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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम

G.S. Paper-III

संदर्भ-

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के अंतर्गत दुधारू मवेशियों के लिए घातक फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के उन्मूलन हेतु पंजाब में चल रहे टीकाकरण अभियान को तत्काल रोकने को कहा है.

पृष्ठभूमि-

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के अंतर्गत दुधारू मवेशियों के लिए घातक फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के उन्मूलन हेतु पंजाब में चल रहे टीकाकरण अभियान को तत्काल रोकने को कहा है.

NADCP कार्यक्रम क्या है?

यह एक पशु रोग निवारण कार्यक्रम है जिसके तहत पशुओं को खुरहा और मुंह के रोग तथा ब्रूसेलोसिस से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाएगा. इस कार्यक्रम के अंतर्गत 500 मिलियन मवेशियों, भैंसों, भेड़ों, बकरियों और सूअरों को खुरहा और मुंह के रोग के लिए टीके दिए जाएँगे. साथ ही ब्रूसेलोसिस को रोकने के लिए प्रत्येक वर्ष 36 मिलियन गाय-भैंसों और बछडों को टीका लगाया जाएगा.

लक्ष्य-

  • 2025 तक रोगों पर नियंत्रण
  • 2030 तक इन रोगों का उन्मूलन.

वित्तपोषण-

इस योजना के लिए शत प्रतिशत वित्त पोषण केंद्र सरकार करेगी. 2024 तक पाँच वर्षों के लिए कुल मिलाकर 12,652 करोड़ रु. का प्रावधान किया जा रहा है.

आवश्यकता-

भारत में गाएँ, भैसें, सूअर, सांड, भेड़ें और बकरियाँ खुरहा और मुंह के रोग तथा ब्रूसेलोसिस के बहुधा शिकार हो जाते हैं. इन रोगों का दूध के उत्पादन और और अन्य जैव उत्पादों पर नकारात्मक प्रभाव देखा जाता है.

  • यदि खुरहा और मुंह का रोग किसी गाय या भैंस को हो जाता है तो वह चार-छह महीने तक शत प्रतिशत तक दूध देना बंद कर देती है.
  • ब्रूसेलोसिस होने पर भी दूध देने वाले पशु का दूध जीवन भर के लिए एक तिहाई हो जाता है, बछड़ा-बछड़ी जनना भी बंद हो जाता है.
  • ब्रूसेलोसिस में यह दोष है कि यह गोसाला में काम करने वालों और मवेशी के मालिकों को भी संक्रमित होकर लग सकता है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘इंडियन पीकॉक सॉफ्ट-शेल कछुआ’

यह भारतनेपाल और बांग्लादेश में पायी जाने वाली स्थानिक प्राजाति है, और यह मुख्यतः नदी व जोहड़ में पायी जाती है।

ये प्रायः सर्वाहारी (मुख्य रूप से मांसाहारी) और निशाचर होते हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN की रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
  2. प्रजाति को CITES के परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध
  3. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम: अनुसूची I के तहत संरक्षित

 

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