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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

राजनीतिक दलों का पंजीकरण

G.S. Paper-II 

संदर्भ:

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms- ADR) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार:

  1. वर्ष 2018-19 के लिए, कुल 2,301 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से मात्र 78 दलों (3.39%) की अंशदान रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
  2. वर्ष 2017-18 के लिए, मात्र 82 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (56%) द्वारा, अंशदान रिपोर्ट संबंधित राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर अपलोड की गयी हैं।
  3. पिछले 10 वर्षों में, इन दलों की संख्या में दो गुना वृद्धि हुई है। इनकी संख्या वर्ष 2010 में 1,112 थी जोकि वर्ष 2019 में 2,301 हो चुकी थी।

‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’:

  • जिन राजनीतिक दलों के लिए विधानसभा चुनावों अथवा आम चुनावों में राज्य पार्टी बनने हेतु आवश्यक मत-प्रतिशत हासिल नहीं हो पाता है, या जो राजनीतिक दल पंजीकृत होने के बाद से कभी भी चुनाव नहीं लड़े हैं, अथवा नए पंजीकृत राजनीतिक दलों को ‘गैर-मान्यता प्राप्त दल’ (Unrecognised Political Parties) माना जाता है।
  • इन दलों के लिए, ‘मान्यता प्राप्त दलों’ को प्राप्त होने वाली सभी सुविधाओं अथवा लाभ नहीं मिलता है।

भारत में ‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’:

वर्तमान में, भारत के निर्वाचन आयोग में 2,360 राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमे से 2,301 दल अर्थात 97.50% दल ‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’ हैं।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण:

  • राजनीतिक दलों का पंजीकरण ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act), 1951 की धारा 29A के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है।
  • किसी राजनीतिक दल को पंजीकरण कराने हेतु अपने गठन के 30 दिनों के भीतर उपरोक्त धारा के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’, 1951 की धारा 29A  द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग दिशा-निर्देश जारी करता है

भारत के ‘राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु किन्ही भी चार अथवा अधिक राज्यों में होने वाले आम चुनावों अथवा विधानसभा चुनावों में होने वाले कुल मतदान के न्यूनतम छह प्रतिशत वैध मतों को हासिल करना अनिवार्य होता है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए किसी भी राज्य अथवा राज्यों से लोकसभा में न्यूनतम चार सीटों पर विजय प्राप्त करना चाहिए।
  3. राजनीतिक दल द्वारा, लोकसभा चुनावों में कुल लोकसभा सीटों की 2 प्रतिशत (543 सदस्य की वर्तमान संख्या में से 11 सदस्य) सीटों पर जीत हासिल की गयी हो तथा ये सदस्य कम-से-कम तीन अलग-अलग राज्यों से चुने गए हों।

‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु, राज्य में हुए लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में होने वाले मतदान के कुल वैध मतों का न्यूनतम छह प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए संबंधित राज्य की विधान सभा में कम से कम दो सीटों पर जीत हासिल होनी चाहिए।
  3. राजनीतिक दल के लिए, राज्य की विधानसभा के लिये होने वाले चुनावों में कुल सीटों का 3 प्रतिशत अथवा 3 सीटें, जो भी अधिक हो, हासिल होनी चाहिए।

लाभ:

  1. ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को, संबंधित राज्य में अपने उम्मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्त होता है। और, ‘राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को पूरे भारत में अपने उम्मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्त होता है।
  2. मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को नामांकन-पत्र दाखिल करते वक़्त सिर्फ एक ही प्रस्तावक की ज़रूरत होती है। साथ ही, उन्हें मतदाता सूचियों में संशोधन के समय मतदाता सूचियों के दो सेट नि:शुल्क पाने का अधिकार भी होता है तथा आम चुनाव के दौरान इनके उम्मीदवारों के लिए मतदाता सूची का एक सेट नि:शुल्क प्रदान की जाती है।
  3. इनके लिए, आम चुनाव के दौरान उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा प्रदान की जाती है।
  4. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए आम चुनाव के दौरान स्टार प्रचारकों (Star Campaigner) की यात्रा का खर्च उस उम्मीदवार या दल के खर्च में नहीं जोड़ा है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘परिवार पहचान पत्र’ योजना

यह हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गयी एक विशिष्ट पहचान पत्र योजना है।

  1. इसके तहत हरियाणा आवासीय पते वाला कोई भी परिवार योजना के अंतर्गत नामांकन कर सकता है।
  2. इस योजना के अंतर्गत हरियाणा में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार को एक आठ अक्षरांकीय (eight-digit alpha numeric) ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) प्रदान किया जाएगा।
  3. एक ‘पंजीकरण पहचान पत्र’ उन लोगों को भी प्रदान किया जाएगा, जो हरियाणा में निवास करते है, किंतु निवास हेतु आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
  4. अब तक, सरल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही 110 से अधिक सेवाओं और योजनाओं को पीपीपी योजना से जोड़ा जा चुका है।

 

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