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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

सचेतक (व्हिप) क्या होता है?

3rd August, 2020

G.S. Paper-II (National)

 

 

संदर्भ-

हाल ही में, राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) द्वारा बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गयी है। उच्च न्यायालय ने इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने का विधानसभा अध्यक्ष को आदेश दिया था।

 

विवाद का विषय

  • मुख्य सचेतक के अनुसार, 24 जुलाई को उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश ‘किहोतो होलोहान (Kihoto Hollohan) प्रकरण’, 1992 में उच्चत्तम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले का उल्लंघन करता है।
  • उच्चत्तम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अदालतों को विधानसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय से पहले अयोग्यता की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।अयोग्यता कार्यवाही की न्यायिक समीक्षा भी काफी सीमित की गयी थी।
  • हालांकि, उच्च न्यायालय द्वारा, इस मामले में,  अयोग्यता कार्यवाही के नोटिस चरण में ही हस्तक्षेप किया गया है।

 

सचेतक क्या होता है?

  • सचेतक (Whip), किसी राजनीतिक दल का एक अधिकारी होता है जो संसद सदन अथवा विधान सभा के अंदर दल के ‘प्रवर्तक’ (Enforcer) के रूप में कार्य करता है।
  • राजनीतिक पार्टियां, सदन के अंदर व्हिप जारी करने के लिए अपने सदस्यों में से वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त करती हैं – इस सदस्य को मुख्य सचेतक (Chief Whip) कहा जाता है, तथा इसकी सहायता के लिए पार्टियों द्वारा अतिरिक्त सचेतक भी नियुक्त किये जाते है।
  • भारत को व्हिप की अवधारणा ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से विरासत में प्राप्त हुई है।
  • (नोट: संसदीय भाषा में व्हिप, सदन में होने वाले किसी मतदान में उपस्थित रहने तथा किसी विशेष तरीके से मतदान में भाग लेने के लिए, राजनीतिक पार्टी द्वारा अपने सदस्यों को जारी किया गया लिखित आदेश भी होता है।)

 

सचेतक की भूमिका

पार्टी सचेतक/व्हिप, सदन में अपनी पार्टी की आधिकारिक नीति के अनुसार, अपने दल के सदस्यों द्वारा मतदान सत्र में भाग लेने और मतदान करने को सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं।

 

व्हिप के उल्लंघन करने पर स्थिति

  1. सदन में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर सदन के सदस्य को अयोग्यता कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। यदि, सदन में किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते है, उन्हें दल-बदल क़ानून के तहत अयोग्यता कार्यवाही से छूट प्राप्त होती है।
  2. सदस्यों की अयोग्यता का निर्धारण सदन के अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।

 

 

सचेतक की सीमा

राष्ट्रपति निर्वाचन, जैसे कुछ मामलों में सचेतक/व्हिप किसी संसद सदस्य अथवा विधान सभा सदस्य को किसी विशेष प्रकार से मतदान करने का निर्देश नहीं दे सकते।

 

व्हिप के प्रकार

राजनीतिक पार्टी द्वारा तीन प्रकार के व्हिप अथवा निर्देश जारी किए जाते हैं:

  1. वन लाइन व्हिप (One-line whip):इसे पार्टी के सदस्यों को मतदान के बारे में सूचित करने के लिए जारी किया जाता है। इस प्रकार की व्हिप में सदस्य, पार्टी की नीति से सहमत नहीं होने पर मतदान में अनुपस्थित रह सकते हैं।
  2. टू लाइन व्हिप (Two-line whip):इसके द्वार सदस्यों को मतदान के समय सदन में उपस्थित रहने का निर्देश जारी किया जाता है।
  3. थ्री लाइन व्हिप (Three-line whip):इसके द्वारा सदस्यों को पार्टी नीति के अनुसार मतदान करने का निर्देश जारी किया जाता है।

 

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नई शिक्षा नीति

G.S. Paper-II (National)

 

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया.
  • इससे पहले 01 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने नई शिक्षा नीति के मसौदे की समीक्षा की थी.  34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए ये बेहद महत्वपूर्ण है. नई शिक्षा नीति में भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है.

 

नई शिक्षा नीति की कुछ अहम बातें

  • नई शिक्षा नीति में भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है. सरकार की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि छात्र 2 से 8 साल की उम्र में जल्दी भाषाएं सीख जाते हैं. इसलिए उन्हें शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है.
  • नई एजुकेशन पॉलिसी में केंद्र सरकार द्वारा नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा गया है. नया प्रस्ताव 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है. यह 3 से 18 साल के छात्रों यानि की नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है.
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एमफिल पाठ्यक्रमों को बंद किया जाएगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित नई शिक्षा नीति के अनुसार बोर्ड परीक्षाएं जानकारी के अनुप्रयोग पर आधारित होंगी.
  • छात्रों का मानसिक के साथ शारीरिक विकास भी हो सके इसके लिए पढ़ाई के साथ फिजिकल एजुकेशन को जरूरी बनाने का नियम रखा गया है.
  • उच्च शिक्षा में प्रमुख सुधारों में 2035 तक 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात का लक्ष्य और एकाधिक प्रवेश / निकास का प्रावधान शामिल है.

 

नया शैक्षणिक सत्र सितंबर-अक्टूबर से शुरू

इस वर्ष कोरोना (कोविड-19) महामारी के चलते उच्च शिक्षा में नया शैक्षणिक सत्र सितंबर-अक्टूबर से शुरू हो रहा है. सरकार नई शिक्षा नीति को नए सत्र के शुरू होने से पहले लाना चाहती है.

 

नई शिक्षा नीति पर पिछले पांच सालों से काम

नई शिक्षा नीति पर पिछले लगभग पांच सालों से काम चल रहा था. इसरो के पूर्व प्रमुख के. कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली एक उच्चस्तरीय कमेटी ने इसे अंतिम रूप दिया. नई शिक्षा नीति में गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी अनिवार्य किए जाने का उल्लेख नहीं है.

 

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मुल्लापेरियार बांध विवाद

(Mullaperiyar Dam Issue)

 

G.S. Paper-III (Environment)

 

संदर्भ

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा मानसून के दौरान मुल्लापेरियार बांध में पानी के स्तर को कम करने की मांग वाली याचिका पर 24 अगस्त को विचार करने का फैसला किया गया है।

 

पृष्ठभूमि

कुछ समय पूर्व, केरल के इडुक्की जिले के एक निवासी ने उच्चत्तम न्यायालय में मुल्लापेरियार बांध के जलस्तर को 130 फीट तक कम करने के लिए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना है, राज्य में मानसून जारी होने के कारण क्षेत्र में भूकंप तथा बाढ़ आने का खतरा है।

 

मुल्लापेरियार बांध- महत्वपूर्ण तथ्य

  • यद्यपि, मुल्लापेरियार बांध केरल में स्थित है,किंतु, वर्ष 1886 में त्रावणकोर के महाराजा तथा भारत के राज्य सचिव के मध्य, पेरियार सिंचाई कार्यों के लिए 999 वर्षों के लिए पट्टा अनुबंधपत्र (lease indenture), जिसे पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर करने के बाद से इसका परिचालन तमिलनाडु द्वारा किया जाता है।
  • इसका निर्माण वर्ष 1887 और 1895 के मध्य किया गया था, इस बाँध से अरब सागर की बहने वाली नदी की धारा को मोड़कर बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित किया गया था, इसका उद्देश्य मद्रास प्रेसीडेंसी में मदुरई शुष्क वर्षा क्षेत्र को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराना था।
  • यह बांध केरल के इडुक्की ज़िले में मुल्लायार और पेरियार नदियों के संगम पर स्थित है।

 

विवाद का विषय

  • वर्ष 1970 में, तमिलनाडु और केरल दोनों राज्यों द्वारा पेरियार लेक पट्टा समझौते का नवीनीकरण किया गया था,जिसके अंतर्गत बाँध की भूमि तथा पानी के अधिकार के अलावा बाँध स्थल पर जल विद्युत परियोजनाओं को विकसित करने का अधिकार भी तमिलनाडु को दिया गया। इसके बदले में, तमिलनाडु, केरल के लिए एक निश्चित राशि किराये के तौर पर चुकता है।
  • वर्ष 1979 में एक साधारण से भूकंप से मुल्लापेरियार बांध में दरारें पड़ गयी, इसके पश्चात समझौते को लेकर पहली बार विवाद उत्पन्न हो गया
  • भारत सरकार के अधीन केंद्रीय जल आयोग द्वारा इस बांध का अध्ययन किया गया तथा इसने बांध के जलाशय में संग्रहीत पानी का स्तर को 142 फीट से घटाकर 136 फीट तक कम करने की सिफारिश की।
  • सुनिश्चित उपायों के लागू किये जाने के बाद ही तमिलनाडु प्रशासन, इस बांध की पूर्ण क्षमता 152 फीट तक जल स्तर को बढ़ा सकता है।

 

तमिलनाडु का पक्ष

तमिलनाडु का कहना है कि, बाँध को बांध को मजबूत करने के उपाय किए जा चुके हैं, किंतु केरल सरकार जलाशय के जल स्तर को बढ़ाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर रही है, जिससे मदुरै के किसानों को नुकसान हो रहा है।

 

केरल का पक्ष

  • केरल,  बाँध के प्रवाह की दिशा में स्थिति इडुक्की के भूकंप-प्रवण जिले के निवासियों द्वारा तबाही की आशंकाओं को लेकर चिंतित है।
  • वैज्ञानिकों का कहना है, कि इस क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर छह माप से ऊपर भूकंप आने पर, तीन मिलियन से अधिक लोगों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा

 

उच्चत्तम न्यायालय का निर्णय

  1. वर्ष 2006 में उच्चत्तम न्यायालय ने तमिलनाडु को जल स्तर 142 फीट तक बढ़ाने के लिए कानूनी मंजूरीप्रदान की।
  2. इसके प्रत्युत्तर में, केरल सरकार द्वारा वर्ष 2003 में केरल सिंचाई एवं जल संरक्षण अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसके तहत मुल्लापेरियार बाँध का अधिकतम जल स्तर 136 फीट निर्धारित कर दिया गया।
  3. हालांकि वर्ष 2012 में, शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बांध ‘संरचनात्मक और हाइड्रोलॉजिकल रूप से सुरक्षित’ है, और तमिलनाडु सरकार बाँध के जल स्तर 142 फीट तक बढ़ा सकती है।
  4. वर्ष 2014 में, न्यायलय द्वारा ‘केरल सिंचाई और जल संरक्षण अधिनियम’, 2003 संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए निरसित कर दिया गया
  5. उच्चत्तम न्यायालय द्वारा आपदा की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार तथा केरल और तमिलनाडु की सरकारों को आकस्मिक योजना तैयार करने के लिए तीन पैनल गठित करने का भी निर्देश दिया गया है।

 

निष्कर्ष

वर्षों के इन फैसलों के बाद भी, हाल के नवीनतम घटनाक्रम से पता चलता है कि मुल्लापेरियार बांध केरल और तमिलनाडु के बीच विवाद की हड्डी बना हुआ है। वर्ष 1886 के समझौते की सत्यता से लेकर बाँध की सुरक्षा, तथा इसके उपयोग और नियंत्रण के संबंध में अलग-अलग कई व्याख्याएं की जा रही है।

 

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प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

 

प्रतिहार शैली

 

राजस्थान के एक मंदिर से चोरी करके और ब्रिटेन में तस्करी कर लाई गई भगवान शिव की एक प्राचीन और अमूल्य प्रतिमा भारत में अपने सही स्थान पर वापस आने के लिए तैयार है. कहा जाता है कि राजस्थान की 9 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की प्रतिहार शैली में बनाई गई 4 फुट ऊँची प्रतिमा को 1998 में राजस्थान के एक मंदिर से चुराया गया था.

 

विशेषताएँ-

  • प्रतिहार कला शैली मध्यकालीन मूर्ति शैली है, इस शैली की प्रतिमाओं में गुप्त काल की अनेक विशेषताएँ समाहित हैं.
  • प्रतिहार कला शैली की प्रतिमाएँ मध्यकालीन शैली की अन्य कला शैलियों की तुलना में सबसे अधिक प्रभावशाली एवं सुन्दर हैं.
  • इस शैली की प्रतिमाओं के मुख पर प्रसन्नता का भाव प्रदर्शित होता है. इन प्रतिमाओं के शरीर की सुडौलता पर विशेष ध्यान दिया गया है तथा अलंकरणों का अल्प प्रयोग हुआ है.
  • उत्तर-प्रदेश के जिला झाँसी स्थित बरुआ सागर का विशाल मन्दिरप्रतिहार कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस मन्दिर के प्रवेश द्वार पर अनेक सुन्दर मूर्तियाँ उकेरी गईं हैं. इस मन्दिर की कलाकृतियों को देखने से स्पष्ट होता है कि उस समय के कलाकार मूर्तियों के अंग-प्रत्यंग की सुडौलता के प्रति अत्यन्त सजग थे तथा इनके निर्माण में सिद्धहस्त थे.
  • बटेश्वर हिन्दू मंदिर, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले मेंगुर्जर राजाओं के द्वारा निर्मित लगभग 200 बलुआ पत्थर से बने हिंदू मंदिर है. ये मंदिर समूह उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की शुरुआती गुर्जर-प्रतिहार शैली के मंदिर समूह हैं.

 

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