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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

यूरोपीय संघ

G.S. Paper-II

संदर्भ-

हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ ने मिलकर बहुपक्षीय व्यवस्था को और दृढ बनाने पर सहमति जताई है.

दोनों ही पक्षों ने यह माना है कि “आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुपक्षीयवाद की अधिक आवश्यकता है.” ज्ञातव्य है कि यूरोपीय संघ के साथ दृढ़ संबंध बनाने से भारत को विनिर्माण में सहायता के साथ-साथ निर्यात में भी मदद मिल सकती है.

यूरोपीय संघ-

  1. यूरोपियन यूनियन यूरोपीय देशों का राजनैतिक व आर्थिक संगठन है. इसका विकास विभिन्न स्तरों पर हुआ है अर्थात यूरोपीय संघ की स्थापना किसी एक समझौते या संधि द्वारा नहीं बल्कि विभिन्न संधिओं तथा उनमे संशोधन के बाद हुई है. इसके विकास में “पेरिस की संधि (1951)”,”रोम की संधि (1957)”,  “मास्त्रिच की संधि (1993)” तथा “लिस्बन की संधि (2009)” का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
  2. वर्तमान में ब्रिटेन के यूनियन से बाहर हो जाने के बाद इसके केवल 27 सदस्य रह जायंगे. यूरोपियन यूनियन ने यूरोपीय देशों के राजनितिक व आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे यह संगठन विश्व की लगभग 22% अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है. यूरोपियन यूनियन की अपनी संसद, आयोग, मंत्रिपरिषद, परिषद्, न्यायालय तथा केंद्रीय बैंक है जिन्हें यूनियन के प्रमुख अंग भी कहा जाता है.
  3. यूरोपीय संघ की सांझी मुद्रा (Currency) यूरो (Euro) है जिसे यूनियन के केवल 19 सदस्य देशों द्वारा ही अपनाया गया है. शेनजेन संधि (1985) के द्वारा यूनियन ने अपने सदस्य देशों के नागरिकों को बिना पासपोर्ट के यूरोप के किसी भी देश में भ्रमण करने का अधिकार दिया. हालाँकि यह अधिकार कुछ सदस्यों को देर से भी दिया गया जैसे रोमानिया और बुल्गारिया जो यूनियन के सदस्य 2007 में बने किन्तु 2014 तक उन्हें यह अधिकार प्राप्त नहीं था परन्तु नार्वे, स्वीडन तथा आइस्लैण्ड को यूनियन का सदस्य न होते हुए भी यह अधिकार प्राप्त है. यूनियन में भिन्न-भिन्न संधिओं तथा संधिओं में संशोधन द्वारा विभिन्न बदलाव किये गए हैं जिसमें से मास्त्रिच की संधि प्रमुख है जिसके द्वारा यूरोपीय समुदाय (European Society) का नाम बदलकर यूरोपियन यूनियन (European Union) कर दिया गया. इसकी राजधानी ब्रिसेल्स में है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार-

  1. आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम और बजट 2021-22 में आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने एवं आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए निर्यात पर बल दिया गया है. आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए भारत को यूरोपीय संघ (EU) जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ निवेश शुल्क और आयात शुल्क की चरण-वार कटौती के माध्यम से, आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देना होगा.
  2. भारत की यूरोपीय संघ और पश्चिमी यूरोप में 39.9 बिलियन डॉलर की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता(अप्रयुक्त निर्यात क्षमता का अर्थ -जब निर्यातक जागरूकता की कमी या कठिनाई के चलते उपभोक्ता की वरीयताओं या आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य नहीं कर पाता) है.
  3. निर्यात क्षमता वाले शीर्ष उत्पादों में परिधान, रत्न और आभूषण, रसायन, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और प्लास्टिक आते हैं. भारत इन उत्पादों में से कई के लिए यूरोपीय संघ के सामान्यीकृत प्रणाली वरीयता (सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली के अंतर्गत विकसित देश विकासशील देशों को बाज़ार में कुछ शर्तों के साथ न्यूनतम शुल्क या शुल्क मुक्त प्रवेश देते हैं) से लाभान्वित होता है. वास्तव में, भारत यूरोपीय संघ के जीएसपी (Generalised Scheme of Preferences – GSP) के प्रमुख लाभार्थियों में से एक है.GSP के तहत भारत ने वर्ष 2019 में लगभग 19.4 बिलियन डॉलर निर्यात किया है. भारत का लगभग 37% व्यापारिक निर्यात यूरोपीय संघ को किया जाता है.
  4. हालाँकि, ऐसे कई उत्पाद हैं जहाँ भारत की यूरोपीय संघ में निर्यात क्षमता है, लेकिन ये “ग्रेजुएटेड”( Graduated) हैंया यूरोपीय संघ के जीएसपी के अंतर्गत “ग्रेजुएशन” (Graduation) के कगार पर हैं. ग्रेजुएशन का अर्थ है कि जीएसपी लाभार्थी देश अपने विशिष्ट उत्पादों के विशेष समूहों का निर्यात नहीं कर पाता है, जबकि उस देश से उत्पादों के अन्य समूहों के आयात को प्राथमिकता दी जाती है.
  5. भारत के उत्पाद जैसे कपड़ा, अकार्बनिक और कार्बनिक रसायन, रत्न और आभूषण, लोहा, इस्पात और उनसे निर्मित वस्तुएँ, बेस मेटल्स और मोटर वाहन जैसे उत्पाद पूर्व से ही जीएसपी लाभों के दायरे से बाहर हैं.
  6. वर्ष 2019 में परिधान में, यूरोपीय संघ के लिए भारत का निर्यात 7 बिलियन डॉलर था.इस बीच भारत को बांग्लादेश जैसे परिधान निर्यात देश से कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है, बांग्लादेश भी यूरोपीय संघ से जीएसपी टैरिफ का लाभ ले रहा है. एक अन्य प्रतियोगी देश वियतनाम ने 2019 में यूरोपीय संघ के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) संपन्न किया.
  7. आज की तिथि में यूरोपीय संघ के साथ भारत को अपने निवेश संबंधों को मजबूत बनाने की आवश्यकता है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

हज़ारा जातीय समूह

  1. ये मध्य अफगानिस्तान में एक फ़ारसी भाषी जातीय समूह हैं, और मुख्य रूप से हज़ाराजत (Hazarajat) पहाड़ी क्षेत्र में रहते हैं।
  2. हज़ारा जातीय समूह को अफ़ग़ानिस्तान के सबसे उत्पीड़ित समूहों में से एक माना जाता है।

 

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