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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

विधायिका के विशेषाधिकारों का उल्लंघन

07 October, 2020

G.S. Paper-II (National)

सन्दर्भ:

फेसबुक इंडिया के VP और MD अजीत मोहन एवं फेसबुक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के अनुसरण में प्रस्तुत किये गए एक हलफनामे में दिल्ली विधानसभा ने कहा कि मोहन को विशेषाधिकार उल्लंघन के सन्दर्भ में कोई समन जारी नहीं किया गया है।

  • दिल्ली विधानसभा ने कहा, उसे केवल शांति और सद्भाव समिति द्वारा उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के संबंध में एक गवाह के रूप में बुलाया गया था।

क्या न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है?

  • न्यायालयों में विधानमंडल की कार्यवाही की जांच नहीं की जा सकती है और सदस्य अथवा पीठासीन  अधिकारी,   जिसमें   सदन   की   कार्यवाही   की   प्रक्रिया   अथवा   आचरण  को 

विनियमित करने की शक्ति निहित है, को अपनी शक्तियों का उपयोग करने के सम्बन्ध में न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।

आधारभूत ज्ञान:

संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?

भारतीय संसद के दोनों सदन और उसके सदस्यों और समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकार और उन्मुक्तता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 105 में किया गया है।

  • इसी प्रकार, अनुच्छेद 194राज्य विधानमंडलों, उनके सदस्यों और उनकी समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तताओं से संबंधित है।

विशेषाधिकारों का उल्लंघन क्या है?

विशेषाधिकारों का उल्लंघन एवं इसके लिए सजा निर्धारित करने के लिए कोई स्पष्ट, अधिसूचित नियम नहीं हैं।

  • सामान्यतः कोई भी कार्य जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन को उसके कार्यों के निष्पादन में बाधा डालता है, अथवा जो ऐसे सदन के किसी भी सदस्य या अधिकारी के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुँचाता है या उन्हें रोकता है, विशेषाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
  • सदन के चरित्र अथवा उसकी कार्यप्रणाली अथवा उसकी समिति अथवा उसके सदस्यों के चरित्र या विधायक के रूप में उसके आचरण को दर्शाने वाला भाषण देना या परिवाद छापना या प्रकाशित करना भी सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन एवं सदन की अवमानना ​माना जायेगा।

विधायिका के विशेषाधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?

  1. विधान सभा अध्यक्ष या विधान परिषद सभापति एक विशेषाधिकार समिति का गठन करता है।
  2. समिति के सदस्यों को सदनों में उपस्थित राजनीतिक दलों के सदस्यों की संख्या के आधार पर नामित किया जाता है।
  3. सर्वप्रथम अध्यक्ष या सभापति प्रस्तावों पर निर्णय लेते हैं।
  4. यदि विशेषाधिकार और अवमानना ​​को प्रथम दृष्टया पाया जाता है, तो अध्यक्ष या सभापति नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे विशेषाधिकार समिति को भेज देंगे।
  5. समिति इस बात की जांच करेगी कि उसके द्वारा दिए गए बयानों से राज्य विधायिका और उसके सदस्यों का अपमान हुआ था या नहीं, और क्या जनता के सामने उनकी छवि खराब हुई थी।
  6. अर्ध-न्यायिक शक्तियां प्राप्त यह समिति सभी संबंधितों से स्पष्टीकरण की मांग करेगी, उनकी जांच करेगी और निष्कर्षों के आधार पर राज्य विधायिका को उसके विचारार्थ एक सिफारिश करेगी।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र और क्वॉड

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

  • जापान के नए प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने मंगलवार को अमेरिका और अन्य राजनयिकों के साथ एक मुलाकात में कहा कि चीन की बढ़ती हठधर्मिता को रोकने के लिये उनकी पहल मुक्त और खुला हिंदप्रशांत” (एफओआईपी), कोरोना वायरस महामारी से उपजी चुनौतियों के बीच अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र और क्वॉड-

  • हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर जो समुद्र का एक हिस्सा बनता है, उसे हिंद प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Area) कहते हैं। वर्तमान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 38 देश शामिल हैं, जो विश्व के सतह क्षेत्र का 44 प्रतिशत है।
  • हिंद और प्रशांत महासागर से लगे हुए चार लोकतंत्र जिनकी सोच एक जैसी मानी जाती है, जो साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं, एक भू-राजनैतिक इलाके का निर्माण करते हैं जिसे इंडो-पैसिफिक कहते हैं, इसमें अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
  • क्वॉड एक अनौपचारिक समूह है जिसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी।
  • क्वॉड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत शामिल हैं।
  • इससे पहले मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द- कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

क्वॉड समूह के देश और भारत-

  • भारत-अमेरिका के बीच 2002 में जनरल सिक्युरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फोर्मेशन एग्रीमेंट हुआ था। जिसके तहत जरूरत पड़ने पर दोनों देश एक-दूसरे से मिलिट्री इंटेलिजेंस साझा करेंगे।
  • फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे से पहले ही भारत ने 2-6 अरब डॉलर (19 हजार 760 करोड़ रुपए) की लागत से 24 एमएच 60 आर मल्टीरोल हेलीकॉप्टर खरीदने की डील को मंजूरी दी है। इतना ही नहीं, चीन को काउंटर करने के लिए ही ट्रम्प ने 2016 में भारत को ‘डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा दिया था।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया की नौसेना हिंद महासागर में अभ्यास करती हैं, जिसे ऑसइंडेक्स (AUSINDEX) कहते हैं।
  • भारत और जापान के बीच भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डकैती जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं।
  • इसके अलावा भारत, जापान और अमेरिका की नौ सेनाएं मालाबार में एक साथ अभ्यास भी करती हैं। इस संयुक्त अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने की योजना है।

2025 में इसरो अपना शुक्र मिशन करेगा लांच

G.S. Paper-III (S & T)

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने शुक्र मिशन को फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES (स्पेस सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज़) की भागीदारी के साथ वर्ष 2025 में शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
  • इस 30 सितंबर, 2020 को CNES द्वारा जारी किये गये एक बयान के अनुसार, VIRAL (वीनस इन्फ्रारेड एटमॉस्फेरिक गैस लिंकर) इंस्ट्रूमेंट, जिसे रूसी संघीय अंतरिक्ष एजेंसी ROSCOSMOS और CNRS से जुड़ी वायुमंडल, वातावरण और अंतरिक्ष अवलोकन प्रयोगशाला LATMOS (राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र), फ्रांस ने एक साथ मिलकर विकसित है, इसे एक प्रस्ताव के अनुरोध के बाद इसरो द्वारा चुना गया है.
  • इसरो के अध्यक्ष, के सिवन और CNES के अध्यक्ष, जीन-यवेस ले गैल ने बातचीत की और अंतरिक्ष में भारत और फ्रांस के बीच सहयोग से संचालित होने वाले क्षेत्रों की भी समीक्षा की. मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) और मून मिशन चंद्रयान -1 और 2 के बाद, अब इसरो ने अपने अंतर-ग्रहीय मिशन को अंजाम देने के लिए शुक्र पर अपनी निगाहें जमा दी हैं.

फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने दिया यह बयान-

  • फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी, CNES द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में, फ्रांस इसरो के एक मिशन में भाग ले रहा है जोकि शुक्र के लिए वर्ष 2025 में लॉन्च होने वाला है.
  • CNES इस मिशन में अपना योगदान देगा और फ्रांसीसी समन्वय तैयार करेगा. ऐसा पहली बार होगा जब एक फ्रांसीसी पेलोड को भारतीय अन्वेषण मिशन के साथ उड़ाया जाएगा. इसने आगे यह भी कहा गया कि, दोनों राष्ट्र अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल, विशेष रूप से अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य निगरानी के साथ ही अंतरिक्ष में जीवन समर्थन और अंतरिक्ष चिकित्सा के क्षेत्र में मिलजुल कर काम करने के लिए कर रहे हैं.
  • प्रारंभिक विनिमय भारत के उड़ान चिकित्सकों और तकनीकी टीमों के साथ-साथ CNES उड़ान प्रणालियों की आपूर्ति के लिए प्रशिक्षण पर केंद्रित है.

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत-फ्रांस का परस्पर सहयोग-

  • फ्रांस और भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में परस्पर मजबूत सहयोग साझा करते हैं.
  • फ्रांस उन तीन राष्ट्रों में से एक है, जिनके साथ भारत अंतरिक्ष, परमाणु और रक्षा के रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है. अन्य दो देश संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस हैं.
  • मार्च, 2018 में दोनों देशों ने ‘अंतरिक्ष सहयोग के लिए एक संयुक्त विजन’ जारी किया था.
  • इसरो के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान परियोजना’ पर भी भारत और फ्रांस एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इसका लक्ष्य वर्ष 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजना है.
  • सितंबर, 2018 से ISRO और CNRES ने मानव अंतरिक्ष यान के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित एक कार्य समूह भी बनाया है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

“गुप्कर घोषणा”

  • अनुच्छेद370 को निरस्त करने से पूर्व 4 अगस्त, 2019 को प्रथम गुप्कर घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • 22 अगस्त, 2020 को जम्मू और कश्मीर के छह राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के विरुद्ध सामूहिक रूप से लड़ने के लिएगुप्कर घोषणा II’ नामक एक वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए।
  • इन छह दलों ने संयुक्त रूप से जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को परिवर्तित करने के केंद्र के निर्णय को ‘असंवैधानिक’ बताया।

 

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