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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

संपत्ति का अधिकार

G.S. Paper-II

संदर्भ-

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें अनिश्चितकाल तक नागरिकों की संपत्तियों को जब्त करके अपने कब्जे में नहीं रख सकती हैं.”

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और एस रवींद्र भट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को बेंगलुरु के बायपन्नहल्ली स्थित चार एकड़ जमीन को तीन महीने के अंदर उसके कानूनी मालिक बीएम कृष्णमूर्ति के किसी वारिस को लौटाने का आदेश देते हुए यह फैसला सुनाया है.

पृष्ठभूमि-

  • केंद्र सरकार ने बेंगलुरु के बायपन्नहल्ली स्थित चार एकड़ जमीन को 1963 में हासिल किया था. यह जमीन करीब 57 वर्षों से केंद्र सरकार के कब्जे में थी.
  • केंद्र सरकार द्वारा इस भूमि पर कब्जें के विरुद्ध वीके रविचंद्रा और अन्य की ओर से कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर याचिका के जरिये केंद्र के जमीन को खाली छोड़ने की इजाजत मांगी गई थी.
  • गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के निर्णयों में भी यह कहा है किभारतीय संविधान के अंतर्गत भले ही संपत्ति का अधिकार (Right to Property) अब मौलिक अधिकार नहीं रहा हैकिन्तु इसके बावजूद भी राज्य (state) उचित प्रक्रिया और विधि के अधिकार का पालन करके ही किसी व्यक्ति को उसकी निजी संपत्ति से वंचित कर सकता है.”

क्या कहा उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में?

  • सुप्रीम कोर्ट की इस खंडपीठ ने अपने एक फैसले में कहा है कि ऐसी कोई भी घटना या ऐसा करने की अनुमति देना किसी भी तरह से किसी गैरकानूनी कृत्य से कम नहीं है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैसे तो संपत्ति का अधिकार संविधान में मौलिक अधिकार नहीं बताया गया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों को अनिश्चितकाल तक नागरिकों की संपत्ति को अपने कब्जे में रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस रवींद्र भट ने अपने निर्णय में कहा किसंपत्ति का अधिकार एक बेशकीमती अधिकार है जिसमें आर्थिक स्वतंत्रता की गारंटी हासिल होती है.”

संपत्ति का अधिकार-

संविधान के अनुच्छेद 31 के मूलरूप में संपत्ति के अधिकार को एक मौलिक अधिकार बताया गया था. परन्तु 1978 में इसके लिए 44वाँ संवैधानिक संशोधन हुआ और संपत्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार नहीं रह गया. फिर भी संविधान का अनुच्छेद 300A अपेक्षा करता है कि सरकार किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति अपने हाथ में लेने के पहले समुचित प्रक्रिया और कानूनी शक्ति का अनुपालन करे. संपत्ति का अधिकार अब न केवल एक संवैधानिक अथवा वैधानिक अधिकार समझा जाता है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय

  • वर्ष 2010 में स्थापित, भारत में स्थित यह एक अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है।
  • इसे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के आठ सदस्य देशों द्वारा प्रायोजित किया जाता है।
  • दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU) द्वारा प्रदान किए गए डिग्री और प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों / संस्थानों द्वारा दिए गए संबंधित डिग्री और प्रमाणपत्र के समान दर्जा रखते हैं।

 

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