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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

रक्षा अधिग्रहण परिषद्

6th July, 2020

(G.S. Paper-III)

रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने भारतीय सैन्य बलों के लिए रक्षा सामान सहित मिग-29 और सुखोई लडाकू विमानों की अधिग्रहण को स्वीकृति दी है.इसके तहत आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए विभिन्न प्लेटफार्मों के अंतर्गत 38 हजार 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है.

उनमें भारतीय उद्योगों से 31 हजार 130 करोड़ रुपये तक की खरीद शामिल है. भारतीय वायुसेना की लम्बे समय से महसूस की जा रही लड़ाकू दस्ते को बढ़ाने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए परिषद् ने 21 मिग-29 की खरीद के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है.

इसके अलावा मौजूदा 59 मिग-29 विमान के उन्नयन और 12 सुखोई-30 एमकेआई विमानों की खरीद को भी स्वीकृति दे दी गई है.

रक्षा अधिग्रहण परिषद्

  • 2001 में रक्षा अधिग्रहण परिषद् (DAC) की स्थापना सैनिक सामग्रियों के क्रय की गति को बढ़ाने और उसमें भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए भारत सरकार द्वारा की गई थी. इसके अध्यक्षरक्षा मंत्री होते हैं.
  • DAC का उद्देश्य सेना के लिए आवश्यक उपकरणों के क्रय का समयसीमा के अंदर निष्पादन करना है. इसके लिए यह बजट में किये गये आवंटन का आदर्शतम उपयोग करती है. विदित हो कि सरकार सेना की शक्ति को बढ़ाने के लिए समय-समय पर धनराशि की व्यवस्था करती है.
  • DAC अधिग्रहण के लिए नीतिगत मार्गनिर्देश देती है. यह अधिग्रहण दीर्घकालिक क्रय योजना पर आधारित होता है. यह सभी प्रकार के अधिग्रहण का काम करती है. ये अधिग्रहण आयातित सामग्रियों एवं स्वदेशी दोनों प्रकार की रक्षा सामग्रियों से सम्बन्धित हो सकते हैं.

उद्देश्य-

रक्षा खरीद परिषद् का उद्देश्य सशस्त्र बलों की अनुमोदित आवश्यकताओं की निर्धारित समय-सीमा के भीतर और आवंटित बजटीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके, शीघ्र खरीद सुनिश्चित करना है.

कार्य-

यह दीर्घावधि अधिग्रहण योजनाओं के लिए नीतिगत दिशानिर्देश तैयार करता है. यह सभी प्रकार की रक्षा खरीद के लिए मंजूरी प्रदान करता जिसमें विदेशी आयात के साथ-साथ स्वदेश निर्मित रक्षा साजो-सामान भी शामिल है.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का रिपोर्ट

(G.S. Paper-II)

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund – UNFPA) द्वारा हाल ही में एक प्रतिवेदन में कहा गया है कि हर साल लाखों लड़कियों को ऐसी प्रथाओं का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से क्षति पहुँचती है, और उनके परिवारों, दोस्तों व समुदायों की इस स्थिति की जानकारी होती है और उनकी सहमति भी.

रिपोर्ट से सम्बंधित मुख्य तथ्य-

  • तथाकथित ख़ानदान या परिवार के सम्मान (प्रतिष्ठा)के नाम पर अपराधों से लेकर दहेज सम्बन्धीहिंसा तक, कम से कम 19 हानिकारक प्रथाएँ मानवाधिकार उल्लंघन मानी जाती हैं.
  • इस रिपोर्ट में तीन सबसे अधिक प्रचलित प्रथाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है: बाल विवाह, पुत्र वरीयता और लिंग पक्षपाती सैक्स चयन व महिला जननांग विकृति (महिला ख़तना).
  • पुत्र होने की इच्छा (पुत्रों को प्राथमिकता) और लिंग-पक्षपातपूर्ण सैक्स चयन के परिणामस्वरूप दुनिया भर में 14 करोड़ 20 लाख से ज़्यादा लड़कियाँ गायब हो गई हैं.
  • रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक 3 अरब 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश करने से इन दो हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करके अनुमानित 8 करोड़ 40 लाख लड़कियों की परेशानियों का अन्त किया जा सकता है.

भारत की स्थिति

  • गर्भ में लिंग पक्षपाती सैक्स चयन (लड़कियों के बजायलड़कों को वरीयता) के चलन की वजह से भारत में वर्ष 2013-17 के बीच, प्रत्येक वर्ष लगभग 4 लाख 60 हज़ारलड़कियाँ जन्म से पहले ही मौत का शिकार हो गईं. लिंग-पक्षपाती चयन के कारण केवल चीन (50%) और भारत (40%) में ही दुनियाभर के 90 प्रतिशत यानि कुल मिलाकर 1 करोड़ 20 लाख लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देने के मामले होते हैं.
  • हालाँकि बाल विवाह जैसी कुछ हानिकारक प्रथाएँ उन देशों में जारी रही हैं, जहाँ वो पहले सबसे अधिक प्रचलित थीं. उदाहरण के लिए, 2005-06 में भारत में बाल विवाह में 47 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी देखी गई, वहीं 2015-16 में 27 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को समर्थन देती अर्थव्यवस्थाएँऔर क़ानूनी प्रणालियाँ इस तरह पुनर्गठित की जानी चाहिएकि हर महिला को समान अवसर की गारण्टी मिले.

किसान योजनाओं के लिए आधार बेस्ड डाटाबेस

(G.S. Paper-II)

चर्चा में क्यों ?

केंद्र सरकार अपनी सभी कृषि प्रधान योजनाओं को डिजिटल बनाने और किसानों को सीधे खरीद मूल्य का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आधार-बेस्ड डाटाबेस लॉन्च करने की योजना बना रही है.

अधिकारियों के अनुसार, डाटाबेस लाभार्थियों की भूमि के नक्शे की भी मैपिंग करेगा और इसमें देश के नौ राज्यों के 50 मिलियन किसानों का विवरण होगा. इस डाटाबेस के 30 जून तक पूरा होने की उम्मीद है.

आधारबेस्ड डाटाबेस के बारे में:

इस डाटाबेस में व्यक्तिगत कृषिभूमि की एक उपग्रह इमेजिंग होगी ताकि किसानों को उनकी भूमि और उनके द्वारा उगाई जाने वाली फसल के आधार पर सलाह दी जा सके.

प्रधानमंत्री किसान योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने बताया कि उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से नवीन साधन विकसित करने के लिए कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ यह डाटाबेस साझा किया जा सकता है.

यह डाटाबेस अधिकृत किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

शहरी वन

शहरी वन क्या हैं?

  • शहरी वन नगरीय अवसंरचना के साथ वृक्षों के रोपण, रख-रखाव, देखभाल और संरक्षण के रूप में परिभाषित किया जाता है. इसमें शहरी नियोजन में नगरीय अवसंरचना के साथ पेड़ों की भूमिका    पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
  • शहरी वन के रूप में एक घने जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को शहर के मध्य छोटे क्षेत्र में बनाया जाता है. बहु-स्तरीय वनों में झाड़ियाँ, छोटे से मध्यम आकार के पेड़ और लम्बे पेड़ होते हैं जिन्हें          बड़ी सावधानी से परिधीय और कोर प्लांट समुदायों के रूप में लगाया जाता है.
  • शहरी वन एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र है जो पक्षियों, मधुमक्खियों, तितलियों और ऐसे ही अन्य सूक्ष्म जीव-जंतुओं के लिए निवास स्थान बन सकता है. यह फसलों और फलों के परागण के लिए     और एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में आवश्यक है.
  • शहरी वन शहरों के फेफड़ों के रूप में कार्य करेंगे और मुख्य रूप से शहर की वन भूमि पर या स्थानीय शहरी निकायों द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य खाली जगह इनको स्थापित किया जायेगा.

 

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