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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

विवादित क्षेत्र – गलवान घाटी

(G.S. Paper-II)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में गलवान घाटी (Galwan Valley) भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें दोनों पक्षों को भारी जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ा। ध्यातव्य है कि गलवान घाटी वर्ष 1962 से ही दोनों देशों के बीच तनाव का एक विषय बना हुआ है।

प्रमुख बिंदु-

  • चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में दावा किया है कि संपूर्ण गलवान घाटी ‘वास्तविक     नियंत्रण रेखा’ (Line of Actual Control-LAC) के चीनी पक्ष पर स्थित है और इसलिये यह चीन     का हिस्सा है।
  • वहीं भारत ने चीन के इस दावे को ‘अतिरंजित और असमर्थनीय’ बताया है।

कहाँ है गलवान घाटी?

  • गलवान घाटी सामान्यतः उस भूमि को संदर्भित करती है, जो गलवान नदी (Galwan River) के     पास मौजूद पहाड़ियों के बीच स्थित है।
  •  गलवान नदी का स्रोत चीन की ओर अक्साई चीन में मौजूद है और आगे चल कर यह भारत की     श्योक नदी (Shyok River) से मिलती है।
  • ध्यातव्य है कि यह घाटी पश्चिम में लद्दाख और पूर्व में अक्साई चीन के बीच स्थित है, जिसके     कारण यह रणनीतिक रूप से काफी महत्त्वपूर्ण है।
  • इसका पूर्वी हिस्सा चीन के झिंजियांग तिब्बत मार्ग (Xinjiang Tibet Road) से काफी नज़दीक है,     जिसे G219 राजमार्ग (G219 Highway) कहा जाता है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)-

  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) एक प्रकार की सीमांकन रेखा है, जो भारतीय-नियंत्रित क्षेत्र और     चीनी-नियंत्रित क्षेत्र को एक दूसरे से अलग करती है।
  • जहाँ एक ओर भारत मानता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की लंबाई लगभग     3,440  किलोमीटर है, वहीं चीन इस रेखा को तकरीबन 2,000 किलोमीटर लंबा मानता है।

चीन का दावा-

  • ध्यातव्य है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) गलवान घाटी और श्योक नदियों के संगम के पूर्व     में स्थित है, जिस पर भारत और चीन दोनों हाल के वर्षों में पेट्रोलिंग (Patrolling) कर रहे हैं।
  • 15 जून 2020 को हुई हिंसक झड़प के बाद चीन ने दावा किया है कि संपूर्ण गलवान घाटी चीन के     नियंत्रण क्षेत्र में आती है।
  • गौरतलब है कि बीते महीनों से चीन गालवान घाटी और श्योक नदी के संगम तथा वास्तविक     नियंत्रण रेखा (LAC) के बीच के क्षेत्र में भारत की सड़क निर्माण गतिविधियों पर आपत्ति जता     रहा है। भारत ने चीन के दावे को सिरे से खारिज़ कर दिया है।
  • चीन के लगभग सभी मानचित्रों में संपूर्ण गलवान घाटी को चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र का हिस्सा     दिखा जाता है।

मानचित्र के आधार पर क्षेत्र का निर्धारण-

  • विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के मानचित्र के आधार पर इस विवाद को सुलझाना काफी जटिल     कार्य है, जानकारों के अनुसार 1956 का मानचित्र दोनों देशों के बीच सीमा का एकदम सही     निर्धारण करता है।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 1956 का मानचित्र संपूर्ण गलवान घाटी को भारत के एक हिस्से के रूप में     प्रदर्शित करता है, हालाँकि जून 1960 में चीन ने गलवान घाटी पर अपनी संप्रभुता का दावा करते     हुए एक नया मानचित्र प्रस्तुत किया, जिसमें गलवान घाटी को चीन के हिस्से के रूप में     दिखाया गया था।

इसके पश्चात् नवंबर 1962 में भी एक नया मानचित्र जिसमें संपूर्ण गलवान घाटी पर दावा प्रस्तुत     किया गया, किंतु इसके बाद चीन की सरकार द्वारा जारी किये गए नक्शों में गलवान नदी के     पश्चिमी सिरे को चीन के हिस्से के रूप में नहीं दिखाया गया।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ग्लोब्बा एंडरसोनी

लगभग 136 वर्षों के अंतराल के बाद पुणे एवं केरल के शोधकर्त्ताओं की टीम ने तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र के पास सिक्किम हिमालय में ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) नामक एक दुर्लभ व गंभीर रूप से लुप्तप्राय पौधे की प्रजाति को पुनः खोजा है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस पौधे को आमतौर पर ‘डांसिंग लेडीज़’ (Dancing Ladies)’ या ‘स्वान फ्लावर्स’ (Swan     Flowers) के रूप में जाना जाता है।
  • इस पौधे को इससे पहले वर्ष 1875 में देखा गया था। इसके बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था।
  • इस प्रजाति के संग्रह के शुरुआती रिकॉर्ड वर्ष 1862-70 की अवधि के बीच के थे जब इसे स्कॉटिश     वनस्पतिशास्त्री थॉमस एंडरसन (Thomas Anderson) ने सिक्किम एवं दार्जिलिंग से एकत्र किया     था। इसके बाद वर्ष 1875 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर जॉर्ज किंग (Sir George King) ने     सिक्किम हिमालय से इसे एकत्र किया था।

ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

  • सफेद फूल
  • गैर-अनुबंध परागकोष (एक पुंकेसर का भाग जिसमें पराग होता है)
  • पीला अधर
  • इस प्रजाति को ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) और ‘संकीर्ण रूप से स्थानिक’     (Narrowly Endemic) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह प्रजाति मुख्य रूप से तीस्ता नदी घाटी (Teesta River Valley) क्षेत्र तक ही सीमित है जिसमें     सिक्किम हिमालय एवं दार्जिलिंग पर्वत श्रृंखला शामिल हैं।
  • यह पौधा आमतौर पर सदाबहार वनों के उपांत में चट्टानी ढलानों पर लिथोफाइट (चट्टान या पत्थर     पर उगने वाला पौधा) के रूप में घने क्षेत्रों में उगता है।

जी4 वायरस

चीन में वैज्ञानिकों द्वारा एक नए वायरस जी4 (G4) की खोज की गई है जो वर्ष 2009 के स्वाइन फ्लू से काफी मिलता-जुलता है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस जी4 वायरस का पूरा नाम जी4 ईए एच1 एन1 (G4 EA H1N1) है। इसमें मनुष्यों में महामारी     फैलाने की क्षमता है।
  • चीन में सुअरों के लिये निगरानी कार्यक्रम के दौरान वहाँ के नेशनल इन्फ्लुएंज़ा सेंटर (National     Influenza Centre) सहित कई संस्थानों में वैज्ञानिकों द्वारा G4 वायरस का पता लगाया गया था।
  • यह निगरानी कार्यक्रम वर्ष 2011-18 के बीच चीन के 10 प्रांतों में सूअरों के 30,000 से अधिक स्वाब     (Swab) नमूनों को एकत्र करके शुरू किया गया था।
  • इन नमूनों में से शोधकर्त्ताओं ने 179 स्वाइन फ्लू वायरस को अलग किया था जिनमें से अधिकांश     नए पहचाने गए जी4 वायरस के थे।
  • परीक्षणों में पाया गया कि यह वायरस ज़ूनोटिक संक्रमण (पशु से मानव में) उत्पन्न कर सकता है     किंतु अभी तक वायरस के व्यक्ति-से-व्यक्ति में संचरण के कोई सबूत नहीं हैं।

वैज्ञानिकों का मानना हैं कि नया G4 वायरस, H1N1 वायरस का ही एक परंपरागत रूप है जो वर्ष     2009 की स्वाइन फ्लू महामारी के लिये ज़िम्मेदार था।

 

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