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विदेशी मुद्रा भंडार का उच्चतम स्तर: कारण और महत्त्व

9th September, 2020

G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 4 सितंबर को जारी आँकड़ों के अनुसार, सप्ताह के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) का भंडार $ 3.883 बिलियन बढ़ कर $ 541.431 बिलियन के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। 5 जून, 2020 को समाप्त सप्ताह में पहली बार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $ 500 बिलियन को पार कर गया।

प्रमुख बिंदु:

विदेशी मुद्रा (फोरेक्स) भंडार-

  • किसी देश/अर्थव्यवस्था के पास उपलब्ध कुल विदेशी मुद्रा उसकी विदेशी मुद्रा संपत्ति/भंडार कहलाती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार मौद्रिक और विनिमय दर प्रबंधन के लिये निर्मित नीतियों में समर्थन और विश्वास बनाए रखने जैसे उद्देश्यों के लिये रखे जाते हैं। संकट के समय जब उधार लेने तक पहुँच कम हो जाती है, तो विदेशी मुद्रा तरलता बनाए रखते हुए इस संकट को अवशोषित करने में मदद करती है।
  • किसी भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार में निम्नलिखित 4 तत्त्व शामिल होते हैं
  • विदेशी परिसंपत्तियाँ (विदेशी कंपनियों के शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड इत्यादि विदेशी मुद्रा में)
  • स्वर्ण भंडार
  • IMF के पास रिज़र्व कोष (Reserve Trench)
  • विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights-SDR)

अर्थव्यवस्था में स्लोडाउन के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि के कारण-

  • विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का प्रमुख कारण भारतीय स्टॉक बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि है। विदेशी निवेशकों ने पिछले कई महीनों में कई भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की है।
  • मार्च महीने में ऋण और इक्विटी के प्रत्येक खण्डों में से 60000 करोड़ रूपए निकालने के पश्चात् इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में कायापलट की उम्मीद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने  भारतीय बाज़ारों में वापसी की है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के कारण तेल के आयात बिल में कमी आने से विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसी तरह विदेशी प्रेषण और विदेश यात्राएँ बहुत कम हो गई हैं।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 20 सितंबर, 2019 को कॉर्पोरेट कर की दरों में कटौती की घोषणा के साथ ही फोरेक्स रिज़र्व में वृद्धि होना शुरू हो गया था।
  • सोने की बढ़ती कीमतों ने केंद्रीय बैंक को समग्र विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद की है।

महत्त्व-

  • विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक को देश के बाह्य और आंतरिक वित्तीय मुद्दों के प्रबंधन में बहुत आसानी होती है।
  • यह आर्थिक मोर्चे पर किसी भी संकट की स्थिति में एक वर्ष के लिये देश के आयात बिल को कवर करने के लिये पर्याप्त है।
  • बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार ने डॉलर के मुकाबले रूपए को मज़बूत करने में मदद की है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 15  प्रतिशत है।
  • यह सरकार को अपनी विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं और बाहरी ऋण दायित्त्वों को पूरा करने में मदद कर सकने के साथ ही राष्ट्रीय आपदाओं या आपात स्थितियों के लिये एक रिज़र्व बनाए रखने के लिये महत्त्वपूर्ण है।

आगे की राह-

  • निवेश प्रतिबंधों को कम करके FDI को और अधिक उदार बनाया जाना चाहिये। चालू खाते में और अधिक उदारीकरण किया जा सकता है।
  • बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए धन का उपयोग किया जा सकता है, जिससे अधिक रिटर्न प्राप्त किया जा सके।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, विदेशी वित्तीय बाज़ारों में निवेश या महंगे बाह्य ऋण के पुनर्भुगतान के लिये भी इसका उपयोग किया जा सकता है

 

वित्त आयोग द्वारा राजकोषीय घाटे का दायरा निर्धारण के लिये सिफारिश

 G.S. Paper-III (Economy)

 चर्चा में क्यों?

वित्त आयोग के सलाहकार पैनल के कई सदस्यों ने COVID-19 महामारी के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं में वृद्धि को देखते हुए केंद्र और राज्यों के राजकोषीय घाटे का एक सीधा लक्ष्य रखने के बजाय एक सीमा (Range) निर्धारण पर विचार करने का सुझाव दिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह सुझाव राजकोषीय घाटे और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में ऋण के अनुपात के लक्ष्य का एक दायरा निर्धारित करने के लिये दिया गया है।
  • उदाहरण के लिये राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3 प्रतिशत होकर5 से 5 प्रतिशत के बीच हो सकता है। यह मौद्रिक नीति समिति द्वारा निर्धारित खुदरा मुद्रास्फीति (4%+-2) के समान होगा।
  • राजकोषीय घाटे को सीधे लक्ष्य की बजाय एक दायरे में रखने के लिये राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (FRBM) कानून में संशोधन करना होगा।
  • वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में सरकार द्वारा FRBM कानून में प्रदान की गई5 प्रतिशत की छूट के लिये पिछले वर्ष और चालू वित्त वर्ष के लिये राहत का प्रावधान किया गया था। इससे राजकोषीय घाटे का लक्ष्य इन दो वर्षों में GDP का क्रमशः 3.8 प्रतिशत एवं 3.5 प्रतिशत रखा गया।
  • 15वाँ वित्त आयोग वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 के लिये अपनी रिपोर्ट 30 अक्तूबर, 2020 तक सौपेंगा।

क्या है FRBM कानून?

  • उल्लेखनीय है कि देश की राजकोषीय व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिये तथा सरकारी खर्च तथा घाटे जैसे कारकों पर नज़र रखने के लिये राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (FRBM)  कानून को वर्ष 2003 में तैयार किया गया था तथा जुलाई 2004 में इसे प्रभाव में लाया गया था।
  • यह सार्वजनिक कोषों तथा अन्य प्रमुख आर्थिक कारकों पर नज़र रखते हुए बजट प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। FRBM के माध्यम से देश के राजकोषीय घाटों को नियंत्रण में लाने की कोशिश की गई थी, जिसमें वर्ष 1997-98 के बाद भारी वृद्धि हुई थी।
  • केंद्र सरकार ने FRBM कानून की नए सिरे से समीक्षा करने और इसकी कार्यकुशलता का पता लगाने के लिये एन. के. सिंह के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था।

मौद्रिक नीति समिति-

  • मौद्रिक नीति समिति (MPC) का गठन ब्याज दर निर्धारण को अधिक उपयोगी एवं पारदर्शी बनाने के लिये 27 जून, 2016 को किया गया था।
  • वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1934 (RBI अधिनियम) में संशोधन किया गया, ताकि मौद्रिक नीति समिति को वैधानिक और संस्थागत रूप प्रदान किया जा सके।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से तीन सदस्य RBI से होते हैं और अन्य तीन सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय बैंक द्वारा की जाती है।
  • रिज़र्व बैंक का गवर्नर इस समिति का पदेन अध्यक्ष होता है, जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर मौद्रिक नीति समिति के प्रभारी के तौर पर काम करते हैं।

आगे की राह-

  • आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के पहले तीन महीनों (अप्रैलजून) के लिये केंद्र का राजकोषीय घाटा62 लाख करोड़ रुपए पहुँच गया, जो कि इस वर्ष के लिये बजटीय लक्ष्य रूपए 7.96 लाख करोड़ का 83% है।
  • COVID-19 जैसी महामारी में राजकोषीय अनिश्चितताओं का बढ़ना स्वाभाविक है। अतः राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को एक दायरे में रखना केंद्र और राज्य सरकारों को राजकोषीय लक्ष्यों की प्राप्ति के क्रम में लचीलापन प्रदान करेगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

OTT क्या है?

  • ओटीटी अर्थात् over-the-top एक मीडिया सर्विस है जो फिल्म, विडियो आदि को इन्टरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध करता है. इसके अन्दर ऑडियो प्रसारण, सन्देश सेवा अथवा इन्टरनेट पर आधारित वौइस् कॉलिंग भी आते हैं. OTT सेवा को दूरसंचार नेटवर्क या केबल टेलीविज़न प्रदाताओं की आवश्यकता नहीं पड़ती. यदि आपके पास मोबाइल या किसी स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से इन्टरनेट सम्पर्क है तो आप आराम से OTT प्रसारण का आनंद ले सकते हैं. आजकल OTT लोकप्रिय है क्योंकि इसमें कम दाम पर अच्छी-अच्छी सामग्रियाँ उपलब्ध हो जाती हैं. इसमें नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम जैसी मौलिक सामग्रियाँ भी मिल जाती हैं.
  • OTT पर उपलब्ध कई सामग्रियाँ कम उम्र के बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. इसमें उपलब्ध कई विडियो महिलाओं को गलत अर्थों में दिखाते हैं और बच्चों के साथ-साथ युवाओं के दिमाग को भी दूषित करते हैं. NETFLIX, ULLU app, Jio Cinema, Amazon Prime जैसी कंपनियां भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, महिलाओं का प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम और भारतीय संविधान के कई प्रावधानों का भी उल्लंघन कर रही हैं. सच कहा जाए तो OTT पर प्रसारित सामग्रियों ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीवन के अधिकार को प्रभावित किया है.

 

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