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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

व्यय अनुपात क्या है?

24thseptember 2019

समाचार में क्यों?

सेबी ने पिछले वर्ष ओपन एंडेड इक्विटी योजनाओं के लिये अधिकतम कुल व्यय अनुपात (Total Expense Ratio) को 2.75 % से कम करते हुए 2.25% कर दिया था।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के तहत निवेश करने पर एसेट्स मैनेजमेंट कंपनी द्वारा वार्षिक निधि परिचालन व्यय (Annual Fund Operating Expense) के रूप में कुछ राशि काट ली जाती है। जिसे कुल व्यय अनुपात कहते हैं।
  • कुल व्यय अनुपात के अंतर्गत प्रबंधकीय, प्रशासनिक व अन्य खर्चों को शामिल किया जाता है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिये KYC (Know Your Client) की आवश्यकताओं पर एच.आर. खान समिति की सिफारिशों को व्यापक स्तर पर स्वीकार करते हुए सेबी ने ओपन एंडेड इक्विटी योजनाओं के लिये कुल व्यय अनुपात को कम किया था।

ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम:

म्यूचुअल फंड के तहत दो तरह की योजनाएँ शामिल की जाती हैं-

1. ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम।

2. क्लोज एंडेड इक्विटी स्कीम।

जहाँ क्लोज एंडेड इक्विटी स्कीम की परिपक्वता अवधि (Maturity Period) निर्धारित होती है तथा निर्धारित समय-सीमा के बाद इसे तरलता (liquidity) रूप प्रदान किया जा सकता है, वहीं ओपन एंडेड स्कीम की कोई परिपक्वता अवधि नहीं होती है, इसे कभी भी भुनाया जा सकता है और तरलता (liquidity) के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

इस कदम के निहितार्थ :

  • ‘व्यय अनुपात विक्रय प्रतिशत के सापेक्ष कुल व्यक्तिगत व्यय या कुल लागत को व्यक्त करता है अर्थात् कुल व्यय अनुपात जितना कम होगा, निवेशक के लाभ में उतनी ही वृद्धि होगी।
  • कुल व्यय अनुपात से सक्रीय रूप से प्रबंधित फंड और निष्क्रिय रूप से प्रबंधित फंड के मध्य अंतर को स्पष्ट किया जा सकेगा।
  • निवेशकों को निवेश करते हेतु प्रोत्साहन मिलेगा व म्यूचुअल फंड के माध्यम से पूंजी जुटाने में आसानी होगी।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की स्थिति बेहतर हो सकेगी।
  • नियामक के अनुसार व्यय अनुपात कम होने से निवेशकों को कमीशन में 1300 करोड़ से 1500 करोड़ रुपए की बचत होगी।

 


 

मानव अन्तरिक्ष मिशन (गगनयान)

समाचार में क्यों?

ISRO और DRDO ने मानव अन्तरिक्ष मिशन (गगनयान) के लिए अत्यावश्यक तकनीकों के प्रावधान हेतु एक समझौता पत्र हस्ताक्षरित किया है। इस समझौते के अनुसार,   ISRO के मानव अन्तरिक्ष मिशन की आवश्यकताओं को देखते हुए DRDO रक्षा से सम्बंधित होने वाले निर्माणों में अपेक्षित सुधार कर के उन्हें ISRO को उपलब्ध कराएगा।

निर्माण की जो सामग्रियाँ जो DRDO देगा, उनमें कुछ हैं – अन्तरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले उपकरण, आपातकाल में प्राण रक्षा के लिए सामग्रियाँ, अन्तरिक्ष में ग्रहण करने योग्य भोजन, निरापद वापसी के लिए पैराशूट, विकिरण मापक उपकरण आदि।

भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम :

  • इस मिशन को भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ पर अर्थात् 2022 में पूरा करने की योजना है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य पृथ्वी कक्ष में एक ऐसा अन्तरिक्ष यान प्रक्षेपित करना है जिसमें दो अथवा तीन अन्तरिक्षयात्री सवार हों।
  • इसके लिए शुरू में अन्तरिक्ष में पृथ्वी के ऊपर 400 किमी. की दूरी पर स्थित परिक्रमा पथ पर 2-3 अन्तरिक्ष यात्रियों को 7 दिन के लिए भेजा जाएगा।
  • इसके लिए भारत सरकार ने पिछले बजट में 12.4 बिलियन की राशि निर्धारित कर दी थी।
  • इस अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण जीएसएलवी मार्क III द्वारा किया जाएगा।

तकनीकी चुनौतियाँ:

  • ISRO को तीन प्रमुख क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है –
  • पर्यावरण नियंत्रण और जीवनरक्षक प्रणाली (ECLS system) चालक दल सुरक्षा प्रणाली और
  • फ्लाइट सूट सुविधा।
  • इन चुनौतियों के समाधान करने के लिए सरकार ने आवश्यक तैयारी हेतु 145 करोड़ रूपए स्वीकृत किये हैं।

गगनयान के अप्रत्यक्ष लाभ:

  • गगनयान अभियान अपने उपकरणों का 60 % भारत के निजी प्रक्षेत्र से लेगा। अतः इससे देश के उद्योगों को लाभ मिलना निश्चित है।
  • ISRO के चीफ ने बताया है कि गगनयान अभियान से 15,000 नए रोजगार बनेंगे जिनमें 13,000 निजी उद्योगों से आएँगे. स्वयं ISRO को 900 अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता होगी।
  • इस प्रकार के चुनौतियों भरे अभियान से भारत में तकनीक के विकास बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
  • गगनयान के कारण अनुसंधान और तकनीकी विकास के कई रास्ते खुलेंगे. कुछ ऐसे क्षेत्र जिनमें प्रगति संभावित है, वे हैं – सामग्रियों का प्रसंस्करण, एस्ट्रो-बायोलॉजी, संसाधन खनन, ग्रहों का रसायन शास्त्र, ग्रहों का ऑर्बिटल कैलकुलस आदि।
  • गगनयान की सफलता से हमारे देश के युवा कुछ बड़ा और कुछ नया करने के लिए प्रेरित होंगे।
  • मानव को अन्तरिक्ष में भेजने वाला चैथा देश हो जाने पर न केवल भारत की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, अपितु यह अन्तरिक्ष उद्योग का एक बड़ा खिलाड़ी भी मान लिया जाएगा।

हाल ही में किये गए तकनीकी प्रयोग:

  • पिछले वर्ष ISRO ने ‘PAD ABORT’ अर्थात् अन्तरिक्ष यात्री उद्धार प्रणाली का सफल परीक्षण किया था।
  • इस प्रणाली के माध्यम से यदि कभी प्रक्षेपण विफल हो जाता है तो उस समय अन्तरिक्ष यात्री उससे बाहर निकलकर अपने प्राण बचाने में समर्थ हो जाते हैं।
  • यह परीक्षण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र में हुआ था।
  • विदित हो कि अगर भारत इस मिशन (गगनयान मिशन) को सफलतापूर्वक लौंच करता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला चैथा राष्ट्र बन जायेगा।
  • सफल मानव अन्तरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक है कि हम यात्रा के पश्चात् अन्तरिक्ष यात्रियों को सकुशल पृथ्वी पर वापस ला सकें और साथ ही यह अन्तरिक्ष यान ऐसा हो कि उसमें बैठे अन्तरिक्षयात्री पृथ्वी जैसी दशाओं में रह सकें।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

हिक्का चक्रवात

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात हिक्का (Hikaa) ओमान के दक्षिण में सक्रिय है।
  • 24-37 किमी घंटे की गति की ऊर्ध्वाधर पवनें चक्रवात की प्रबलता को बढ़ा सकती हैं। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र की समुद्री सतह का तापमान 29-30 डिग्री सेल्सियस है जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की अनुकूलता में सहायक है।
  • इसके साथ ही अरब प्रायद्वीप से आने वाली गर्म शुष्क हवाएँ इसकी प्रबलता को बढ़ा सकती हैं। भारत के मौसम विभाग के अनुसार यह चक्रवात अपने स्थान से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है।
  • भारत के मौसम विभाग के अनुसार इस चक्रवात की वर्तमान स्थिति गुजरात (वेरावल) से लगभग 490 किमी. पश्चिम-दक्षिण और कराची (पाकिस्तान) से 520 किमी. दक्षिण-दक्षिण तथा ओमान के मसिराह द्वीपसमूह से 710 किमी. पूर्व-दक्षिण में है।
  • मसिराह (Masirah) द्वीपसमूह ओमान की राजधानी मस्कट से 513 किलोमीटर दक्षिण में है। यह मसिराह चैनल (Masirah Channel) से मुख्य भूमि से विभाजित होता है।

 

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