका प्रतिनिधित्व अगले कार्यकाल में एक महिला द्वारा किया जाएगा।
  • उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं के लिये आरक्षण की व्यवस्था करना नहीं है, बल्कि इस विधेयक का उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं के लिये समान अवसर सुनिश्चित करना है।
    • ध्यातव्य है कि देश के राज्यों में महिलाओं को स्थानीय स्वशासन में 50 प्रतिशत का आरक्षण प्रदान किया गया है, और ऐसे राज्यों में महिलाओं का प्रतिनिधित्त्व तकरीबन 67 प्रतिशत है।

लाभ इस प्रकार की व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं और पुरुषों के बीच अवसर की समानता सुनिश्चित करना है।

सीमाएँ महिलाओं को पंचायत के भीतर विभिन्न परस्पर विरोधी हितों का प्रबंधन करने और बातचीत करने के कौशल सीखने में समय लग सकता है, हालाँकि सरकार द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

स्थानीय स्वशासन की अवधारणा

  • लोकतंत्र का सही अर्थ होता है सार्थक भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही। जीवंत और मज़बूत स्थानीय शासन भागीदारी और जवाबदेही दोनों को सुनिश्चित करता है।
  • स्थानीय स्वशासन की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह होती है कि यह देश के आम नागरिकों के सबसे करीब होता है और इसलिये यह लोकतंत्र में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने में सक्षम होता है।
  • सही मायनों में स्थानीय सरकार का अर्थ है, स्थानीय लोगों द्वारा स्थानीय मामलों का प्रबंधन। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि स्थानीय समस्याओं और ज़रूरतों की समझ केंद्रीय या राज्य सरकारों की अपेक्षा स्थानीय लोगों को अधिक होती है।

स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भागीदारी

  • वर्ष 1992 में भारत सरकार ने शासन के विकेंद्रीकृत मॉडल को अपनाने तथा भागीदारी एवं समावेशन को मज़बूत करने के लिये 73वें और 74वें संविधान संशोधन को पारित किया
  • इस संशोधन के माध्यम से महिलाओं तथा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित लोगों के लिये सीटों के आरक्षण को अनिवार्य कर दिया गया।
  • ऐसे कई अध्ययन मौजूद हैं जो यह दर्शाते हैं कि सरकार द्वारा दिये गए इस आरक्षण ने सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में काफी सुधार किया है।
  • कई अध्ययनों में पाया गया है कि स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भागीदारी की सबसे अच्छी बात यह है कि स्थानीय शासन में मौजूद महिलाएं संवेदनशील वर्गों खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की ज़रूरतों और हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करती हैं।

 स्थानीय स्वशासन में महिलाओं के लिये चुनौती

  • पितृसत्तात्मकता:प्रायः यह देखा जाता है कि कई महिलाओं को अपने परिवार से चुनाव लड़ने की अनुमति ही नहीं मिलती है, साथ ही कई महिलाएँ अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के लिये पर्दे के पीछे से काम करती रहती हैं और उन्हें कोई नहीं जान पाता है।
    • घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ, पर्दा प्रथा और घरेलू हिंसा आदि कारक महिलाओं के कामकाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।
  • आवश्यक कौशल का अभाव:अधिकांश महिला प्रतिनिधि पहली बार इस प्रकार सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करती हैं, जिसके कारण पंचायतों के मामलों का प्रबंधन करने के लिये उनके पास पर्याप्त ज्ञान और कौशल का अभाव होता है।
    • सरकारी प्रशिक्षण एजेंसियों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम समय में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को कवर करने में असमर्थ हैं।
  • दो बच्चों की नीति:भारत के कई राज्यों ने पंचायत के चुनाव लड़ने के लिये दो अथवा दो से कम बच्चों की नीति को सख्ती से लागू किया है, कई बार यह नीति स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने में महिलाओं के समक्ष बाधा उत्पन्न करती है।
  • जाति व्यवस्था:ग्रामीण भारत की जड़ों में मौजूद जाति व्यवस्था महिलाओं खासतौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिये स्वतंत्र एवं प्रभावी रूप से कार्य करने में चुनौती खड़ी करती है।
  • प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं की कमी:प्रशासनिक तथा अन्य स्तरों पर महिला सहकर्मियों के प्रतिनिधित्त्व के अभाव के कारण भी महिलाओं को अपने रोज़मर्रा के काम-काज में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 आगे की राह

  • हरियाणा सरकार का वर्तमान प्रस्ताव एक स्वागतयोग्य कदम है। हालाँकि, राज्य सरकार को यह ध्यान रखना चाहिये कि महिलाओं और पुरुषों के बीच सामाजिक-राजनीतिक समानता सुनिश्चित करने के लिये केवल प्रतिनिधित्व में समानता लाना ही पर्याप्त नहीं है, इसके अलावा महिलाओं की अपेक्षाकृत वंचित स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिये।
  • ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में महिलाओं के प्रतिनिधित्त्व को बढ़ाने से संसद में भी उनके बेहतर प्रतिनिधित्त्व की संभावना बढ़ जाएगी, जो कि वर्तमान में केवल 14 प्रतिशत है।
  • महिला प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में सरकारों को नागरिक समाज संगठनों, महिला समूहों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसेयूएन वीमेन (UN Women) आदि को भी शामिल किया जाना चाहिये।

लोकायुक्त

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

  • हाल ही में नागालैंड राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपने लोकायुक्त को हटाये जाने के संदर्भ में एक याचिका दायर की गयी थी। इस याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त के लिए अपनी शक्तियों और कार्यों के प्रयोग को बंद करने तथा अपने सभी कार्यों को उप-लोकायुक्त को हस्तांतरित करने का नोटिस जारी किया है।
  • राज्य द्वारा दायर याचिका में न्यायालय से लोकायुक्त की संस्थागत अखंडता को बनाए रखने के लिएसंविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करने का निवेदन किया गया।

लोकायुक्त क्या है?

लोकायुक्त एक भ्रष्टाचाररोधी प्राधिकरण अथवा लोकपाल होता है – सरकार द्वारा जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त एक अधिकारी।

यह लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार और कु-प्रशासन के आरोपों की जांच करता है तथा इसका कार्य लोक शिकायतों के त्वरित निवारण करना है।

लोकायुक्त का उद्भव-

वर्ष 1966 में स्वर्गीय मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक सुधार आयोग ने लोकायुक्त संस्था की स्थापना की सिफारिश की।

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013, जिसे आमतौर पर लोकपाल अधिनियम के नाम से जाना जाता है, भारत की संसद द्वारा दिसंबर 2013 में पारित किया गया था।

  1. इस अधिनियम में ‘लोक सेवकों के आचरण से संबंधित आरोपों या शिकायतों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए’ लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  2. इसके अंतर्गतकेंद्रीय स्तर पर लोकपाल की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।

लोकायुक्त के रूप में किसे नियुक्त किया जाता है?

लोकायुक्त आमतौर पर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश होते हैं और उनका निश्चित कार्यकाल होता है।

लोकायुक्त का चयन

  1. मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, विधान सभा के अध्यक्ष, विधान परिषद के अध्यक्ष, विधान सभा में विपक्ष के नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता के परामर्श के बाद लोकायुक्त के रूप में किसी व्यक्ति काचयन करता है।
  2. लोकायुक्त कीनियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  3. नियुक्त होने के बाद, लोकायुक्त को सरकार द्वारा हटाया या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है, तथा केवल राज्य विधानसभा द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पारित करके पदमुक्त किया जा सकता है।

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB)

 G.S. Paper-III (Economy)

संदर्भ

भारत सरकारमहाराष्ट्र सरकारमुंबई रेलवे विकास निगम और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) ने मुंबई में उपनगरीय रेलवे प्रणाली की नेटवर्क क्षमता, सेवा गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार के लिए आज 500 मिलियन डॉलर की मुंबई शहरी परिवहन परियोजना- III के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

AIIB क्या है?

एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) एक बहुपक्षीय विकास बैंक है। यह एशिया और उसके बाहर के सामाजिक और आर्थिक परिणामों में सुधार के लिये एक मिशन के रूप में कार्य करता है।

  1. इसका मुख्यालय बीजिंग में है।
  2. AIIB ने जनवरी 2016 में कार्य करना शुरू किया और वर्तमान में इसके 103 अनुमोदित सदस्य हैं।

AIIB में नए सदस्यों की भर्ती-

  1. एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एकखुली और समावेशी बहुपक्षीय वित्तीय संस्था है।
  2. ‘अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक‘ (International Bank for Reconstruction and Development -IBRD) अथवा एशियाई विकास बैंक के सदस्यों कोAIIB की सदस्यता प्रदान की जाती है।
  3. अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों (Multilateral Development Bank- MDB) के विपरीत, AIIB गैर-संप्रभु संस्थाओं को- जिनके मूल देश IBRD अथवा ADB के सदस्य हैं, सदस्यता के लिए अवसर प्रदान करता है।

AIIB परियोजनाओं हेतु विशेष निधि-

  1. AIIB परियोजनाओं की तैयारी के लिए जून 2016 में विशेष फंड का गठन किया गया था, यह एक बहु-दाता सुविधा है।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य पात्र एआईआईबी सदस्यों, विशेष रूप से अल्प-आय वाले सदस्य देशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाएं तैयार तैयार करने में वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  3. इस विशेष निधि के तहतइंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तैयार करने के लिए तकनीकी सहायता अनुदान प्रदान किया जाता है। इन अनुदानों से, सहायता-प्राप्त देश परियोजना निर्माण के लिए आवश्यक विशेषज्ञों और सलाहकारों को नियुक्त कर सकते हैं।

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के विभिन्न अंग

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: गवर्नर्स बोर्ड में प्रत्येक सदस्य देश द्वारा नियुक्त एक गवर्नर तथा एक वैकल्पिक गवर्नर होते हैं।

निदेशक मंडल: बैंक के सामान्य संचालन के लिए गैर-निवासी निदेशक मंडल (Non-resident Board of Directors) जिम्मेदार होता है, इस निदेशक मंडल को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा सभी शक्तियां प्रदान की जाती है। इनके कार्यों में बैंक की रणनीति बनाना, वार्षिक योजना और बजट को मंजूरी देना, नीति-निर्माण; बैंक संचालन से संबंधित निर्णय लेना; और बैंक के प्रबंधन और संचालन की देखरेख और एक निगरानी तंत्र स्थापित करना आदि सम्मिलित है।

अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार पैनल: AIIB द्वारा बैंक की रणनीतियों तथा नीतियों के साथ-साथ सामान्य  परिचालन मुद्दों पर बैंक के अध्यक्ष और शीर्ष प्रबंधन की सहायता हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार पैनल (International Advisory Panel- IAP) का गठन किया गया है।

एआईआईबी का महत्व

संयुक्त राष्ट्र द्वारा एआईआईबी की शुरुआत को वैश्विक आर्थिक प्रशासन के संबंध में ‘सतत विकास हेतु वित्तपोषण में वृद्धि’ की क्षमता के रूप में संबोधित किया गया है। बैंक की कुल पूंजी $ 100 बिलियन है, जो एशियाई विकास बैंक की पूंजी के 2 /3 के बराबर है तथा विश्व बैंक की लगभग आधी पूंजी के बराबर है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गुवाहाटी में भारत का सबसे लंबा नदी रोपवे

  • असम के गुवाहाटी को देश का सबसे लंबा रिवर रोपवे मिल गया है।
  • इससे उत्तरी गुवाहाटी और शहर के मध्य हिस्सों के बीच यात्रा का समय घटकर आठ मिनट रह जाएगा।
  • यह रोपवे ब्रह्मपुत्र नदी के दो किनारों को आपस में जोड़ेगा।
  • यह रोपवे 1.8 किलोमीटर लंबा है. इस में दो केबिन हैं, हर केबिन में 30 यात्री बैठ सकते हैं।

 

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