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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM)

4th september 2019

समाचार में क्यों?  राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (¼DAY-NULM½) को उसके च्।पै। पोर्टल के लिए प्रतिष्ठित  SKOCH शासन स्वर्ण पुरस्कार (SKOCH Governance Gold Award)  से सम्मानित किया गया।

PAISA पोर्टल क्या है?

  • PAISA का पूरा नाम है – Portal for Affordable Credit and Interest Subvention Access-.
  • इस पोर्टल का अनावरण नवम्बर 2018 में हुआ था।
  • भारत सरकार ने दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत लाभार्थियों को दिए जाने वाले बैंक ऋण से सम्बन्धित ब्याज के प्रसंस्करण के लिए एक केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक मंच – PAiSA – का अनावरण किया था। ¼DAY-NULM½
  • इस ऐप का रूपांकन और निर्माणइलाहाबाद बैंक ने किया है जो इसके लिए नाभिक बैंक (¼nodal bank½) है।

 

PAISA के लाभ:

  • सरकारी सेवाओं को लाभार्थियों तक पहुँचाने में अधिक से अधिक पारदर्शिता और कुशलता आएगी जिसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत रहती है।
  • इससे लाभार्थियों को मासिक स्तर पर प्रत्यक्ष लाभ स्थानान्तरण ¼DBT) की राशि ससमय प्राप्त हो सकेगी और उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा।
  • यह आशा है कि इस वर्ष के अंत-अंत तक सभी 35 राज्य/केंद्रशाषित क्षेत्र, सभी अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ¼RRB½ और सहकारी बैंक इस मंच से जुड़ जायेंगे।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन ¼DAY-NULM½:

  • यह शहरी आजीविका से सम्बंधित एक राष्ट्रीय मिशन है। इस योजना का पूरा नाम राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशनथा पर अब इसका नाम बदलकर दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन रख दिया गया है।
  • यह योजना देश के 4,041 शहरों पर अर्थात् देश की सम्पूर्ण शहरी जनसंख्या पर लागू है।

(DAY-NULM) के अवयव:

  • योजना के दो अवयव हैं – शहरी और ग्रामीण।
  • शहरी अवयव का कार्यान्वयन आवास एवं शहरी निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
  • ग्रामीण अवयव का नाम दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना है जिसका कार्यान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है।

(DAY-NULM) के उद्देश्य

  • शहर के निर्धन परिवारों को स्वरोजगार और अन्य कौशल्यपूर्ण रोजगार का अवसर देते हुए उनकी गरीबी और असहायता को दूर करना।
  • शहर के बेघर लोगों को क्रमबद्ध रूप से ऐसे आश्रय मुहैया करना जिनमें जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ हों।
  • शहर में फेरी लगाने वालों को उचित जगह बैंक आदि का ऋण और सामजिक सुरक्षा की सुविधा देना और उन्हें ऐसे कौशल्य सिखाना कि वे बाजार में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

Topic:  For prelims and mains:

ब्रह्मपुत्र नदी और भारत तथा चीन :

समाचार में क्यों?      हाल ही में चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा दिये गए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चीन ने यारलुंग जांग्बो नदी (Yarlung Zangbo River½  पर एक जलविद्युत संयंत्र का निर्माण कर लिया है एवं 2 अन्य जलविद्युत संयंत्रों का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, परंतु इसमें से किसी भी परियोजना में जल का भंडारण शामिल नहीं है।

  • तिब्बत की यारलुंग जांग्बो नदी भारत के असम में पहुँचकर ब्रह्मपुत्र नदी के नाम से जानी जाती है।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • कुछ आसत्यापित मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी सरकार तिब्बत में यारलुंग जांग्बो नदी पर बड़ी बांध परियोजना का निर्माण कर रही है, जिसके कारण नदी का पानी भारत तक नहीं पहुँचेगा और चीन में ही भंडारित कर लिया जाएगा।
  • चीन ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह नकार दिया है और कहा है कि वह नदी के पानी का केवल कुछ ही हिस्सा प्रयोग करता है और अन्य क्षेत्रों के प्रयोग हेतु काफी पानी बचता है।

ब्रह्मपुत्र नदी विवाद :

  • बीते वर्षों में कई बार ऐसी खबरें सामने आती रही हैं कि चीन, तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह को रोकने के उद्देश्य से बांध का निर्माण कर रहा है और यदि ऐसा होता है तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, यही दोनों पक्षों के मध्य विवाद का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
  • हालाँकि चीन की सरकार द्वारा हर बार इस प्रकार की खबरों को सिरे से नकार दिया जाता है, परंतु चीन की विशाल आबादी को देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि उसे जल संसाधन की सख्त आवश्यकता है और इसकी पूर्ति हेतु वह किसी भी नीति का अनुसरण कर सकता है।

चीन को अधिक जल संसाधन की जरूरत :

  • नवीन आँकड़ों के अनुसार, विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी चीन में निवास करती है एवं उसके पास विश्व के पीने योग्य जल संसाधनों का 7 फीसदी से भी कम हिस्सा मौजूद है।
  • चीन की जल संसाधन चुनौतियों में न सिर्फ मात्रात्मक चुनौतियाँ शामिल हैं बल्कि उसके समक्ष गुणवत्ता संबंधी चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। स्वयं चीन के सरकारी आँकड़ों के अनुसार चीन का लगभग 60 प्रतिशत भूजल दूषित है।
  • चीन की 12वीं पंचवर्षीय योजना में माना गया था कि जल संसाधनों की कमी के कारण देश के आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
  • जल संसाधनों तक निरंतर पहुँच, आपूर्ति और नियंत्रण को बनाए रखना सदैव ही चीन के राष्ट्रीय हितों में शामिल रहा है। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि चीन की आंतरिक चुनौतियाँ उसे अपने जल संसाधनों के भंडारण हेतु प्रेरित कर सकती हैं।

भारत के हितों पर प्रभाव:

  • यारलुंग जांग्बो नदी पर चीन की जलविद्युत परियोजनाएँ ब्रह्मपुत्र नदी को एक मौसमी नदी में परिवर्तित कर देंगी, जिसका परिणाम भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सूखे के रूप में सामने आ सकता है।
  • एक अन्य खतरा यह है कि बांधों के निर्माण के पश्चात् जब चीन मानसून में बाढ़ का पानी छोड़ेगा तो इससे ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाएगी।
  • नदियों के आस-पास जल संबंधी परियोजनाओं के चलते चीन ने अपनी नदियों को काफी प्रदूषित किया है और इसके कारण चीन से भारत की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों के जल की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
  • इसके अतिरिक्त चीन के इस कदम से असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य जो कि ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर निर्भर हैं, में भी पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी।
ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ी मुख्य बातें

  • भारत की ब्रह्मपुत्र नदी को ही तिब्बत में यारलुंग जांग्बो के नाम से जाना जाता है। चीन में इसका एक अन्य नाम यारलुंग त्संग्पो (Yarlung Tsangpo) भी है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोतों के काफी नजदीक से निकलती है। इसकी लंबाई सिंधु से कुछ अधिक है, परंतु इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है। यह हिमालय के समानांतर पूर्व की ओर बहती है। नामचा बारवा शिखर (7,757 मीटर) के पास पहुँचकर यह अंग्रेजी के यू (U)  अक्षर जैसा मोड़ बनाकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है।
  • यहाँ इसे दिहाँग के नाम से जाना जाता है तथा दिबांग, लोहित, केनुला एवं दूसरी सहायक नदियाँ इससे मिलकर असम में ब्रह्मपुत्र का निर्माण करती हैं।
  • तिब्बत के रागोंसांग्पो इसके दाहिने तट पर एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • हिमालय के गिरिपद में यह सिशंग या दिशंग के नाम से निकलती है। अरुणाचल प्रदेश में सादिया कस्बे के पश्चिम में यह नदी भारत में प्रवेश करती है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए इसके बाएँ तट पर इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ दिबांग या सिकांग और लोहित मिलती हैं और इसके बाद यह नदी ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

‘लियो परगेल’:

  • भारतीय सेना की एक टीम ने विषम मौसम की चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करते हुए ‘लियो परगेल’ (Leo Pargyil) पर्वत पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की।
  • भारतीय सेना ने यह सफलता 20 अगस्त, 2019 को सुबह 10.30 बजे हासिल की, इसके साथ ही इस पर्वत की चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ फहराया।
  • ‘लियो परगेल’ पर्वत हिमाचल की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है जिसकी ऊँचाई लगभग 6773 मीटर है।
  • इसे सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण एवं तकनीकी दृष्टि से अत्यंत कठिन चोटी माना जाता है। यह पर्वत जास्कर रेंज (Zaskar Range) में आता है।

इस अभियान दल को हिमाचल स्थित पूह (Pooh)से ट्राई पीक ब्रिगेड (Tri Peak Brigade)  के कमांडर द्वारा 20 अगस्त को रवाना किया गया था तथा इसमें ट्राई पीक ब्रिगेड की महार रेजिमेंट की 18वीं बटालियन 18th Battalion the Mahar Regiment) के सैनिक शामिल थे।

 

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