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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

राष्ट्रपति की सहमति के लिए राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर रोक

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पिछले महीने राज्य विधानसभा में केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में पारित किए गए संशोधन विधेयकों को राजभवन में रोक कर रखा गया है और राज्यपाल द्वारा इन विधेयकों को राष्ट्रपति की सहमति के लिए नहीं भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि, केंद्र सरकार यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि राज्य द्वारा पारित विधेयकलोकहितमें हैं।

विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की राज्यपाल की शक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान-

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 200, राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर सहमति देने एवं विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने तथा राज्यपाल की अन्य शक्तियों से संबंधित है।

अनुच्छेद 200 के अनुसार, जब राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित एक विधेयक को राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो उसके पास चार विकल्प होते हैं:

  1. विधेयक को अनुमति प्रदान कर सकता है।
  2. अनुमति को रोक सकता है।
  3. राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक प्रस्तुत कर सकता है।
  4. विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानमंडल को लौटा सकता है।

राष्ट्रपति के समक्ष विकल्प:

जब राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित किया जाता है, तो राष्ट्रपति उस विधेयक पर अपनी सहमति की घोषणा कर सकते हैं अथवा उस पर अपनी सहमति को रोक सकते हैं। बशर्ते:

  1. यदि संदर्भित विधेयक धन विधेयक नहीं होता है तो राष्ट्रपति, राज्यपाल के लिए, अथवा राज्य के विधानमंडल को, जैसा भी मामला हो, अनुच्छेद 200 में उल्लखित प्रावधान के मुताबिक संदेश के साथ विधेयक को वापस करने का निर्देश देता है।
  2. जब इस प्रकार कोई विधेयक लौटाया जाता है, तो संदेश की प्राप्ति की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर सदन द्वारा इस पर पुनर्विचार किया जाएगा और, यदि इस विधेयक को दोबारा संशोधन के सहित अथवा बिना संशोधन के विधानमंडल द्वारा पारित किया जाता है, तो इसे पुनः राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजा जाएगा।
  3. यदि राज्य-विधायिका विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति के लिए दोबारा भेजती है, तो राष्ट्रपति उस पर सहमती देने के लिए बाध्य नहीं होता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महाराष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना

हाल ही में, मंत्रिमंडल द्वारा राज्य में एक अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु एक मसौदा विधेयक को मंजूरी प्रदान की गयी है।

  1. यह विश्वविद्यालय पुणे में स्थापित किया जाएगा।
  2. अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में शारीरिक और खेल शिक्षा, खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रशासन, खेल प्रबंधन, खेल मीडिया और संचार, और खेल कोचिंग और प्रशिक्षण सहित विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।

 

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