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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन

समाचार में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline- NIP) के अंतर्गत 102 लाख करोड़ रुपए की आधारभूत परियोजनाओं (Infrastructure Projects) की घोषणा की है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु :

  • इन परियोजनाओं को अगले पाँच वर्षों में लागू किया जाएगा।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा था कि अगले पाँच वर्षों में बुनियादी ढाँचे पर 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इन बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ शामिल होंगी। अतः आधारभूत परियोजनाओं में 102 लाख करोड़ रुपए खर्च किये जाने की घोषणा उपर्युक्त परियोजना का ही हिस्सा है।
  • वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक प्रत्येक वर्ष के लिये राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन तैयार करने हेतु हाल ही में टास्क फोर्स का गठन किया गया था।
  • वर्ष 2020 से 2025 के दौरान भारत में बुनियादी ढाँचे पर अनुमानित पूंजीगत व्यय का लगभग 70% ऊर्जा (24%), सड़क (19%), शहरी (16%), और रेलवे (13%) जैसे क्षेत्रों में होगा।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र और राज्य दोनों से 39-39 प्रतिशत वित्त प्राप्त किया जाएगा और निजी क्षेत्र से 22 प्रतिशत वित्त प्राप्त किया जाएगा।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन क्या है?

  • यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत को अपनी विकास दर को बनाए रखने के लिये वर्ष 2030 तक बुनियादी सुविधाओं पर 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन का कार्य इसे एक कुशलतम तरीके से संभव बनाना है।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के लाभ :

  • अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में: बेहतर नियोजित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन से आधारभूत परियोजनाओं को अधिक सक्षम करने, कारोबार में वृद्धि, रोज़गार सृजन, जीवनयापन में सुगमता और बुनियादी ढाँचे तक सभी को न्यायसंगत पहुँच प्रदान करने जैसे अनेक फायदे होंगे जिससे विकास को और अधिक समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।
  • सरकार के राजस्व में वृद्धि: इस कार्यक्रम से बुनियादी ढाँचों के निर्माण में तेज़ी आएगी। चूँकि विकसित बुनियादी ढाँचा आर्थिक गतिविधियों के स्तर को बढ़ाता है जिससे सरकार के राजस्व आधार में सुधार होगा और साथ ही उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित व्यय की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी।
  • यह कार्यक्रम परियोजनाओं को पूरा करने के संबंध में बेहतर दृष्टिकोण प्रदान करता है, साथ ही परियोजना में बोली लगाने के लिये तैयारी हेतु पर्याप्त समय भी प्रदान करता है।
  • यह कार्यक्रम परियोजना के असफल होने जैसी आशंका को कम करता है तथा निवेशकों के आत्मविश्वास में वृद्धि के परिणामस्वरूप वित्त के स्रोतों तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करता है।
  • यह कार्यक्रम निवेशकों के विश्वास को बढ़ता है क्योंकि इसके माध्यम से परियोजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जाता है। यह सक्रिय परियोजनाओं की निगरानी संबंधी तनाव को कम करता है, जिससे गैर-निष्पादित संपत्तियों (Non Performing Assets- NPA) की संभावना कम होती है।
  • इन परियोजनाओं के माध्यम से भारत को वर्ष 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मदद मिलेगी।

NIP से भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कैसे मदद मिलेगी?

  • 102 लाख करोड़ रुपए की राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं से देश का बुनियादी ढाँचा सुदृढ़ होगा जिससे देश में उत्पादन की दर बढ़ेगी और साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने का एक बेहतर माहौल बनेगा।
  • दरअसल, इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग में वृद्धि होगी और रोज़गार के अवसर निर्मित होंगे फलतः सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का मार्ग प्रशस्त होगा।

सेटकॉम तकनीक

समाचार में क्यों?

हाल ही में राजस्थान सरकार ने शैक्षिक संस्थानों में सीखने के परिणामों में वृद्धि करने और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिये बड़े पैमाने पर उपग्रह संचार तकनीक (Satellite Communication Technology-Satcom) का उपयोग शुरू किया है।

मुख्य बिंदु:

  • राजस्थान सरकार द्वारा इस पहल में नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा चयनित पाँच आकांक्षी ज़िलों को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • राजस्थान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने दूरदराज़ के क्षेत्रों में (जहाँ इंटरनेट की सुविधा नहीं हैं) सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने तथा सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में विषय विशेषज्ञों की सेवाएँ प्राप्त करने के लिये ‘रिसीव ऑनली टर्मिनल्स एवं ‘सैटेलाइट इंटरेक्टिव टर्मिनल्स (Satellite Interactive Terminals-SIT) की सुविधा प्रदान करने हेतु यह पहल की है।

रिसीव ऑनली टर्मिनल्स:

  • ये ऐसे उपकरण होते हैं, जिनके द्वारा डेटा को स्वीकार किया जा सकता है, परंतु ये स्वंय डेटा निर्माण में अक्षम होते हैं।
  • ऐसे उपकरणों के माध्यम से दूरदराज़ के क्षेत्रों में विभिन्न जानकारियाँ पहुँचाने में सहायता मिलती है।

सैटेलाइट इंटरेक्टिव टर्मिनल्स:

  • सैटेलाइट इंटरेक्टिव टर्मिनल्स एक छोटे प्रकार का ‘सैटेलाइट डिश (Satellite Dish) होता है।
  • यह ‘सैटेलाइट टेलीविज़न के समान होता है, परंतु इसमें एक ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलर (Radio Frequency Moduler) लगा होता है जो कि रेडियो तरंगों को प्राप्त कर सकता है तथा उन्हें वापस भी भेज सकता है।

पहल का विस्तार क्षेत्र:

  • पहले चरण के दौरान इस तकनीक का उपयोग विभिन्न विभागों, जैसे शिक्षा, उच्च शिक्षा, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, महिला एवं बाल विकास और आदिवासी क्षेत्र के विकास के तहत आने वाले लगभग 2,000 संस्थानों में किया जाएगा।

विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता तथा अन्य विशेषताएँ:

  • सरकारी शिक्षण संस्थानों में अंग्रेज़ी और विज्ञान विषयों का अध्ययन करने वाले छात्रों को ROT और SIT के माध्यम से विषय विशेषज्ञों की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम पाने के लिये छठी कक्षा से बारहवीं तक के छात्रों के बीच अंग्रेज़ी और विज्ञान विषयों का स्तर बढ़ाया जाएगा।
  • इस नए कार्यक्रम की सुविधा सभी 134 मॉडल विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों, समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों, बालगृहों और प्रत्येक ज़िले के सरकारी कॉलेजों के छात्रों को प्रदान की जाएगी।
  • विशेष रूप से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्थानों के छात्रों को सेटकॉम तकनीक के माध्यम से सहायता मिलेगी।
  • इस पहल में नीति आयोग द्वारा चयनित पाँच आकांक्षी ज़िलों- करौली, धौलपुर, बारां, जैसलमेर और सिरोही पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • इन ज़िलों में वृद्धाश्रम और बालगृहों में भी उपग्रह संचार संबंधी उपकरण लगाए जाएंगे।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित आठ सामुदायिक रेडियो स्टेशनों से इन ज़िलों में शिक्षा से संबंधित योजनाओं को प्रसारित किया जाएगा।

सेटकॉम तकनीक:

  • पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों के बीच संचार लिंक प्रदान करने के लिये कृत्रिम उपग्रहों का उपयोग करना ही ‘उपग्रह संचार तकनीक कहलाता है। उपग्रह संचार वैश्विक दूरसंचार प्रणाली में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

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