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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

समुद्र का बढ़ता तापमान

5thOctober 2019

समाचार में क्यों?         

हाल ही में जारी जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change- IPCC) की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों (Green House Gases- GHG) के उत्सर्जन की दर को कम नहीं किया गया तो वर्ष 2100 तक दुनिया भर के महासागर पिछले 50 वर्षों की तुलना में पाँच से सात गुना अधिक गर्मी को अवशोषित करेंगे, जिसके कारण उनके तापमान में भारी वृद्धि हो सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • रिपोर्ट में इस बात की चेतावनी दी गई है कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो वर्ष 2100 तक वैश्विक समुद्र-स्तर में कम-से-कम एक मीटर तक की वृद्धि होगी जिसके कारण मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और सूरत सहित कई तटीय शहर जलमग्न हो जाएंगे।
  • समुद्री हीटवेव (Marine Heatwaves) का अधिक तीव्र एवं चिरस्थायी होने का अनुमान है और इसकी बारंबारता में भी 50 गुना तक की वृद्धि हो सकती है।
  • समुद्र के स्तर में वृद्धि कई अन्य चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि का कारण बन सकती है, जैसा कि उच्च ज्वार और तीव्र तूफान के संदर्भ में होता है।
  • रिपोर्ट में अल-नीनो और ला-नीना जैसी परिघटनाओं की बारंबारता में वृद्धि की चेतावनी दी गई है।

समुद्र का बढ़ता तापमान और उसका प्रभावः

  •  पृथ्वी की सतह के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से में महासागर अवस्थित हैं जो गर्मी को अवशोषित कर उसका समान रूप से वितरित करने जैसी महत्त्वपूर्ण पारितंत्रीय सेवाएँ प्रदान करते हैं।
  • जैसे ही पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि होती है, समुद्र द्वारा अधिकांश अतिरिक्त ऊष्मा का अवशोषण कर लिया जाता है। फलतः वैश्विक उष्मण का सर्वाधिक प्रभाव समुद्र पर पड़ता है।
  • साथ ही गर्म महासागरों का सीधा संबंध मजबूत चक्रवात और तीव्र तूफान जैसी परिघटनाओं से होता है जिसके कारण कई तटीय क्षेत्रों में अभूतपूर्व अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उदाहरण के लिये-
  • वर्ष 2014 में चक्रवात नीलोफर मानसून के बाद के मौसम में अरब सागर में दर्ज होने वाला पहला सबसे गंभीर चक्रवात था। इससे पहले देश में आने वाले चक्रवात आमतौर पर बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते थे और भारत के पूर्वी तट पर अपना लैंडफॉल बनाते थे। यद्यपि चक्रवात निलोफर ने लैंडफॉल (चक्रवात का जलीय भाग से स्थल पर प्रवेश करने की परिघटना) नहीं बनाया, लेकिन इससे देश के पश्चिमी तट में भारी बारिश हुई।
  • अक्टुबर 2014 में चक्रवात लुबन की वजह से समुद्र के स्तर में सामान्य वृद्धि और उच्च ज्वार के दोहरे प्रभाव ने गोवा में कई समुद्र तटों को जलमग्न कर दिया था।
  • गर्म होते महासागरों ने चक्रवात व्यवहार को अन्य तरीकों से भी बदल दिया है। वर्ष 2017 में चक्रवात ओखी जो बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न हुआ, ने 2,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर भारत के पश्चिमी तट पर भारी तबाही मचाई और पिछले 30 वर्षों में ऐसा करने वाला यह पहला चक्रवात था।

आगे की राहः

  • हरितगृह गैसों के उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिये।
  • चरम मौसमी घटनाओं के खिलाफ लोगों के लचीलेपन को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढाँचे और ज्ञान प्रणालियों में निवेश में वृद्धि का प्रयास करना चाहिये।
  • हालाँकि, पेरिस जलवायु संधि के बाद से इस संदर्भ में लगातार सकारात्मक प्रयास किये जाते रहे हैं फिर भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए नवीनतम रिपोर्ट को वेक-अप कॉल के रूप में देखा जाना चाहिये।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देते हुए विकसित देशों द्वारा तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग को सुनिश्चित करने तथा विकासशील देशों द्वारा इससे जुड़े वैश्विक संधि एवं समझौतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने पर बल देना चाहिये।

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प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

रिजर्व बैंक ने रेपो दर में की कमी – विकास दर अनुमान भी घटाया:

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 5.4 प्रतिशत से घटाकर 5.15 प्रतिशत कर दिया है।
  • रिवर्स रेपो दर भी घटाकर 9 प्रतिशत और बैंक दर 5.4 प्रतिशत कर दी गई है।
  • इस वर्ष बैंक ने लगातार पाँचवीं बार रेपो दर में कमी की है।
  • रेपो दर में कमी का उद्देश्य आवास और वाहन ऋण की दरों में कमी लाना है जो अब इस दर के साथ सीधे जुड़ गए हैं।
  • भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिये उदार नीति जारी रखने का फैसला किया है ताकि महंगाई नियंत्रण में रहे।

विकास दर अनुमान घटाया:

  • रिजर्व बैंक ने वर्ष 2019-20 के लिये GDP विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। वर्ष 2020-21 के लिये यह अनुमान संशोधित करके 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है।

IMF ने भी घटाया था विकास दर का अनुमान:

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिये भारत की विकास दर के अनुमान को घटाया था। IMF ने वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसमें 0.30 प्रतिशत की कटौती की गई है।
  • इस संदर्भ में IMF का कहना है कि कॉर्पोरेट और विनियमन अनिश्चितताओं तथा कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं की कमजोरी के कारण भारत की आर्थिक विकास दर अनुमान से अधिक कमजोर हुई है।

(ADB)  ने भी की थी कटौती:

  • एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिये भारत के विकास अनुमान में कमी करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत कर दिया था।
  • (ADB) ने एशियाई विकास परिदृश्य 2019 अपडेट में वित्त वर्ष 2019-20 के लिये भारत का GDP विकास अनुमान घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था।

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