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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट

27th July, 2020

G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report) का 21वाँ अंक जारी किया है

प्रमुख बिंदु-

  • RBI ने COVID-19 महामारी और राष्ट्रीयव्यापी लॉकडाउन के प्रभावस्वरूप बैंकिंग क्षेत्र के लियेगैरनिष्पादनकारी परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets) में काफी वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की है।
  • रिपोर्ट जारी करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने चेतावनी दी है कि RBI द्वारा क्रेडिट जोखिम के आधार पर किये गए परीक्षणों से संकेत मिलता है कि सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंकों (SCBs) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात मौजूदा परिस्थितियों के तहत मार्च 2020 में5 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2021 तक 12.5 प्रतिशत हो सकता है।
  • उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, यह अनुपात मार्च 2000 के सकल NPA अनुपात (12.7 प्रतिशत) के बाद सबसे अधिक है।
  • गौरतलब है कि बीते माह में एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) नामक निजी कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि बैंकों का सकल NPA अनुपात 13-14 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
  • RBI की इस अर्द्धवार्षिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि यदि आर्थिक स्थितियाँ और अधिक बिगड़ती हैं, तो सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात7 प्रतिशत तक भी पहुँच सकता है।
  • RBI की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 में अनुसूचित वाणिज्य बैंकों (SCBs) का पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) घटकर8 प्रतिशत हो गया है, जो कि सितंबर 2019 में 15 प्रतिशत था।
  • RBI के अनुमान के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में मार्च 2021 तक यह अनुपात3 प्रतिशत पर पहुँच सकता है, और यदि आर्थिक परिस्थितियाँ और बिगड़ती हैं तो यह अनुपात 11.8 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।
  • पूँजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio-CAR) को पूँजी-से-जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (Capital-to-Risk Weighted Assets Ratio-CRAR) के रूप में भी जाना जाता है। इसका उपयोग जमाकर्त्ताओं की सुरक्षा और विश्व में वित्तीय प्रणालियों की स्थिरता और दक्षता को बढ़ावा देने के लिये किया जाता है।
  • वित्तीय वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के दौरान बैंक ऋण काफी कमजोर रहा था, और मार्च 2020 तक में भी यह9 प्रतिशत तक नीचे गिर गया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति प्रबंधन कंपनियाँ और म्यूचुअल फंड वित्तीय प्रणाली में सबसे बड़े फंड प्रदाता रहे, जिनके बाद बीमा कंपनियों का स्थान है, वहींगैरबैंकिंगवित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने वित्तीय प्रणाली में सबसे अधिक उधार प्राप्त किया था।

वित्तीय प्रणाली पर COVID-19 का प्रभाव-

  • RBI ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा है कि COVID-19 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बैंकों की ऋण वृद्धि में भारी गिरावट देखने को मिली है और लाखों लोग बेरोज़गार हो गए हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 से मुकाबले में एक अभूतपूर्व पैमाने पर राजकोषीय, मौद्रिक और नियामक हस्तक्षेपों के संयोजन ने वित्तीय बाज़ारों के सामान्य कामकाज को सुनिश्चित किया है।
  • RBI ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार के वित्त में कुछ गिरावट आने की संभावना है, क्योंकि COVID-19 महामारी से संबंधित व्यवधानों के कारण सरकार का राजस्व भी काफी प्रभावित हुआ है।

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट-

  • वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) भारतीय रिज़र्व बैंक का एक अर्द्धवार्षिक प्रकाशन है जो भारत की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का समग्र मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
  • साथ ही यह वित्तीय क्षेत्र के विकास और विनियमन से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

आगे की राह-

  • RBI द्वारा जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नियामक संस्थाओं और सरकार ने वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये कई नीतिगत उपाय किये हैं और देश के वंचित तथा संवेदनशील वर्ग के समक्ष मौजूद संकट को कम किया है, किंतु इसके बावजूद अल्पकाल में अर्थव्यवस्था के समक्ष कई चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिनसे निपटना अभी शेष है।

स्मॉग टॉवर

G.S. Paper-III (Environment)

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते के अंदर पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार में स्मॉग टावर लगवाने के लिए सहमति पत्र जारी करने को कहा है।
  • इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मुंबई) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) में हस्ताक्षरित करने का निर्देश दिया है।

क्या होता है स्मॉग टावर?

  • स्मॉग टॉवर एक चिमनी के आकार की संरचना वाला एक बहुत बड़ा एयर प्यूरीफायर होता है।
  • स्मॉग टावरों को बड़े पैमाने पर एयर प्यूरिफायर के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
  • ऐसा अनुमान है कि लाजपत नगर में स्थापित स्मॉग टॉवर हर दिन 6,00,000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ़ करने में सक्षम है और यह हवा से तकरीबन 75 फीसदी से अधिक प्रदूषित कणों को साफ़ करता है।
  • स्मॉग टावर परियोजना को IIT मुंबई ने IIT दिल्ली और मिनी सोटा विश्वविद्यालय के सहयोग से अमली जामा पहनाया गया है। इस परियोजना में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड़ की भी मदद ली गयी है।
  • गौरतलब है कि चीन अपने शहरों की हवा को शुद्ध करने के लिए बड़ी मात्रा में स्मॉग टावरों का उपयोग कर रहा है।

कैसे काम करता है स्मॉग टावर?

  • इसमें आमतौर पर एयर फिल्टर की कई परतें होती हैं, जो हवा से प्रदूषकों को साफ करते है जब यह हवा इन फिलटरों से होकर गुज़रती है।
  • टॉवर में लगाए गए फिल्टरों में मुख्य घटक के रूप में कार्बन नैनोफाइबर का उपयोग किया गया है जिनका काम हवा से प्रदूषक कणों या पार्टिकुलेट मैटर को कम करना है।
  • दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि यहाँ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 700 के पार तक चला जाता है। ऐसे में ये स्मॉग टॉवर दिल्ली के प्रदूषण को कम करने में सहायक             हो सकते हैं।

कुम्हार शक्तिकरण योजना

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ-

गौरतलब है कि केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने वंचित कुम्हार समुदाय के सशक्तीकरण और उसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से जोड़ने के लिए आज खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा चलाई जा रही कुम्हार शक्तिकरण योजना के एक सौ प्रशिक्षित कारीगरों को 100 विद्युत चाक वितरित किए.

योजना का महत्त्व-

  • कुम्हार सशक्तीकरण योजना कुम्हार समुदाय को “आत्मनिर्भर” बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है.
  • यह पहल हाशिए पर पहुंच चुके कुम्हार समुदाय को मजबूत बनाने में मदद करेगी और मिट्टी के बर्तनों की पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में सहायक होगी.
  • इस संदर्भ में केवीआईसी (KVIC) द्वारा गांधीनगर जिले में 14 गांवों के 100 कुम्हारों को प्रशिक्षित किया है और 100 इलेक्ट्रिक पहिये तथा 10 ब्लेंजर मशीनें वितरित की गयी हैं.

कुंभकार सशक्तीकरण योजना क्या है?

  • नीति आयोगद्वारा चिन्हित आकांक्षा जिलों में मिट्टी के बर्तन बनाने की परम्परा को जीवंत रखने के लिए खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) ने एक बड़ी योजना बनाई है जिसका नाम कुम्हार सशक्तीकरण योजना है.
  • इस योजना के अंतर्गत पोखरण में सदियों से रहते आये 80 कुम्हार परिवारों को बिजली का एक-एक चाक (potter wheels) बाँटा जाता है.
  • ज्ञातव्य है कि यह कार्यक्रम इन राज्यों में चलाया जा रहा है – राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, J & K, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना और बिहार.
  • ‘कुम्हार सशक्तीकरण योजना’ के तहत कुम्हारों की औसत आय लगभग 3000 रुपये प्रति माह से बढ़कर लगभग 12,000 रुपये प्रति माह हो गई है.

इस कार्यक्रम कुम्हारों को निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती है –

  1. उन्नत मिट्टी के बर्तनों उत्पादों के लिए प्रशिक्षण
  2. नई तकनीक पॉटरी उपकरण जैसे इलेक्ट्रिक चाक
  3. बाजार संपर्क तथा KVIC प्रदर्शनियों के माध्यम से दृश्यता

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

यलो इंडियन बुलफ्रॉग

Yellow Indian Bullfrog

हाल ही में मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर ज़िले में यलो इंडियन बुलफ्रॉग’ (Yellow Indian Bullfrog) का एक बड़े समूह को देखा गया।

प्रमुख बिंदु-

  • इंडियन बुलफ्रॉग में मादाओं को आकर्षित करने के लिये मानसून के दौरान रंग बदलने की क्षमता होती है।
  • ‘इंडियन बुलफ्रॉग’ आमतौर पर चमकीले पीले रंग के नहीं होते हैं किंतु नर प्रजनन के दौरान रंग बदल सकते हैं।
  • मानसून काल के दौरान जब इनका प्रजनन काल शुरू होता है तो ये बुलफ्रॉग अपने रंग को हल्के हरे रंग से बदलकर पीला कर लेते हैं।

इंडियन बुलफ्रॉग-

  • ‘इंडियन बुलफ्रॉग’ का वैज्ञानिक नाम ‘होप्लाबत्राचुस टाइगरीनस’ (Hoplobatrachus Tigerinus) है।
  • इसे आमतौर पर बुलफ्रॉग (Bullfrog), गोल्डन फ्रॉग (Golden Frog), टाइगर फ्रॉग (Tiger Frog) आदि नामों से भी जाना जाता है।
  • इसेIUCN की रेड लिस्ट में कम चिंताजनक (Least Concern) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
  • यह अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान की देशज प्रजाति है।
  • इसेभारतीय वन्यजीव अधिनियम, 1972 (Indian Wildlife Act, 1972) अनुसूची-IV में सूचीबद्ध किया गया है। अर्थात् इस प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा नहीं है किंतु इसके शिकार करने पर जुर्माना लगाया जाता है।

 

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