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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियान

18th November, 2020

G.S. Paper-II

संदर्भ:

चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों (United Nations Peace Keeping missions– UNPK missions) में सैन्य योगदान में वृद्धि की जा रही है। इसे देखते हुए भारत और अमेरिका द्वारा अफ्रीकी देशों के लिए जारी पहल की तर्ज पर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से शांति रक्षा मिशनों के लिए सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं।

भारत और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना-

  1. भारत, संयुक्त राष्ट्र में सैन्य शक्ति का योगदान करने वाले शीर्ष देशों में लगातार बना हुआ है, और इस मामले मेंवैश्विक स्तर पर पांचवे स्थान पर है। भारत के 5,424 सैन्य कर्मियों द्वारा आठ देशों में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सेवाएँ दी जा रही है।
  2. भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र नियमित बजट में 83% और शांति सेना बजट में16% का योगदान किया जाता है।
  3. भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के कुल 71 अभियानों में से 51 अभियानों में भाग लिया है, और इनमे 2 लाख से अधिक कर्मियों का योगदान दिया है।
  4. भारत के शांति सैनिक, लेबनान, गोलन हाइट्स, कांगो और दक्षिण सूडान में तैनात किये गए है, इसके अलावा भारतीय सैन्य कर्मियों को अन्य अभियानों में स्टाफ अधिकारियों के रूप में तैनात किया गया है।
  5. भारत द्वारा दक्षिण सूडान और कांगो में क्रमशः दो तथा एक क्षेत्रीय अस्पताल भी स्थापित किये गए है।
  6. वर्ष 2018 से, भारत ने लेबनान मिशन में कजाकिस्तान की एक सैन्य टुकड़ी को सहयोजित किया है।

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना-

  1. अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सैन्य कर्मियों का कोई योगदान नहीं किया जाता है, किंतु यह संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के बजट में 27% का योगदान करता है।
  2. वर्ष 2016 में, भारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शांति अभियानों में भाग लेने हेतु अफ्रीकी सैन्य बलों और पुलिस कर्मियों के लिए संयुक्त रूप से एक वार्षिक पहलअफ्रीकी साझेदारों के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति सेना कोर्स’ (UN Peacekeeping Course for African Partners) की शुरुआत की गयी है।
  3. इसके साथ ही अमेरिका द्वारा, वियतनाम और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के लिए एक समान पहल शुरू करने हेतु विचार किया जा रहा है।

चीन और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना-

  1. वर्तमान में चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभियानों में 2,500 से अधिक सैनिक कार्यरत हैं और इसने 8,000 अतिरिक्त सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भेजने की प्रतिबद्ध व्यक्त की है।
  2. इन सैनिकों की तैनाती के बाद चीन संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों (UNPK) में सर्वाधिक सैन्य शक्ति का योगदान करने वाला देश बन जायेगा।
  3. चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र नियमित बजट में 12% और शांति सेना बजट में 15% का योगदान किया जा रहा है।

शांति अभियान क्या होते है?

  1. संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान, डिपार्टमेंट ऑफ़ पीस ऑपरेशन तथा डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑपरेशनल सपोर्ट का एक संयुक्त प्रयास है।
  2. प्रत्येकशांति रक्षा अभियान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा मंजूरी प्रदान की जाती है।
  3. संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए वित्तीय आपूर्ति को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा सामूहिक रूप से वहन किया जाता है।
  4. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र शांति अभियानों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यहै।

संरचना-

  1. संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों में सैनिक, पुलिस अधिकारी और नागरिक कर्मी सम्मिलित हो सकते हैं।
  2. सदस्य देशों द्वारा स्वैच्छिक आधार पर शांति सैनिको का योगदान दिया जाता है।
  3. शांति अभियानों के नागरिक कर्मचारी, अंतर्राष्ट्रीय सिविल सेवक होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा भर्ती और तैनात किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान तीन बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होते है:

  1. पक्षकारों की सहमति
  2. निष्पक्षता
  3. अधिदेश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के अलावा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।

डोनाल्ड ट्रम्प के पश्चात अमेरिका एवं जलवायु समझौते

G.S. Paper-III

संदर्भ:

राष्ट्रपति-निर्वाचित जो बिडेन (Joe Biden) ने सार्वजनिक रूप से कहा है, उनके पद ग्रहण करते ही संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पेरिस समझौते में फिर शामिल होने की कोशिश करेगा।

पेरिस समझौता-

वर्ष 2015 में किये गए पेरिस समझौते में पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस लक्ष्य को संभवतः अमेरिका की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं किया जा सकता है।

चीन, विश्व में ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जक देश है, इसके पश्चात अमेरिका का स्थान है।

पेरिस समझौते में अमेरिकी भूमिका-

पेरिस समझौते के लक्ष्यों का अर्थ था कि अमेरिका को अगले एक दशक में अपने उत्सर्जन में कम से कम 1.5 बिलियन टन की कमी करनी होगी, और उसके बाद और अधिक कटौती किए जाने की उम्मीद की गयी थी।

  1. लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका के पास जलवायु निधियों को जुटाने की, विशेष रूप से निजी निगमों से, विशेष क्षमता है, जो कि 2° C  के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अति आवश्यक है।
  2. निम्न-कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करने हेतु प्रति वर्ष सैकड़ों अरबों डॉलर की आवश्यकता है।
  3. इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण समन्वयक के रूप में अमेरिका की अनुपस्थिति, एक बहुत बड़ा झटका है।

जलवायु संबंधित मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन के निर्णयों का प्रभाव-

  1. अपने चुनावी अभियान के दौरान, ट्रम्प ने जलवायु परिवर्तन को एकधोखा (Hoax) बताया था, और मात्र एक साल पहले लागू किये गए पेरिस समझौते से अलग होने का वादा किया था। ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति पद पर नियुक्त होने के छह महीने के भीतर ही अपने वादे को पूरा किया।
  2. कोयले और स्वच्छ ऊर्जा पर राष्ट्रपति ट्रम्प के कई अन्य फैसलों से भी जलवायु उद्देश्यों के लिए गहरी क्षति पहुँची है।
  3. घरेलू नौकरियों को बढ़ावा देने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु प्रत्यक्ष रूप से जीवाश्म-ईंधन उद्योग को बढ़ावा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप उत्सर्जन में वृद्धि हुई।
  4. ट्रम्प प्रशासन के द्वारा वर्ष 2015 के एक आदेश को परिवर्तित कर दिया गया, जिसमे अमेरिकी संघीय सरकारी एजेंसियों को आगामी दस वर्षों में अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को वर्ष 2008 के स्तर की तुलना में 40% तक कम करने के लिए कहा गया था।

आगे की राह-

जो बिडेन के राष्ट्रपति पद संभालने के साथ, अमेरिका द्वारा जलवायु परिवर्तन पर नीतिगत उलटफेर के एक और दौर से गुजरने की संभावना है, तथा पेरिस समझौते में अमेरिका की वापसी लगभग तय है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का एरियल स्पेस मिशन

G.S. Paper-III

संदर्भ:

हाल ही में, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency– ESA) द्वारा औपचारिक रूप से एरियल (Ariel) मिशन को अपनाया गया है।

एरियल क्या है?

एरियल (एटमॉस्फेरिक रिमोटसेंसिंग इन्फ्रारेड एक्सोप्लेनेट लार्जसर्वे) अर्थात Ariel (Atmospheric Remote-sensing Infrared Exoplanet Large-survey) को वर्ष 2029 में लॉन्च किया जाएगा।

  1. यह चार साल की अवधि के दौरान एक हजार से अधिक एक्सोप्लैनेट का व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण करेगा।
  2. इसके तहत, यह एक्सोप्लैनेट की प्रकृति, उसकी संरचना और विकास का अध्ययन करेगा।

एरियल मिशन का महत्त्व-

एरियल, सैकड़ों एक्सोप्लेनेट्स की रासायनिक संघटन और तापीय संरचनाओं के मापन हेतु समर्पित अपनी तरह का पहला मिशन है।

यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के कॉस्मिक विजन प्लान के प्रमुख सवालों में से एक का जवाब खोजने में मदद करेगा, कि ‘किसी ग्रह के निर्माण और जीवन के उद्भव के लिए कौन सी परिस्थितियां उत्तरदायी होती है?

एक्सोप्लैनेट की खोज-

नासा के अनुसार, अब तक केवल कुछ एक्सोप्लेनेट्स को टेलिस्कोप के माध्यम से खोजा गया है, जबकि अन्य एक्सोप्लेनेट्स का अप्रत्यक्ष तरीकों का उपयोग करके पता लगाया गया है।

​​इसमें शामिल है:

  1. किसी तारे के सामने से किसी ग्रह के गुजरने पर तारे के प्रकाश की तीव्रता में कमी आती है, इस घटना पर नजर रख कर एक्सोप्लेनेट की खोज की जाती है।नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप द्वारा हजारों ग्रहों को पहिचानने हेतु इस विधि का उपयोग किया जाता है।
  2. ग्रेविटेशनल लेंसिंग (Gravitational lensing) और वोबलिंग विधि (Wobbling Method): यह विधि इस विचार पर आधारित है कि परिक्रमा करने वाला ग्रह के कारण मूल तारा अपने केंद्र से हटकर परिभ्रमण करता है।

एक्सोप्लैनेट के अध्ययन का कारण-

एक्सोप्लेनेट्स की खोज इस संभावना से प्रेरित है कि पृथ्वी से अन्यत्र भी जीवन मौजूद हो सकता है और भले ही इसका कोई प्रमाण न मिले, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इस सवाल की खोज से यह अवश्य पता चलेगा कि, मानव जाति कहां से आयी थी था और हम कहां जा रहे है।

प्रमुख बिंदु-

  1. अब तक 4,000 से अधिक एक्सोप्लैनेट के अस्तित्व की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि हजारों अन्य ऐसे संभावित एक्सोप्लैनेट हैं जिन्हें एक्सोप्लैनेट घोषित करने हेतु और अधिक अवलोकन तथा परीक्षण किये जाने की आवश्यकता है।
  2. प्रॉक्सिमा सेंटॉरी बी(Proxima Centauri b) पृथ्वी का सबसे निकटतम एक्सोप्लैनेट है तथा चार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह अपने तारे के ‘निवास योग्य क्षेत्र’ में स्थित है, अर्थात इसकी सतह पर तरल रूप में जल की उपस्थिति हो सकती है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ट्रिस्टन दा कुन्हा

  • ट्रिस्टन दा कुन्हा अटलांटिक महासागर में एक द्वीप है जिसमें लगभग 300 निवासी हैं।
  • यह दक्षिण अटलांटिक में लंदन से 6,000 मील की दूरी पर द्वीपों की एक छोटी श्रृंखला है और द्वीपों के आसपास के पानी को दुनिया में सबसे समृद्ध माना जाता है
  • यह ब्रिटेन का पारसमुद्रीय क्षेत्र है।
  • इसे हाल ही में अटलांटिक महासागर में 687,000 वर्ग किलोमीटर का सबसे बड़ा पूरी तरह से संरक्षित समुद्री भंडार घोषित किया गया था।

 

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