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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भू-स्थानिक डेटा नीति का उदारीकरण

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, भारत में भू-स्थानिक (Geo-spatial) क्षेत्र हेतु नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से मौजूदा प्रोटोकॉल को रद्द करके इस क्षेत्र को उदार बनाते हुए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

नए दिशानिर्देशों के अंतर्गत:

  1. भू-स्थानिक आंकड़ा (डेटा) क्षेत्र को नियंत्रण-मुक्त किया जाएगा और सर्वेक्षण, मानचित्रण तथा इस क्षेत्र पर आधारित अनुप्रयोगों के निर्माण हेतु पूर्व अनुमोदन जैसे पहलुओं को समाप्त किया जाएगा।
  2. भारतीय संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त किया जायेगा तथा मानचित्रण सहित, भू-स्थानिक आंकड़ों और भू-स्थानिक डेटा सेवाओं को हासिल करने और इनका उत्पादन करने हेतु किसी पूर्व अनुमोदन, सुरक्षा मंजूरी और लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

लाभ:

  1. सरकार का यह कदम, इस क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा सार्वजनिक और निजी संस्थाओं को बराबर का अवसर प्रदान करने में सहायक होगा।
  2. मानदंडों में ढील देने से, उन क्षेत्रों को काफी लाभ होगा, जो उच्च गुणवत्ता वाले मानचित्रण की अनुपलब्धता के कारण अभी तक पिछड़े हुए थे।
  3. यह कदम, नवाचारों को शुरू करने और मापनीय समाधानों का निर्माण करने हेतु देश के स्टार्ट-अप्स, निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों के लिए जबरदस्त अवसर प्रदान करेगा।
  4. इससे रोजगार सृजन भी होगा और आर्थिक विकास को गति भी हासिल होगी।
  5. भारत के किसानों को भी भू-स्थानिक और सुदूर संवेदी आंकड़े का फायदा मिलेगा। आंकड़े से नई प्रौद्योगिकियों और मंचों का उदय हो सकेगा जो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाएंगे।
  6. इस निर्णय से भारत की भू-मानचित्रण क्षमता का उपयोग सभी क्षेत्रों में देश के उच्च लक्ष्य के लिए किया जा सकेगा और इसकी भू-मानचित्रण क्षमता केवल सुरक्षा उद्देश्यों तक सीमित नहीं होगी।

‘भू-स्थानिक डेटा’ क्या होता है?

  1. भू-स्थानिक आंकड़े / डेटा (Geospatial data), उन वस्तुओं, घटनाओं या किसी देखी जाने वाली परिघटनाओं के बारे में आंकड़े होते है, जिनकी पृथ्वी की सतह पर एक अवस्थिति होती है।
  2. यह अवस्थिति, अल्पावधि के लिए किसी सड़क की अवस्थिति या भूकंपीय घटना की तरह स्थिर हो सकती है, अथवा किसी पैदल यात्री या गतिशील वाहन, किसी संक्रामक रोग के प्रसार, जैसी गतिशील हो सकती है।
  3. भू-स्थानिक डेटा, अवस्थिति की जानकारी और उससे संबंधित सूचनाओं (वस्तु, घटना या घटना से संबंधित विशेषताओं) को संयोजित करते हैं। इसके अलावा, अक्सर सामयिक जानकारी अथवा घटना के स्थान और उससे संबद्ध विशेषताओं को भी जोड़ते हैं।

अनुप्रयोग:

भू-स्थानिक आंकड़ों में आमतौर पर सार्वजनिक हितों, जैसे सड़क, इलाका, रेलवे लाइन, जल निकाय और सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी शामिल होती है।

पिछले एक दशक के दौरान, दैनिक जीवन में भू-स्थानिक डेटा के उपयोग में वृद्धि देखी गई है, जैसे कि स्वाइगी या ज़ोमैटो जैसे खाद्य वितरण ऐप, अमेज़ॅन जैसे ई-कॉमर्स तथा मौसम संबंधी ऐप्स में भू-स्थानिक डेटा का उपयोग।

‘भू-स्थानिक डेटा’ संबंधी वर्तमान नीति:

  1. वर्तमान नियमन के तहत, भू-स्थानिक डेटा के संग्रहण, भंडारण, उपयोग, बिक्री, प्रसार और मानचित्रण पर सख्त प्रतिबंध हैं।
  2. यह नीति, कई दशकों से नवीनीकृत नहीं की गयी है तथा इसे आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर तैयार किया गया था।

अभी तक इस क्षेत्र में भारत सरकार और सर्वे ऑफ इंडिया जैसी सरकार द्वारा संचालित एजेंसियों का प्रभुत्व है और निजी कंपनियों को भू-स्थानिक डेटा एकत्र करने, तैयार करने या प्रसारित करने की अनुमति हासिल करने हेतु सरकार के विभिन्न विभागों (जिस तरह के आंकड़ों की जरूरत होती है, उस आधार पर) तथा साथ ही रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय में अनुमति-प्रक्रिया से गुजरना होता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

कार्लपट अभयारण्य, ओडिशा

  1. ओडिशा के कार्लपेट अभयारण्य में एक पखवाड़े के दौरान छह हाथियों की रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया से मृत्यु हो गई।
  2. रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया (Haemorrhagic septicaemia),एक संक्रामक जीवाणु रोग होता है, जो संदूषित जल या मिट्टी के संपर्क में आने वाले जानवरों को संक्रमित करता है।
  3. इसके संक्रमण से जानवरों के श्वसन तंत्र और फेफड़े प्रभावित होते हैं, जिसके कारण गंभीर निमोनिया होता है।
  4. यह बीमारी, आम तौर पर मानसून के ठीक पहले और बाद की अवधि में फैलती है। इससे गाय-बैल, भैंस और अन्य जानवरों को प्रभावित हो सकते है।

 

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