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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

मेघालय की अल्पसंख्यक जनजातियाँ

समाचार में क्यों?

हाल ही में मेघालय सरकार ने ‘अनारक्षित जनजातियों (Unrepresented Tribes) को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के प्रावधानों से बाहर करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • पाँच अल्पसंख्यक जनजातियों- बोडो-कछारी, हाज़ोंग, कोच, मान तथा राभा को मेघालय की स्वायत्त आदिवासी परिषदों में ‘अनारक्षित जनजातियों के रूप में नामांकित किया गया है।
  • ये आदिवासी परिषदें गारो, खासी तथा जयंतिया जनजातियों के नाम पर आधारित हैं, जो राज्य के तीन प्रमुख मातृसत्तात्मक समुदाय हैं।
  • 26 सितंबर, 2019 को मेघालय राज्य सरकार द्वारा छठी अनुसूची में संशोधन के लिये गठित एक उप-समिति ने संशोधित विशेष प्रावधान से ‘अनारक्षित जनजातियाँ शब्द को हटाने हेतु संसद की स्थायी समिति से सिफारिश करने का निर्णय लिया था।
  • राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन जनजातियों को स्वायत्त ज़िला परिषदों में संवैधानिक अधिकारों तथा प्रतिनिधित्व करने के अवसर से वंचित कर सकता है क्योंकि उनका निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर संभव नहीं होगा।

हाज़ोंग जनजाति (Hajong Tribe):

  • हाज़ोंग जनजाति अधिकांशतः पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों तथा बांग्लादेश में निवास करती है।
  • ये लोग मुख्यतः चावल की खेती करते हैं।
  • यह जनजाति संगोत्री विवाह (Endogamy) का अनुसरण करती है।
  • यह जनजाति हिंदू है तथा हिंदू संस्कारों और रीति-रिवाज़ों का पालन करती है।

राभा जनजाति (Rabha Tribe):

  • यह नेपाल, भूटान, थाईलैंड, म्याँमार और बांग्लादेश तथा भारत के असम, मेघालय एवं पश्चिम बंगाल के मंगोलियाई समुदाय से संबंधित हैं।
  • राभा जनजाति राभा भाषा के अतिरिक्त असमिया भाषा का भी प्रयोग करती है।
  • मेघालय की गारो पहाड़ी के ज़िलों में अधिकतर राभा जनजाति निवास करती है।

कोच जनजाति (Koch Tribe):

  • यह असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश का एक टिबेटो-बर्मन नृजातीय समुदाय (Tibeto-Burman Ethnolinguistic Group) है।
  • इनकी भाषा टिबेटो-बर्मन भाषायी समूह से मिलती जुलती है।
  • 1881 की जनगणना के अनुसार, कोच, बोडो-कछारी समुदाय से संबंधित है।

बोडो-कछारी (Bodo-Kachari):

  • यह पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम में निवास करने वाले कई जातीय समूहों को संबोधित किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है।
  • ये लोग आम तौर पर असमिया और अन्य टिबेटो-बर्मन (Tibeto-Burman) भाषा बोलते हैं।

प्रोग्राम ध्रुव

समाचार में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नवीन शिक्षण कार्यक्रम- ध्रुव (Pradhan Mantri Innovative Learning Programme- ‘DHRUV) का शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री नवीन शिक्षण कार्यक्रम- ध्रुव

  • इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को चिह्नित कर उन्हें देश भर के उत्कृष्ट केंद्रों में प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा परामर्श और शिक्षा प्रदान कर उनकी क्षमता का विकास करना है।
  • इससे छात्र अपनी पसंद के क्षेत्रों में उच्चतम स्तर तक पहुँच सकेंगे।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी क्षमता का एहसास कराना और उन्हे समाज के लिये योगदान देने हेतु प्रेरित करना है।

प्रमुख बिंदु

  • इस कार्यक्रम का नाम ‘ध्रुव’ तारे के नाम पर ‘ध्रुव’ रखा गया है और प्रत्‍येक चयनित छात्र ‘ध्रुव तारा’ कहलाएगा।
  • इस कार्यक्रम में दो क्षेत्र-विज्ञान और कला प्रदर्शन शामिल हैं। इसमें कुल 60 छात्र होंगे, जिसमें से प्रत्येक क्षेत्र में 30 छात्र होंगे।
  • छात्रों का चयन सरकारी और निजी स्कूलों की 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों में से किया जाएगा।
  • यह कार्यक्रम का पहला चरण है जिसका धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों जैसे- रचनात्मक लेखन आदि में विस्तार किया जाएगा।

 

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