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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

वर्ष (2020-21) की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े

2nd सितम्बर, 2020

G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation- MoSPI) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किये हैं।
  • भारत में वर्ष 1996 में जीडीपी के तिमाही आंकड़े जारी होना शुरू हुए थे। तब से लेकर अब तक यह देश की जीडीपी में सबसे बड़ी गिरावट है। साथ ही यह एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से भी सबसे अधिक गिरावट है।

वर्तमान जीडीपी के आंकड़े से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल,2020 से जून, 2020 तक ) में जीडीपी में 23.9 फीसद की नकारात्मक वृद्धि दर (negative growth rate) दर्ज की गई है। इसकी तुलना में पिछली तिमाही में जीडीपी में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। 2019-20 की समान तिमाही में 5.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
  • जीडीपी के आंकड़ों में यह गिरावट इसलिए है, क्योंकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित रही थीं। कड़े देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान तो सिर्फ आवश्यक सामानों और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं।
  • आंकड़ों के अनुसार 2020-21 की पहली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सकल मूल्य वर्धन (GVA) ‘–39.3’ फीसदी रहा। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में यह ‘-50.3’ फीसदी रहा है। बिजली क्षेत्र में यह ‘-7’ फीसदी है। उद्योग में सकल मूल्य वर्धन ‘-38.1’ फीसदी और सर्विस सेक्टर में ‘-0.6’ फीसदी रहा है।
  • आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार आदि सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 45 फीसदी का योगदान रखते हैं और पहली तिमाही में इन सभी सेक्टर के कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा है।

क्या होती है जीडीपी?

  • किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समयसीमा में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक या बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कहते हैं।
  • यह किसी देश के घरेलू उत्पादन का व्यापक मापन होता है और इससे किसी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत पता चलती है।
  • इसकी गणना आमतौर पर वार्षिक होती है, लेकिन भारत में इसे हर तीन महीने यानी तिमाही भी आंका जाता है। कुछ वर्ष पूर्व इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और कंप्यूटर जैसी अलगअलग सेवाओं यानी सर्विस सेक्टर को भी जोड़ दिया गया.
  • जीडीपी दो तरह की होती हैनॉमिनल और रियल
  • नॉमिनल जीडीपी सभी आंकड़ों का मौजूदा कीमतों पर योग होता है, लेकिन रियल जीडीपी में महंगाई के असर को भी समायोजित कर लिया जाता है अर्थात अगर किसी वस्तु के मूल्य में 10 रुपये की बढ़त हुई है और महंगाई 4 फीसदी है तो उसके रियल मूल्य में बढ़त 6 फीसदी ही मानी जाएगी। भारत में हर तिमाही जो आंकड़े जारी होते हैं वे रियल जीडीपी के होते हैं।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 

(National Population Register– NPR)

G.S. Paper-II (National)

सन्दर्भ

जनगणना के पहले चरण तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register– NPR) को अद्यतन करने की प्रक्रिया को इसी वर्ष पूरा किया जाना था, किंतु कोरोनोवायरस महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब इसमें संभवतः एक साल तक की देरी हो सकती है, क्योंकि महामारी कम होने के अभी तक संकेत नहीं मिले हैं।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) क्या है?

यह देश के सामान्य निवासियों’ की एक सूची होती है।

  1. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) को नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्‍ट्रीय पहचानपत्र जारी करना) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय, उपज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।
  2. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में पंजीकरण कराना भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिये अनिवार्य है।

उद्देश्य: देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना।

देश के सामान्य निवासी कौन है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘देश का सामान्य निवासीको निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया हैवह व्यक्ति, जो कमसेकम पिछले छह महीनों से किसी स्थानीय क्षेत्र में रहता है अथवा अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक के लिये किसी विशेष स्थान पर रहने का इरादा रखता है।

संबंधित विवाद

  1. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से संबंधित विवाद, असम में जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रक्रिया में लाखों लोगों को बाहर किये जाने की पृष्ठभूमि से उत्पन्न होते हैं।
  2. इसका उद्देश्य भारी मात्रा में भारत के निवासियों का विस्तृत व्यक्तिगत डेटा एकत्र करना है।
  3. एकत्र किये हुए डेटा की विशाल मात्रा के संरक्षण के लिए प्रणाली पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है।

भारत में जैविक कृषि: दशा दिशा

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों?

वैश्विक महामारी COVID-19 के कारण पूरे विश्व में बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षित भोजन की मांग में वृद्धि हुई है। भारत जैविक कृषकों की संख्या के मामले में प्रथम तथा जैविक कृषि क्षेत्रफल के मामले में 9वें स्थान पर है।

प्रमुख बिंदु– 

सिक्किम पूरी तरह से जैविक कृषि अपनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। त्रिपुरा और उत्तराखंड राज्य भी इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में प्रयास कर कर रहे हैं।

जैविक कृषि–  

  • जैविक कृषि (ऑर्गेनिक फार्मिंग) कृषि की वह विधि है जो संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों का अप्रयोग या न्यूनतम प्रयोग किया जाता है तथा जिसमें भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कंपोस्ट आदि का प्रयोग किया जाता है। 
  • जैविक कृषि में मिट्टी, पानी, रोगाणुओं और अपशिष्ट उत्पादों, वानिकी और कृषि जैसे प्राकृतिक तत्त्वों का एकीकरण शामिल है।

जैविक कृषि के उद्देश्य– 

  • यह कृषिआधारित उद्योग के लिये भोजन और फीडस्टॉक की बढ़ती आवश्यकता के कारण प्राकृतिक संसाधनों के सतत् उपयोग के लिये आदर्श पद्धति है। 
  • यह सतत् विकास लक्ष्य-2 के अनुरूप है जिसका उद्देश्य भूख को समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना और बेहतर पोषण और कृषि को बढ़ावा देना है।  

भारत में जैविक कृषि की संभावना

  • उत्तरपूर्व भारत पारंपरिक रूप से जैविक कृषि के अनुकूल रहा है और यहाँ रसायनों की खपत देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत कम है। 
  • वर्तमान सरकार द्वारा जनजातीय और द्वीपीय क्षेत्रों में भी कृषि के जैविक तरीकों को आगे बढ़ाने के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • भारत वैश्विकजैविक बाज़ारोंमें एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है। भारत से प्रमुख जैविक निर्यातों में सन बीज, तिल, सोयाबीन, चाय, औषधीय पौधे, चावल और दालें रहे हैं। 
  • वर्ष 2018-19 में विगत वर्ष की तुलना में 50% की वृद्धि के साथ जैविक निर्यात लगभग 5151 करोड़ रुपए रहा है।

सरकार की पहल

मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन’ (MOVCD):

  • मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन (MOVCD-NER) एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना (CSS) है। यह सतत् कृषि के लिये राष्ट्रीय मिशन (NMSA) के तहत एक उपमिशन है। 
  • इसे वर्ष 2015 में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा राज्यों में प्रारंभ किया गया था।
  • यह योजना जैविक उत्पादन काप्रमाणप्रदान करने ग्राहकों में उत्पाद के प्रति विश्वास पैदा करने के दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। 

परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY):

  • परंपरागत कृषि विकास योजना को वर्ष 2015 में प्रारंभ किया गया था जोसतत् कृषि के लिये राष्ट्रीय मिशन‘ (NMSA) के उप मिशनमृदा स्वास्थ्य प्रबंधन’ (Soil Health Management- SHM) का एक प्रमुख घटक है।
  • PKVY के तहत जैविक कृषि मेंक्लस्टर दृष्टिकोणऔरभागीदारी गारंटी प्रणाली‘ (Participatory Guarantee System- PGS) प्रमाणन के माध्यम सेजैविक ग्रामोंके विकास को बढ़ावा दिया जाता है।
  • भागीदारी गारंटी प्रणाली’ (Participatory Guarantee System-PGS) औरजैविक उत्पादन के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम’ (National Program for Organic Production- NPOP) के तहत प्रमाणन को बढ़ावा दे रही हैं।

एक ज़िलाएक उत्पाद योजना:

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विशेष उत्पादों की अधिक दृश्यता और बिक्री को प्रोत्साहित करना है, ताकि ज़िला स्तर पर रोज़गार पैदा हो सके।
  • एक ज़िलाएक उत्पाद (One district – One product) योजना ने छोटे और सीमांत किसानों को जैविक कृषि के बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में मदद की है। 

जैविक कॉमर्स प्लेटफॉर्म:

जैविक कॉमर्स प्लेटफॉर्म www.jaivikkheti.in को सीधे खुदरा विक्रेताओं के साथसाथ थोक खरीदारों के साथ जैविक किसानों को जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष:

भारत में प्राकृतिक खेती कोई नई अवधारणा नहीं है। अत: अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन में उत्पादकों की अधिक जागरूकता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने से भारतीय जैविक किसान जल्द ही वैश्विक कृषि व्यापार में प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम होंगें।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पेट्रापोल 

(Petrapole)

  • यह भारत और बांग्लादेश मध्य पेट्रापोलबेनापोल सीमा चौकी पर भारतीय ओर का बिंदु है। यह  पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में बोंगावं (Bongaon) के निकट बांग्लादेशभारत सीमा पर स्थित है।
  • पेट्रापोल सीमा दक्षिण बंगाल में एकमात्र स्थलीय पोर्ट है। यह एशिया का सबसे बड़ा स्थलीय सीमा शुल्क स्टेशन भी है।
  • इस स्थलीय पोर्ट से भारत और बांग्लादेश के मध्य लगभग 60 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार होता है।

 

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