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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

सरकारी प्रतिभूतियाँ

G.S. Paper-II 

संदर्भ:

  • हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लघु निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर सीधी पहुँच प्रदान की गयी है।
  • इसके बाद से, खुदरा निवेशक सीधे आरबीआई के साथ अपना गिल्ट अकाउंट खोल सकते हैं, और सरकारी प्रतिभूतियों में व्यापार कर सकते हैं।

वर्तमान प्रस्ताव की आवश्यकता-

‘सरकारी प्रतिभूति’ (G-Sec) बाजार में मुख्यतः संस्थागत निवेशकों, जैसे कि बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों का वर्चस्व है। ये इकाइयाँ 5 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक राशि में व्यापार करती हैं।

  1. इसलिए, अल्प राशि के साथ व्यापार करने के इच्छुक छोटे निवेशकों के लिए द्वितीयक बाजार में तरलता उपलब्ध नहीं पाती होती है। दूसरे शब्दों में, इनके निवेश करने का कोई आसान तरीका नहीं मिल पाता है।
  2. इस कारण, वर्तमान में, सीधे ‘सरकारी प्रतिभूतियों’ में व्यापार करना, खुदरा निवेशकों के मध्य अधिक लोकप्रिय नहीं है।

‘सरकारी प्रतिभूतियाँ’ क्या होती हैं?

सरकारी प्रति‍भूति‍ (Government Security G-Sec), केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी किये गए ‘व्यापार योग्य उपकरण’ (Tradeable Instrument) होती हैं।

प्रमुख विशेषताऐं:

  1. यह सरकार के ऋण दायित्वों को स्वीकार करती है।
  2. ऐसी प्रतिभूतियां, अल्पकालिक (ट्रेजरी बिल – एक वर्ष से कम अवधि की मूल परिपक्वता सहित) अथवा दीर्घकालिक (सरकारी बांड या दिनांकित प्रतिभूतियां – एक वर्ष या अधिक अवधि की मूल परिपक्वता सहित) दोनों प्रकार की हो सकती हैं।
  3. केंद्र सरकार, ट्रेजरी बिल और सरकारी बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियां, दोनों को जारी करती है।
  4. राज्य सरकारें केवल बांड अथवा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण कहा जाता है।
  5. चूंकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है, अतः इनके डिफ़ॉल्ट होने का कोई जोखिम नहीं होता है, और इसलिए, उन्हें जोखिम-मुक्त सुरक्षित उपकरण (Risk Free Gilt-Edged Instruments) कहा जाता है।
  6. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को समय-समय पर निर्धारित सीमा के भीतर G-Secs बाजार में भागीदारी हेतु अनुमति दी गयी है।

द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रति‍भूति‍यों (G-Secs) की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है।

इनकी कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित होते हैं:

  1. प्रतिभूतियों की मांग और आपूर्ति
  2. अर्थव्यवस्था के भीतर ब्याज दरों में होने वाले परिवर्तन तथा अन्य वृहत-आर्थिक कारक, जैसे तरलता और मुद्रास्फीति।
  3. अन्य बाजारों, जैसे वित्त, विदेशी मुद्रा, ऋण और पूंजी बाजार में होने वाला विकास।
  4. अंतर्राष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों, विशेष रूप से यूएस ट्रेजरीज़ में होने वाला विकास।
  5. RBI द्वारा किये जाने वाले नीतिगत परिवर्तन, जैसे रेपो दरों में बदलाव, नकदी-आरक्षित अनुपात और खुले बाजार के परिचालन।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘परिवार पहचान पत्र’ योजना

यह हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गयी एक विशिष्ट पहचान पत्र योजना है।

  1. इसके तहत हरियाणा आवासीय पते वाला कोई भी परिवार योजना के अंतर्गत नामांकन कर सकता है।
  2. इस योजना के अंतर्गत हरियाणा में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार को एक आठ अक्षरांकीय (eight-digit alpha numeric) ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) प्रदान किया जाएगा।
  3. एक ‘पंजीकरण पहचान पत्र’ उन लोगों को भी प्रदान किया जाएगा, जो हरियाणा में निवास करते है, किंतु निवास हेतु आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
  4. अब तक, सरल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही 110 से अधिक सेवाओं और योजनाओं को पीपीपी योजना से जोड़ा जा चुका है।

 

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