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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल

G.S. Paper-II

चर्चा का कारण-

हाल ही में, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force– FATF) द्वारा संयुक्त विशेषज्ञों की वार्षिक बैठक आयोजित की गयी।

  1. इसमें पूरे विश्व की विभिन्न सरकारी एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और इंटरपोल जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकायों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  2. FATF ने कहा है, कि वहप्रभावी जानकारी साझा करने पर सर्वाधिक महत्व देता है, और यह AML/CFT (Anti-Money Laundering/Combating the Financing of Terrorism) अर्थात, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने के सुचारू कार्यान्वयन हेतु अत्याधिक आवश्यक है।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।

  1. यह एकनीतिनिर्माणक निकाय है, जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तरों पर विधायी और नियामक सुधार लाने हेतु आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति पैदा करने हेतु कार्य करता है।
  2. इसका सचिवालय पेरिस मेंआर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and Development- OECD)मुख्यालय में स्थित है।

भूमिका एवं कार्य:

  1. शुरुआत में FATF को मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने संबंधी उपायों की जांच करने तथा इनका विकास करने के लिए स्थापित किया गया था।
  2. अक्टूबर 2001 में, FATF द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने संबंधी प्रयासों को शामिल करने हेतु अपने अधिदेश का विस्तार किया गया।
  3. अप्रैल 2012 में, इसके द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार हेतु वित्तपोषण पर रोक लगाने को अपने प्रयासों में सम्मिलित किया गया।

संरचना:

वर्त्तमान में, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) में 39 सदस्य तथा दो क्षेत्रीय संगठन सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें पर्यवेक्षक और सहयोगी सदस्य भी शामिल होते हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘इंडियन पीकॉक सॉफ्ट-शेल कछुआ’

यह भारतनेपाल और बांग्लादेश में पायी जाने वाली स्थानिक प्राजाति है, और यह मुख्यतः नदी व जोहड़ में पायी जाती है।

ये प्रायः सर्वाहारी (मुख्य रूप से मांसाहारी) और निशाचर होते हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN की रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
  2. प्रजाति को CITES के परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध
  3. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची I के तहत संरक्षित

 

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