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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक, 2021

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक, 2021 लोकसभा में पारित कर दिया गया है। हालाँकि, यह क़ानून 4 नवंबर, 2020 को घोषित किए गए, एक अध्यादेश के माध्यम से पहले से ही लागू है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:

  1. इस विधेयक में, ‘मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम’, 1996 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है, जिसके अंतर्गत (i) कुछ मामलों में दिए गए ‘मध्यस्थता निर्णयों’ पर स्वचालित रूप से ‘रोक’ (Stay) लगाई जा सकेगी और (ii) मध्यस्थों (Arbitrators) के लिए आवश्यक अहर्ता प्रमाणन संबंधी योग्यता, अनुभव और मानदंडों को निर्धारित किया जाएगा।
  2. विधेयक में, ‘धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार से किये जाने वाले मध्यस्थता समझौते अथवा अनुबंधों’के मामले में संबंधित पक्षकारों को ‘मध्यस्थता निर्णय’ के प्रवर्तन पर बिना शर्त ‘रोक’ (Stay) लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।
  3. इसके अलावा, मध्यस्थता अधिनियम की 8 वीं अनुसूची को निरसित कर दिया गया है। 8 वीं अनुसूची में मध्यस्थों (Arbitrators) की आवश्यक अहर्ता के प्रमाणन संबंधी प्रावधान सम्मिलित थे।
  4. विधेयक के अंतर्गत, मध्यस्थता अधिनियम की धारा 36में एक प्रावधान जोड़ा गया है जो 23 अक्टूबर, 2015 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा।
  5. इस संशोधन के अनुसार, यदि न्यायालय संतुष्ट होता है, कि संबंधित मामले में दिया गया ‘मध्यस्थता निर्णय’, प्रथमदृष्टया, ‘धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार से किये जाने वाले मध्यस्थता समझौते अथवा अनुबंधों’ पर आधारित है, तो अदालत अधिनियम की धारा 34 के तहत, प्रदान किये गए ‘मध्यस्थता निर्णय’ पर अपील लंबित रहने तक बिना शर्त रोक लगा देगी।

अधिनियम की धारा 36 में प्रस्तावित संशोधन पर उठाए गए मुद्दे:

  1. हारने वाली पार्टी के लिए भ्रष्टाचार पर आरोप लगाना और ‘मध्यस्थता निर्णय’ के प्रवर्तन पर एक स्वचालित ‘रोक’ (automatic stay) हासिल करना बहुत आसान होगा। इसके बाद, संबंधित पक्षकारों को, अदालत द्वारा मामले के अंतिम निपटान तक, निर्णय लागू होने के लिए इंतजार करना होगा।
  2. इस प्रकार यह संसोधन, पक्षकारों को अदालतों तक लाने और लंबे समय तक मुकदमे में फंसाने के कारण, वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणालीके प्रमुख उद्देश्य को ही समाप्त कर देता है।
  3. क़ानून में ‘धोखाधड़ी / भ्रष्टाचार’ को परिभाषित नहीं किया गया है।
  4. स्वचालित ‘रोक’ (automatic stay) के संदर्भ में, संशोधन अधिनियम के पूर्वव्यापी रूप से (2015 से) लागू होने से मुकदमों की बाढ़ आ सकती है।
  5. इस संशोधन से अनुबंधों के प्रवर्तन पर भी प्रभाव पड़ेगा और अंततः भारत में सुगम व्यापार (ease of doing business)को भी प्रभावित करेगा।

पृष्ठभूमि

अभी तक किसी मध्यस्थता फैसले के खिलाफ कानून की धारा 36 के तहत अपील दायर किए जाने के बावजूद इसे लागू किया जा सकता था। हालांकि, अदालत उपयुक्त शर्तों के साथ इस पर स्थगन दे सकती थी।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

थोलपावाक्कूथु

  1. इसे छाया कठपुतली, निज़लक्कूथु और ओलाक्कूथु भी कहा जाता है।
  2. यह केरल की एक पारंपरिक मंदिर-कला है, जिसका उद्गम पलक्कड़ और पड़ोसी क्षेत्रों में हुआ था।
  3. इस कला में पलक्कड़ के भद्रकाली मंदिरों में रामायण की कथाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
  4. इसमें, एजुपारा, चेंडा और मद्दालम आदि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
  5. इस कला रूप में महारत हासिल करने के लिए कलाकारों को कई वर्षों के कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।
  6. इस कठपुतली का मंचन मंदिर परिसर में कूथुमदम (Koothumadam) नामक एक विशेष मंच पर होता है।

 

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