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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

विशेषाधिकार

16th September, 2020

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ-

हाल ही में, महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में अर्नब गोस्वामी और कंगना रनौत के विरुद्ध विशेषाधिकार उल्लंघन के प्रस्ताव पेश किये गए.

विशेषाधिकार क्या है?

  • एक सांसद या विधायक होना सिर्फ जनप्रतिनिधि होना नहीं है अपितु ये लोग संविधान के पालक और नीतियाँ/कानून बनाने वाले लोग भी हैं. कार्यपालिका के साथ मिलकर यही लोग देश का वर्तमान और भविष्य तय करते हैं. इन पदों की महत्ता और निष्ठा को देखते हुए संविधान ने इन्हें कुछ विशेषाधिकार दिए हैं. संविधान के अनुच्छेद105 और अनुच्छेद 194 के खंड 1 और खंड 2 के तहत विशेषाधिकार का प्रावधान किया गया है. भारतीय संविधान में विशेषाधिकार के विषय इंग्लैंड के संविधान से लिए गये हैं.
  • संविधान के अनुच्छेद105 (3) और 194 (3) के तहत देश के विधानमंडलों को वही विशेषाधिकार मिले हैं जो संसद को मिले हैं. संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि ये स्वतंत्र उपबंध हैं. यदि कोई सदन विवाद के किसी भाग को कार्यवाही से हटा देता है तो कोई भी उस भाग को प्रकाशित नहीं कर पायेगा और यदि ऐसा हुआ तो संसद या विधानमंडल की अवमानना मानना जाएगा. ऐसा करना दंडनीय है. इस परिस्थिति में अनुच्छेद 19 () के तहत बोलने की आजादी (freedom of speech and expression) के मूल अधिकार की दलील नहीं चलेगी.
  • हालाँकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भले ही विशेषाधिकार के मामले अनुच्छेद 19 (क) के बंधन से मुक्त हों लेकिन यहअनुच्छेद 20-22 और अनुच्छेद 32 के अधीन माने जायेंगे.

प्रकार-

विशेषाधिकार के मामलों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. हर सदस्य को मिला व्यक्तिगत विशेषाधिकार
  2. संसद के प्रत्येक सदन को सामूहिक रूप से मिला विशेषाधिकार

व्यक्तिगत विशेषाधिकार-

  1. सदस्यों को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 135 (क) के तहतगिरफ्तारी से छूट मिलती है. इसके तहत सदस्य को समितियों की बैठक के 40 दिन पहले या 40 दिन बाद तक गिरफ्तारी से छूट मिलती है. यह छूट सिर्फ सिविल मामलों में मिलती है. आपराधिक मामलों के तहत यह छूट नहीं मिलेगी.
  2. जब संसद सत्र चल रहा हो तो सदस्य कोगवाही के लिए बुलाया नहीं जा सकता.
  3. संसद के सदस्य द्वारा संसद में या उसकी समिति में कही गई किसी बात के लिएन्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती.

लेकिन यहाँ यह जानना जरुरी है कि सदस्यों को मिले ये विशेषाधिकार तब तक लागू रहेंगे जबतक वह संसद या सदन के हित में हो. यानी सदस्य सदन की प्रतिष्ठा की परवाह किये बिना अपनी इच्छानुसार कुछ भी कहने का हकदार नहीं है.

सामूहिक रूप से मिला विशेषाधिकार-

  1. चर्चाओं और कार्यवाहियों को प्रकाशित करने से रोकने का अधिकार.
  2. अन्य व्यक्तियों को अपवर्जित या प्रतिबंधित करने का अधिकार.
  3. सदन के आंतरिक मामलों को निपटाने का अधिकार.
  4. संसदीय कदाचार को प्रकाशित करने का अधिकार.
  5. सदस्यों और बाहरी लोगों को सदन के विशेषाधिकारों को भंग करने के लिए दंडित करने का अधिकार.

अन्य अधिकार-

  • इसके अलावा भी सदनों के भीतर कुछ विशेषाधिकारों की बात करें तो सदनों के अध्यक्ष और सभापति को या किसी अजनबी को सदन से बाहर जाने का आदेश देने का अधिकार है. सदन के कार्यवाहियों को सुचारू रूप से चलाने और विवाद की स्थिति में बिना न्यायालय के दखल के आंतरिक तौर पर निपटाने का अधिकार भी है. यानी संसद की चारदीवारी के भीतर जो कहा या किया जाता है, उसके बारे में कोई भी न्यायालय जाँच नहीं कर सकता.
  • एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय न्यायालयों ने भी समय-समय पर स्पष्ट किया है कि संसद या राज्य विधान मंडलों के किसी सदन को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि किसी मामले में सदन या सदस्य केParliamentary Privilege का उल्लंघन हुआ है या नहीं.

विशेषाधिकार का उल्लंघन-

जब कोई व्यक्ति या प्राधिकारी व्यक्तिगत रूप में संसद के सदस्यों अथवा सामूहिक रूप से सभा के किसी विशेषाधिकार, अधिकार और उन्मुक्ति की अवहेलना करता है या उन्हें चोट पहुँचाता है, तो इसे विशेषाधिकार का उल्लंघन कहा जाएगा. यह कृत्य सदन द्वारा दंडनीय होता है. इसके अतिरिक्त सदन के आदेशों की अवज्ञा करना अथवा सदन, इसकी समितियों, सदस्यों और पदाधिकारियों के विरुद्ध अपमानित लेख लिखना भी विशेषाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.

डोरस्टेप बैंकिंग सेवा

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ-

वित्त मंत्री द्वारा “डोरस्टेप बैंकिंग” सेवाओं का लोकार्पण तथा ईज (EASE) 2.0 सूचकांक के परिणामों को घोषित किया गया है.

डोरस्टेप बैंकिंग सेवा-

  • डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं की परिकल्पना मुख्यतः EASE (Enhanced Access and Service Excellence /संवर्धित पहुंच एवं सेवा उत्कृष्टता) सुधारों के एक भाग के रूप में की गई है.
  • इसके अंतर्गत बैंकों द्वारा बैंकिंग सेवाओं को ग्राहकों के घर पर ही उपलब्ध करवाए जाने की व्यवस्था की गई है.
  • बैंकिंग सेवाओं को कॉल सेंटर, वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के संपर्क बिंदुओं के माध्यम से प्रदान किया जाता है.
  • ग्राहक इन चैनलों के माध्यम से अपने सेवा अनुरोध (service request) को भी ट्रैक कर सकते हैं.
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) हेतु “EASE” सुधार एजेंडे को वर्ष 2018 में आरंभ किया गया था.
  • इसका उद्देश्य सुगम और स्मार्ट बैंकिंग को संस्थागत बनाना रहा है.
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में पूंजी निवेश, उपर्युक्त सुधारों के संदर्भ में PSBs के प्रदर्शन पर आधारित था.

EASE 6 विषयों पर आधारित है

  1. ग्राहक के प्रति अनुक्रियाशीलता:ग्राहक को संवर्धित पहुंच एवं उत्कृष्टता (ईज) प्रदान करना.
  2. उत्तरदायी बैंकिंग:वित्तीय स्थिरता, परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अभिशासन, तथा उत्तम ऋण व्यवस्था व विवेकपूर्ण परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए ईज.
  3. क्रेडिट ऑफटेक (ऋण बढ़ोत्तरी):उधारकर्ता के लिए ईज़ और ऋण का अग्रसक्रिय वितरण.
  4. उद्यमी मित्र के रूप मेंPSBs: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए बिल में छूट और वित्त पोषण में ईज़ सुविधा.
  5. वित्तीय समावेशन और डिजिटलीकरण का विस्तार करना:घर के निकट बैंकिंग, सूक्ष्म बीमा और डिजिटलीकरण के माध्यम से ईज़.
  6. परिणाम सुनिश्चित करना:मानव संसाधन (Human Resource: HR) ब्रांड PSB के लिए कर्मियों का विकास करना.

EASE 2.0-

  • EASE 2.0, को वस्तुत: EASE 1.0 क॑ आधार पर तैयार किया गया है. EASE 2.0 के तहत उपर्युक्त 6 विषयों के अंतर्गत समाविष्ट किए गए सुधार क्रिया बिंदुओं का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को अपरिवर्तनीय बनाए रखना, प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों को सुदृढ़ करना और बेहतर परिणाम प्राप्त करना है.
  • EASE सुधार सूचकांक, छह विषयों में 120 से अधिक उद्देश्य मापदंडों के आधार पर प्रत्येक PSBs के प्रदर्शन का मापन करता है. यह सभी PSBs को एक तुलनात्मक मूल्यांकन प्रदान करता है और यह दर्शाता है कोई बैंक सुधार के एजेंडे पर अन्य बैंकों के सापेक्ष कितना बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय

तक्षशिला विश्वविद्यालय-

इसका निर्माण लगभग 5वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व में किया गया था. वर्तमान में यह पाकिस्तान में स्थित है. यहाँ बौद्ध और हिंदू दोनों धर्मशास्त्रों की शिक्षा प्रदान की जाती थी. तक्षशिला के प्रसिद्ध व्यक्तित्वों में चाणक्य, चरक, पाणिनि, जीवक, प्रसेनजित आदि शामिल हैं.

नालंदा विश्वविद्यालय-

इसे 5वीं शताब्दी ई. में कुमारगुप्त के शासनकाल के दौरान निर्मित किया गया था. वर्तमान में यह विश्वविद्यालय बिहार में स्थित है. इससे संबद्ध प्रसिद्ध विद्वानों में नागार्जुन (माध्यमिक शून्यवाद) और आर्यभट्ट शामिल हैं.

विक्रमशिला विश्वविद्यालय-

इसे पाल वंश (बिहार का भागलपुर जिला) के शासक धर्मपाल द्वारा स्थापित किया गया था. यह मुख्य रूप से बौद्ध शिक्षा का एक केंद्र रहा है. यहाँ वज्रयान संप्रदाय का उद्भव हुआ था और साथ ही, यहां तंत्रवाद संबंधी शिक्षाएँ भी प्रदान की जाती थीं.

 

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