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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम

8th September, 2020

Start-Up Village Entrepreneurship Programme-SVEP

G.S. Paper-II (National)

चर्चा का कारण-

  • हाल के वर्षों में SVEP ने प्रभावशाली प्रगति की है और अगस्त 2020 के अनुसार 23 राज्यों के 153 ब्लॉकों में व्यवसाय सहायता सेवाओं और पूंजी प्रेरित करने के बारे में सहायता प्रदान की है।
  • 2020 रिपोर्ट के अनुसारसामुदायिक संसाधन व्यक्तिउद्यम संवर्धन’ (Community Resource Person-Enterprise Promotion: CRP-EP) के लगभग 2000 प्रशिक्षित कैडर ग्रामीण उद्यमियों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

‘स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम’ क्या है?

स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP), दीनदयाल अंत्योदय योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 2016 से एक उपयोजना के रूप में लागू किया गया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य: इसका उद्देश्‍य ग्रामीणों को गरीबी से बाहर निकालना, उनकी उद्यम स्थापना में मदद करना और उद्यमों के स्थिर होने तक सहायता उपलब्ध कराना है।

  • भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान(Entrepreneurship Development Institute of India– EDII), अहमदाबाद SVEP का तकनीकी सहयोगी है।
  • SVEP व्यक्तिगत और समूह उद्यमोंदोनों को बढ़ावा देता है। यह मुख्य रूप से विनिर्माण, व्यवसाय और सेवा क्षेत्रों में उद्यमों की स्थापना और प्रोत्साहन देता है।

सामुदायिक संसाधन व्यक्ति-उद्यम संवर्धन’ (CRP-EP)-

  • SVEP का उद्देश्य एक समुदाय संसाधन व्यक्तियोंउद्यम संवर्धन (CRP-EP) को विकसित करना है, जो स्थानीय है और ग्रामीण उद्यमों की स्थापना करने में ग्रामीण उद्यमियों की मदद करता है।
  • CRP-EPs प्रमाणित होते हैं और उद्यमियों को व्यावसायिक सहायता सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी घाटी पर निम्न ओजोन स्तर

(Low ozone over Brahmaputra River Valley)

G.S. Paper-III (Environment)

संदर्भ-

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के दौरान यह पाया है कि भारत के पूर्वोत्तर भाग के ब्रह्मपुत्र नदी घाटी (BRV) क्षेत्र में सतह निकट ओजोन की सांद्रता भारत के अन्य स्थानों की तुलना में कम है।

क्षोभमंडलीय अथवा भूमि-स्तरीय ओजोन क्या है?

यह नाइट्रोजन (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (volatile organic compounds– VOC) के ऑक्साइड के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा निर्मित होती है। इसमें आमतौर पर, कारों, विद्युत संयंत्रों, औद्योगिक बॉयलरों, रिफाइनरियों, रासायनिक संयंत्रों और अन्य स्रोतों से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में उत्सर्जित प्रदूषक रासायनिक प्रतिक्रिया करने पर वृद्धि होती है तथा जिससे मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

ब्रह्मपुत्र घाटी में निम्न ओजोन का कारण-

यह क्षेत्र आस-पास के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे स्थानीय स्रोतों से अच्छी तरह से प्रभावित है। दिन के उजाले के दौरान, यह क्षेत्र ओजोन सांद्रता पर कार्बनिक प्रजातियों के कम प्रभाव का संकेत देता है या फिर एक फोटो-स्टेशनरी स्थिति में या उसके करीब रहता है।

भूमि-स्तरीय ओजोन के संदर्भ में चिंताएं-

  • जमीनी स्तर पर ओजोन एकहानिकारक वायु प्रदूषक होती है, क्योंकि इसका प्रभाव लोगों और पर्यावरण पर पड़ता है, और यह ‘धूम्र-कोहरा’ का मुख्य घटक है।
  • जमीनी स्तर से कुछ उपर उठती हुई ओजोन के संपर्क में आने से कृषि फसलें तथा वृक्ष, विशेषकर धीमी गति से पकने वाली फसलें तथा लम्बी आयु वाले वृक्ष, प्रभावित होते हैं।
  • भूमि-स्तरीय ओजोन के संपर्क में आने से स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे श्वसन प्रणाली तथा विशेष रूप से फेफड़ों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

इंस्टा फैक्ट्स:

ओजोन का निर्माण प्राकृतिक रूप से समताप मंडल में, अत्यधिक ऊर्जा युक्त सौर विकिरण के ऑक्सीजन के अणुओं पर हमला करके उसे दो ऑक्सीजन परमाणुओं में विखंडित करने के दौरान निर्मित होती है। इस प्रक्रिया को प्रकाशअपघटन’ (Photolysis) कहा जाता है। इस प्रकार, जब एक मुक्त परमाणु दूसरे O2 से टकराता है, तो ओजोन (O3) का निर्माण होता है।

डीआरडीओ  द्वारा हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण

G.S. Paper-III (S & T)

संदर्भ-

  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 07 सितम्बर 2020 को ओडिशा तट के पास डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप से मानव रहित स्क्रैमजेट का हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट का सफल परीक्षण किया। डीआरडीओ ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसमें देश में विकसित सक्रेमजेट प्रपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
  • डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट प्रपल्सन सिस्टम के इस्तेमाल से हाइपरसोनिक टेक्नॉलजी डिमॉन्स्ट्रेटर वीइकल (एचएसटीडीवी) की टेस्टिंग की। खास बात यह है कि स्क्रैमजेट प्रपल्सन सिस्टम को देश में ही विकसित किया गया है। डीआरडीओ ने इस मिशन को ऐतिहासिक करार दिया है।

एचएसटीडीवी क्या है?

  • एचएसटीडीवी का भविष्य में न केवल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होगा बल्कि इसकी मदद से काफी कम खर्चे में सैटेलाइट लॉन्चिंग की जा सकेगी। एचएसटीडीवी हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए यान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। स्क्रैमजेट के हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा क्षमता आसमान और अंतरिक्ष दोनों में बढ़ेगी

भारत ऐसा करने वाला चौथा देश-

  • भारत 07 सितम्बर 2020 को अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा चौथा देश बन गया जिसके पास हाइपरसोनिक टेक्नॉलजी है। ओडिशा के बालासोर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम टेस्टिंग रेंज से एचएसटीडीवी के सफल परीक्षण के बाद भारत ने वह तकनीक हासिल कर ली है जिससे मिसाइलों की स्पीड साउंड से छह गुना अधिक करने का रास्ता साफ हो गया है।

उद्देश्य-

  • यह हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरने वाला मानव रहित स्क्रैमजेट सिस्टम है। इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक है। इसके साथ ही ये आसमान में 20 सेकेंड में लगभग5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। बता दें कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंट्रेटर व्हीकल यानी एचएसटीडीवी प्रोजेक्ट डीआरडीओ की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। इसका उद्देश्य कई सैन्य और नागरिक लक्ष्यों को सेवाएं देना है। इससे पहले अमेरिका और रूस भी हाइपरसोनिक विमान का परीक्षण कर चुके हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

आंध्रप्रदेश में दुर्लभ शिलालेख

(Rare Inscription in Andhra Pradesh)

चर्चा का कारण-

हाल ही में आंध्रप्रदेश के कुडप्पा (Kadapa) ज़िले में खुदाई के दौरान रेनाटी चोल युग (Renati Chola Era) के एक दुर्लभ शिलालेख (Rare Inscription) की प्राप्ति हुई है।

प्रमुख बिंदु-

  • यह दुर्लभ शिलालेख डोलोमाइट चट्टान का एक टुकड़ा है। जिस पर तेलुगू भाषा में उत्कीर्ण किया गया है।
  • 25 पंक्तियों में उत्कीर्ण इस शिलालेख को पुरातन तेलुगू भाषा में लिखा गया था, चट्टान के एक तरफ 11 पंक्तियों को तथा 14 पंक्तियों को दूसरी तरफ उत्कीर्ण किया गया था।
  • यह शिलालेख 8वीं शताब्दी के आसपास का बताया जाता है जब यह क्षेत्र (कडप्पा ज़िले के आसपास का क्षेत्र ) रेनाडू (Renadu) के चोल महाराजा के अधीन था।
  • शिक्षाविद् बताते हैं कि यह शिलालेखसिद्यामायु (Sidyamayu) नामक एक व्यक्ति को उपहार में दी गई छह मार्टटस [Marttus- एक प्रकार की भूमि मापने की इकाई) भूमि के रिकॉर्ड से संबंधित है।
  • सिद्यामायु (Sidyamayu), पिडुकुला गाँव में मंदिर की सेवा करने वाले ब्राह्मणों में से एक ब्राह्मण था।

 

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