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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

लोकपाल समिति के कार्य-विवरण को सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने लोकपाल चयन समिति की बैठकों के कार्य-विवरण को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission– CIC) ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को बरकरार रखा है।

केंद्र सरकार द्वारा अपने बचाव में आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (e) के अंतर्गत दिए गए छूट के प्रावधान को लागू किया गया है।

चयन समिति:

सदस्यों की नियुक्ति, एक चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

चयन समिति की संरचना:

  1. प्रधानमंत्री- अध्यक्ष
  2. लोकसभा अध्यक्ष,
  3. लोकसभा में विपक्ष के नेता,
  4. भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा उनके द्वारा नामित न्यायाधीश
  5. एक प्रख्यात न्यायविद्

लोकपाल अधिनियम (संशोधन) 2016 के माध्यम से, मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति का सदस्य बनाने का प्रावधान किया गया।

लोकपाल अधिनियम, 2013 की प्रमुख विशेषताएं:

  1. अधिनियम के अंतर्गत, एक भ्रष्टाचार-रोधी ‘प्रशासनिक शिकायत जाँच अधिकारी’ (Ombudsman) का गठन करने का प्रावधान किया गया है, जिसे केंद्र स्तर पर ‘लोकपाल’ तथा राज्य स्तर पर ‘लोकायुक्त’ कहा जाएगा।
  2. लोकपाल एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा, जिसमे एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य होंगे।
  3. लोकपाल का अधिकार क्षेत्र, प्रधानमंत्री सहित सभी श्रेणियों के लोक सेवक पर विस्तारित होता है। किंतु सशस्त्र बल, लोकपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर होते हैं।
  4. अधिनियम में, अभियोजन के लंबित होने पर भी, भ्रष्ट साधनों द्वारा अर्जित संपत्ति की कुर्की और जब्ती का प्रावधान किया गया है।
  5. अधिनियम लागू होने के एक वर्ष के भीतर, राज्यों के लिए लोकायुक्त का गठन करना होगा।
  6. अधिनियम में, सूचना प्रदाता (whistleblowers) के रूप में कार्य करने वाले लोक सेवकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।

शक्तियां:

  1. लोकपाल के लिए, ‘प्रशासनिक शिकायत जाँच अधिकारी’ द्वारा उसके लिए संदर्भित किये गए मामलों में, सीबीआई सहित किसी भी जांच एजेंसी के ऊपर अधीक्षण करने और उसे निर्देश जारी करने की शक्ति होगी।
  2. अधिनियम के अनुसार, लोकपाल, किसी भी लोक सेवक के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला होने पर, उसे पूछताछ के लिए बुला सकता है, भले ही उसके खिलाफ किसी जांच एजेंसी (जैसे सतर्कता आयोग या सीबीआई) द्वारा अभी जांच शुरू नहीं की गयी हो।
  3. यदि लोकपाल ने कोई मामला सीबीआई को सौंपा है, तो बिना लोकपाल की अनुमति के ऐसे मामले के जाँच अधिकारी को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
  4. जांच-कार्यवाही, छह महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। हालांकि, लोकपाल या लोकायुक्त, जांच की अवधि, एक बार में छह महीने तक बढ़ा दे सकते हैं, बशर्ते इसके लिए लिखित में उचित कारण दिया गया हो।
  5. लोकपाल द्वारा संदर्भित मामलों पर सुनवाई करने के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सदिया भूकंप

  1. वैज्ञानिकों को असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित हिमबस्ती गाँव में भूकंप का पहला भूगर्भीय साक्ष्य मिला है। इतिहासकारों ने इसे इस क्षेत्र में बड़े विनाश का कारण बने सदिया भूकंप के रुप में दर्ज किया है।
  2. ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 1667 ईस्वी में आए इस भूकंप ने सदिया शहर को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया था।
  3. यह खोज पूर्वी हिमालय क्षेत्र में भूंकप की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उसके अनुरुप यहां निर्माण गतिविधियों की योजना बनाने में मददगार हो सकती है।

 

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