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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

संयुक्त व्यापक कार्य योजना

G.S. Paper-II

संदर्भ:

शीघ्र ही अमेरिका और ईरान, दोनों देशों द्वारा ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम’ को सीमित करने वाले समझौते में वापस शामिल होने के लिए मध्यस्थों के माध्यम से वार्ता शुरू की जाएगी। ज्ञात हो कि, लगभग तीन वर्ष पूर्व, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था।

संबंधित प्रकरण:

  1. राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा, वर्ष 2018 में, अमेरिका को समझौते से बाहर कर लिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने ईरान पर प्रतिबंधों और अन्य सख्त कार्रवाइयों को लागू करके उस पर ‘अधिकतम दबाव’ डालने का विकल्प चुना था।
  2. इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने यूरेनियम संवर्द्धन और अपकेन्द्रण यंत्रों (Centrifuges) का निर्माण तेज कर दिया, साथ ही इस बात पर जोर देता रहा कि, उसका परमाणु विकास कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, और इसका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा।
  3. ईरान की कार्यवाहियों ने ‘ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों’ के संबंध में प्रमुख वैश्विक शक्तियों पर दबाव बढ़ा दिया, जिससे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सहयोगियों और रणनीतिक साझेदारों के बीच तनाव में वृद्धि हुई।

‘ईरान परमाणु समझौते’ के बारे में:

  1. इसे ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action – JCPOA) के रूप में भी जाना जाता है।
  2. यह समझौता अर्थात ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’, ईरान तथा P5 + 1 (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जर्मनी, और यूरोपीय संघ) के मध्य वर्ष 2013 से 2015 से तक चली लंबी वार्ताओं का परिणाम था।
  3. इस समझौते के तहत, तेहरान द्वारा, परमाणु हथियारों के सभी प्रमुख घटकों, अर्थात सेंट्रीफ्यूज, समृद्ध यूरेनियम और भारी पानी, के अपने भण्डार में महत्वपूर्ण कटौती करने पर सहमति व्यक्त की गई थी।

वर्तमान में चिंता का विषय:

  1. जनवरी 2020 में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी पर ड्रोन हमले के बाद, ईरान ने ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (JCPOA) की शर्तो का पालन नहीं करने की घोषणा कर दी।
  2. JCPOA के भंग होने से ईरान, उत्तर कोरिया की भांति परमाणु अस्थिरता की ओर उन्मुख हो गया, जिससे इस क्षेत्र में और इसके बाहर भी महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस समझौते का भारत के लिए महत्व:

  1. ईरान पर लगे प्रतिबंध हटने से, चाबहार बंदरगाह, बंदर अब्बास पोर्ट, और क्षेत्रीय संपर्को से जुडी अन्य परियोजनाओं में भारत के हितों को फिर से सजीव किया जा सकता है।
  2. इससे भारत को, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीनी उपस्थिति को बेअसर करने में मदद मिलेगी।
  3. अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों की बहाली से भारत को ईरान से सस्ते तेल की खरीद और ऊर्जा सुरक्षा में सहायता मिलेगी।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सरस्वती सम्मान

  1. प्रसिद्ध मराठी लेखक डॉ. शरणकुमार लिम्बाले को उनकी पुस्तक “सनातन” के लिए सरस्वती सम्मान 2020 से सम्मानित किया गया है.
  2. यह पुरस्कार प्रतिवर्ष के.के. बिरला फाउंडेशन द्वारा साहित्य के लिए दिया जाता है जिसमें एक प्रशस्ति पत्र, एक अभिलेख और 15 लाख रु. मिलते हैं.

 

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