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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

यूएई पहला परमाणु ऊर्जा उत्पादक खाड़ी देश बना

6th August, 2020

G.S. Paper-III (Environment)

 

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करने वाला अरब दुनिया का पहला देश बन गया है. 1 अगस्त, 2020 को एक घोषणा में यह पुष्टि की गई थी कि अबू धाबी स्थित  परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 1 अब चालू हो गई है.
  • बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 1 अब परमाणु ईंधन का उपयोग ‘जीवन शक्ति’ चरण के हिस्से के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए कर रही है. इसे 31 जुलाई को शुरू किया गया था. इस परमाणु रिएक्टर को पावर ग्रिड से जोड़ा जाएगा जो आगामी परीक्षण चरण के दौरान बिजली प्रदान करेगा.
  • इस परमाणु रिएक्टर का वाणिज्यिक संचालन इस साल के अंत में शुरू होने की उम्मीद है. परमाणु ऊर्जा से पूरे देश में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने के माध्यम से बिजली व्यवसायों और घरों की मदद करने की आशा जताई जा रही है.

 

महत्व

यूएई का उद्देश्य चार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को संचालित करना है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों का एक-चौथाई हिस्सा सुरक्षित, विश्वसनीय और उत्सर्जन-मुक्त तरीके से प्रदान करेंगे.

 

बाराकाह परमाणु संयंत्र

  • बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूएई का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र है.
  • इस पावर प्लांट में चार इकाइयां शामिल होंगी जो कुल 5,600 मेगावाट ऊर्जा की आपूर्ति करेंगी. इससे देश की ऊर्जा जरूरतों का 25 फीसदी हिस्सा हासिल करने के लिए पर्याप्त बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है.
  • इस पावर प्लांट के संचालन से प्रत्येक वर्ष 21 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने में भी मदद मिलेगी, जो हर साल सड़कों से 3.2 मिलियन कारों को हटाने के बराबर है. वर्तमान में यूएई की अधिकांश ऊर्जा जरूरतें गैस से चलने वाले बिजली संयंत्रों और कुछ सौर क्षेत्रों से पूरी होती हैं.
  • इस पावर प्लांट का निर्माण कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (KEPCO) के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है.
  • इस पावर प्लांट का लगभग 94 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है. जबकि 2 रिएक्टर तैयार हैं, तीसरा 92 प्रतिशत पूर्ण है और चौथा और अंतिम 85 प्रतिशत पूर्ण है.

 

पृष्ठभूमि

  • यूएई पहला ऐसा खाड़ी देश है और वैश्विक स्तर पर 33 वां देश है जिसने सुरक्षित, स्वच्छ और विश्वसनीय बेस लोड बिजली बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा बिजली संयंत्र विकसित किया है. इस देश ने वर्ष 2008 में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम स्थापित करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं का खुलासा किया था और इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण में एक दशक से अधिक समय लगा है.
  • यूएई के अलावा, दुनिया के शीर्ष कच्चे तेल निर्यातक सऊदी अरब ने भी परमाणु ऊर्जा हासिल करने की अपनी योजना को तीव्र कर दिया है. दो परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए बोली लगाने के लिए अरब राष्ट्र को अगले महीने कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रीक्वालिफाई करने की उम्मीद है.

 

 

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सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019

(Code on Social Security, 2019)

 

G.S. Paper-II (National)

 

संदर्भ

  • हाल ही में, श्रम संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा  सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट पेश की गयी है।
  • लोक सभा द्वारा, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 के परीक्षण के लिए पिछले वर्ष दिसंबर में बीजू जनता दल के वरिष्ठ सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता में श्रम संबंधी संसदीय स्थायी समिति का गठन किया गया था।

 

समिति की मुख्य सिफारिशें

  1. नियोजन की समाप्ति के बाद कर्मचारी को ग्रेच्युटी (Gratuity) भुगतान की समय सीमा वर्तमान पांच साल की निरंतर सेवा से घटाकर एक साल की जानी चाहिए।
  2. ग्रेच्युटी से संबंधित प्रावधान, सभी प्रकार के कर्मचारियों, जैसे ठेका मजदूर, आवधिक कामगार, नियतकालिक श्रमिक, तथा दैनिक / मासिक वेतन कर्मचारी आदि तक विस्तृत किये जाने चाहिए।
  3. ‘अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों’ को संहिता में एक अलग श्रेणी के रूप में उल्लिखित किया जाना चाहिए।
  4. अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष रूप से एक कल्याण कोष गठित किया जाना चाहिए। इस कोष में, श्रमिकों के मूल राज्यों, रोजगार देने वाले राज्यों, ठेकेदारों, प्रमुख नियोक्ताओं तथा पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों द्वारा आनुपातिक रूप से योगदान किया जाना चाहिए।
  5. इस कोष का उपयोग विशेष रूप से उन श्रमिकों / कर्मचारियों के लिए किया जाना चाहिए, जो किसी अन्य कल्याणकारी सहायता के अंतर्गत रक्षित नहीं हैं।
  6. पंजीकृत प्रतिष्ठानों, प्रवासी श्रमिकों तथा भवन एवं अन्य विनिर्माण श्रमिकों के डेटाबेस के लिए एक केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाना चाहिए।
  7. पंजीकरण: कृषि, गैर-कृषि, आनुबंधिक कार्यो, तथा स्व-रोजागर सहित सभी प्रतिष्ठानों के श्रमिकों को विभिन्न संगठनों के स्थान पर एक निकाय के तहत पंजीकृत कराना आवश्यक किया जाना चाहिए। यह निकाय देश में सभी प्रकार के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा हेतु उत्तरदायी होगा।
  8. सहिंता में राज्यों के मध्य भवन एवं विनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष की पोर्टेबिलिटी के लिए एक सक्षम प्रणाली को सम्मिलित किया जाना चाहिए, जिससे लाभार्थियों को किसी भी राज्य में धनराशि का भुगतान किया जा सके।

 

 

पृष्ठभूमि

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 को पिछले वर्ष दिसंबर माह में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, किंतु इसके कुछ प्रमुख प्रावधानों पर विशेष चिंताएं उठाई गईं, जिसके कारण विधेयक को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था।
  • यह संहिता, सामाजिक सुरक्षा से संबंधित वर्तमान में लागू नौ कानूनों को प्रतिस्थापित करेगी और इसका उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा एवं संबंधित मुद्दों से संबंधित कानूनों में संशोधन तथा उनका समेकन करना है।

 

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शिक्षा पर महामारी के प्रभाव पर संयुक्त राष्ट्र की नीति

(United Nation’s policy brief on the pandemic’s impact on education)

 

G.S. Paper-II (International)

 

 

सन्दर्भ

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शिक्षा पर महामारी के प्रभाव पर अपनी नीति के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी है।

 

नीति की मुख्य बातें

  1. महामारी के कारण शिक्षा प्रणालियों में अव्यवस्था होने से संपूर्ण विश्व में 6 बिलियन से अधिक शिक्षार्थी प्रभावित हुए हैं।
  2. असमानताओं में वृद्धि:महामारी ने विश्व भर में व्याप्त असमानताओं को और अधिक बढाया है, निम्न-आय वर्ग वाले देशों में गरीब और निर्बल आबादी सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  3. स्कूल से बाहर:COVID-19 के कारण आर्थिक गिरावट होने के कारण लगभग 24 मिलियन बच्चों के समक्ष अगले साल स्कूल में नहीं लौट सकने का संकट है।
  4. महामारी से लड़कियों तथा युवा महिलाओं के असंगत रूप से प्रभावित होने की आशंका हैक्योंकि स्कूल बंद होने से इनके सामने बाल विवाह, शीघ्र गर्भधारण तथा लैंगिक हिंसा आदि का संकट हो सकता है।
  5. सीखने की क्षमता पर प्रभाव:जो शिक्षार्थी महामारी के बाद स्कूल जाने में सक्षम होंगे, उन्हें भी, विशेष रूप से प्रारंभिक कक्षाओं के छात्रों को, सीखने की क्षमता फिर से विकसित करनी पड़ सकती है।

 

महामारी का कुल प्रभाव

  • अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम(Programme for International Student Assessment– PISA) में भाग लेने वाले विकासशील देशों पर अध्ययन से निम्नलिखित संकेत मिलते है:
  • सीखने पर प्रभाव:लगभग तीन महीने स्कूलों के बंद रहने से कक्षा-3 के बच्चों की सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, यदि इनके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गयी तो, इनमे से 72% छात्र तक पिछड़े रहेंगे अथवा स्कूल छोड़ देंगे या कुछ भी सीखने में सक्षम नहीं होंगे।
  • आर्थिक हानि:महामारी के कारण किसी छात्र के शैक्षिणक रूप से अक्षम हो जाने से उसके द्वारा अपने जीवनकाल में की जाने वाली संभावित कमाई के रूप में लगभग 16,000 डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर गणना करने पर 10 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • वित्तीय अंतर में वृद्धि:2020 की शुरुआत में, अल्प और मध्यम आय वाले देशों में शिक्षा बजट और गुणवत्ता युक्त शिक्षा संबंधी सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए उपलब्ध धन के बीच $ 148 बिलियन का अंतर था। COVID-19 संकट से इस वित्तीय अंतराल में तीन गुना तक वृद्धि होने की संभावना है।

 

आगे की राहशिक्षा बजट को संरक्षित करने और बढ़ाने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के प्रयासों, ऋण प्रबंधन और प्रोत्साहन पैकेजों से लेकर वैश्विक मानवीय अपील और आधिकारिक विकास सहायता तक सभी स्तरों पर शिक्षा के केंद्र में रखना आवश्यक है।

 

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

 

अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र

 

अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र कौन हैं?

  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में उन उद्योगों को रखा जाते है जो देश की अर्थव्यवस्था रीढ़ होते हैं तथा इनकी विकास दर में कमी या बढ़ोतरी बताती है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद की परिस्थिति कैसी है?
  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में अधिकतर ऐसे उद्योगों को सम्मिलित किया जाता है जिनके स्थापना से अन्य उद्योगों की स्थापना का आधार बनती है.
  • अधिकाँश देशों में विशेष उद्योग स्थापित हैं जो अन्य सभी उद्योगों की रीढ़ (Backbone) माने जाते हैं तथा कोर उद्योग होने के योग्य प्रतीत होते हैं.
  • आठ प्रमुख उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं.
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में इन आठ उद्योगों की हिस्सेदारी 40.27 प्रतिशत है.

 

भार के घटते क्रम में आठ कोर उद्योग

  1. रिफाइनरी उत्पाद – 28.04%
  2. बिजली – 19.85%
  3. स्टील – 17.92%
  4. कोयला – 10.33%
  5. कच्चा तेल – 8.98%
  6. प्राकृतिक गैस – 6.88%
  7. सीमेंट – 5.37%
  8. उर्वरक – 2.63%

 

 

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