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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

म्यांमार में सेना द्वारा तख्तापलट

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, म्यांमार के सेना ने नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की’ की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ तख्तापलट कर दिया है।

सेना का कहना है, कि नेताओं को ‘चुनावी धोखाधड़ी’ की प्रतिक्रिया स्वरूप हिरासत में लिए गया है।

सैन्य तख्तापलट का भारत के लिए निहितार्थ:

भारत के लिए, म्यांमार की सेना ‘तातमाडॉ’ (Tatmadaw) द्वारा सैन्य शासन की वापसी और आंग सान सू की तथा नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी (NLD) के राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी, 30 साल पहले की घटनाओं का दोहराव है।

भारत की अगली प्रतिक्रिया:

भारत की प्रतिक्रिया इस बार अलग होने की संभावना है। भारत म्यांमार में लोकतंत्र की परवाह करता है और इसका महत्व जानते हुए भी वह सैन्य तख्तापलट का विरोध करने का जोखिम नहीं उठा सकता है। क्योंकि:

  1. म्यांमार की सेना के साथ भारत के सुरक्षा संबंध प्रगाढ़ हो चुके हैं, और भारत के लिए, उत्तर पूर्वी सीमाओं को विद्रोही समूहों से सुरक्षित करने में म्यांमार सेना की सहायता की जरूरत को देखते हुए ‘रिश्तों के पुल’ को जलाना मुश्किल होगा।
  2. आंग सान सू कीकी छवि में बदलाव:लोकतंत्र की प्रतीक और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के रूप में सुश्री ‘सू की’ की छवि उनके कार्यकाल के दौरान काफी धूमिल हो चुकी है। वर्ष 2015 में अपने कार्यकाल में सुश्री सू की सेना रखाइन राज्य में रोहिंग्या समुदाय पर नृशंसता करने से रोकने में विफल रहीं और उन्होंने इस मामले से सेना का बचाव भी किया था।
  3. चीन के लिए लाभ:अमेरिका की तरह भारत की कठोर प्रतिक्रिया से मुख्यतः चीन को लाभ होगा। अमेरिका ने, सेना द्वारा किये गए कब्जे को समाप्त नहीं करने पर, “तख्तापलट” के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है।
  4. रणनीतिक चिंताओं के अलावा, भारत ने म्यांमार में कई अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं में निवेश किया है। भारत इन परियोजनाओं के लिए ‘आसियान देशों तथा पूर्व के प्रवेश द्वार’ के रूप में   देखता है (उदाहरणार्थ: भारतम्यांमारथाईलैंडत्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान बहुमोडल पारगमन परिवहन नेटवर्क, सीटवे डीप वाटर पोर्ट (Sittwe deep-water port) पर एक विशेष आर्थिक क्षेत्र परियोजना)।
  5. इसके अलावा, भारत के लिए अभी भी बांग्लादेश में पलायन करने वालेरोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे को सुलझाने में मदद करने की उम्मीद है, और इस विषय पर म्यांमार सरकार से वार्ता जारी रखना चाहेगा। भारत में भी कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों ने पलायन किया है।

म्यांमार का सैन्य संविधान:

म्यांमार में सेना द्वारा वर्ष 2008 में एक संविधान का मसौदा तैयार किया गया था, और इसी वर्ष अप्रैल में इस पर संदेहास्पद जनमत संग्रह कराया गया था।

  1. यह संविधान, सेना द्वारा तैयार किया गया ‘लोकतंत्र का रोडमैप’ था, जिसे सेना ने पश्चिमी देशों के दबाव के कारण निर्मित किया था।
  2. इसके अलावा, सैन्य शासन के लिए यह अहसास भी हो चुका था कि म्यांमार को बाहरी दुनिया के लिए खोलना अब एक विकल्प नहीं बल्कि एक गंभीर जरूरत भी है।
  3. लेकिन सेना ने संविधान में अपनी भूमिका और राष्ट्रीय मामलों में वर्चस्व को सुनिश्चित कर लिया था।
  4. संविधान के प्रावधानों के तहत, संसद के दोनों सदनों में 25 प्रतिशत सीटें सेना के लिए आरक्षित की गयी है, जिन पर सैन्य अधिकारियों को नामित किया जाता है।
  5. साथ ही, एक प्रतिनिधि राजनीतिक दल का गठन किया गया जो सेना की ओर से चुनावों में भाग लेता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सिगुर का पठार

(Sigur Plateau)

  1. हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के माध्यम से एक हाथी गलियारे को अधिसूचित करने के तमिलनाडु सरकार के अधिकार को बरकरार रखा.
  2. यह गलियारा पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील सिगुर पठार में मसिनागुड़ी क्षेत्र में स्थित है.
  3. सिगुर का पठार तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के उत्तरी भाग में स्थित है.
  4. यह पठार पश्चिमी और पूर्वी घाट को जोड़ता है.
  5. इसके दक्षिण-पश्चिम की ओर नीलगिरी की पहाड़ियाँ तथा इसके उत्तर-पूर्वी भाग में मोयार नदी घाटी अवस्थित है.

 

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