Online Portal | Download Mobile App | English Version | View Blog +91 9415011892 / 9415011893

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन

समाचार में क्यों? 

21 फरवरी, 2020 को श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (Shyama Prasad Mukherji Rurban Mission-SPMRM) के शुभारंभ की चौथी वर्षगाँठ मनाई जा रही है। इस मिशन की शुरुआत 21 फरवरी, 2016 को हुई थी।

  • केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किये गए श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के तहत स्‍थान संबंधी नियोजन के ज़रिये क्‍लस्‍टर आधारित एकीकृत विकास पर फोकस किया जाता है।
  • इस मिशन के तहत देश भर के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण क्‍लस्‍टरों की पहचान की जाती है, जहाँ शहरी घनत्‍व में वृद्धि, गैर-कृषि रोज़गारों के उच्‍च स्‍तर, आ‍र्थिक गतिविधियाँ बढ़ने और अन्‍य सामाजिक-आर्थिक पैमाने जैसे शहरीकरण के बढ़ते संकेत प्राप्त हो रहे हैं।
  • मिशन के तहत 300 ग्रामीण क्‍लस्‍टरों को समयबद्ध एवं समग्र ढंग से विकसित करने की परिकल्‍पना की गई है।

उद्देश्य :

मिशन का उद्देश्‍य स्‍थानीय स्‍तर पर आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने के साथ-साथ बुनियादी सेवाओं में बढ़ोतरी और सुव्‍यवस्थित ग्रामीण क्‍लस्‍टरों का सृजन करके इन ग्रामीण क्‍लस्‍टरों में व्‍यापक बदलाव लाना है। इससे संबंधित क्षेत्र का समग्र विकास होगा और एकीकृत एवं समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस मिशन में धनराशि या वित्‍त से जुड़े दो घटक हैं:

विभिन्‍न केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं, केंद्र प्रायोजित योजनाओं, राज्‍य क्षेत्र/प्रायोजित 1- योजनाओं/कार्यक्रमों, CSR कोष के ज़रिये रूपांतरित धनराशि और,

कम पड़ रही अत्‍यंत आवश्‍यक धनराशि की व्यवस्था (CGF)।

  • इसमें गैर-जनजातीय क्‍लस्‍टरों के लिये प्रति क्‍लस्‍टर 30 करोड़ रुपए और जनजातीय एवं पहाड़ी राज्‍यों वाले क्‍लस्‍टरों के लिये प्रति क्‍लस्‍टर 15 करोड़ रुपए तक के CGF का प्रावधान किया गया है।
  • इन समूहों में नियोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर में सभी घरों को 24×7 पानी की आपूर्ति, घरेलू और क्लस्टर स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा, क्लस्टर के गाँवों में और गाँव के भीतर सड़कों की व्यवस्था, हरित प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा शामिल है। क्लस्टर में आर्थिक सुविधाओं में कृषि सेवाओं एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में विभिन्न विषयगत क्षेत्र, पर्यटन और लघु एवं मध्यम उद्यम को बढ़ावा देने के लिये कौशल विकास को भी शामिल किया गया है।

तिरूर वेटिला

समाचार में क्यों? 

वर्ष 2019 में जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ऑफ इंडिया ने केरल के तिरूर वेटिला (Tirur Vettila) को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication- GI) टैग दिया।

  • तिरूर वेटिला एक प्रकार का पान (Betel Leaf) है जो केरल के मलप्पुरम ज़िले के तिरूर और आस-पास के इलाकों में उगाया जाता है।
  • तिरूर वेटिला के ताज़े पत्तों में क्लोरोफिल और प्रोटीन की उच्च मात्रा पाई जाती है।
  • तिरूर वेटिला में अद्वितीय स्वाद एवं सुगंध जैसी कुछ विशेष जैव रासायनिक विशेषताएँ होती हैं।
  • इसकी तीक्ष्णता का कारण इसमें उपस्थित यूजेनॉल (Eugenol) नामक प्रमुख तेल है।
  • इसके पत्ते पौष्टिक होते हैं और इसमें एंटीकार्सिनोजेंस (Anticarcinogens) होता है जो कैंसर प्रतिरोधी दवाओं में प्रयोग किया जाता है।
  • बेटेल वाइन (Betel Vine) में इम्युनोसप्रेसिव (Immunosuppressive) गतिविधि और रोगाणुरोधी जैसी विशेषताएँ भी पाई जाती हैं।
  • केरल कृषि विश्वविद्यालय की बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights- IPR) सेल को जीआई पंजीकरण की सुविधा प्रदान किये जाने के कारण भारत सरकार का राष्ट्रीय आईपी पुरस्कार, 2019 (National IP Award, 2019) मिला है।

केरल के अन्य जीआई उत्पाद:

कैपड़ चावल (Kaipad Rice), पोक्कली चावल (Pokkali Rice), वायनाड जीराकसला चावल (Wayanad Jeerakasala Rice), वायनाड गंधकसाला चावल (Wayanad Gandhakasala Rice), वाझाकुलम अनन्नास (Vazhakulam Pineapple), मरयूर गुड़ (Marayoor Jaggery), सेंट्रल त्रावणकोर गुड़ (Central Travancore Jaggery) और चेंगालिकोडन नेन्ड्रान (Chengalikodan Nendran)।

 

नवीनतम समाचार

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow