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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भू-जल (Groundwater) संकट वाले राज्यों में अनाज का उत्पादन और व्यापार

G.S. Paper-III

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में भू-जल (groundwater) संकट का सामना कर रहे राज्यों में अनाज (cereals) का उत्पादन और व्यापार अपेक्षाकृत अधिक रहा है।

प्रमुख बिन्दु-

  • भारत और विदेश में स्थित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कृषि उत्पादन ( यथा – अनाज आदि) और उसमें प्रयोग होने वाले जल पर अध्ययन किया है। इस अध्ययन में अनाज के उत्पादन,व्यापार और अनाज के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले जल के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय सहित घरेलू निष्कर्षों व रुझानों के बारे में चर्चा की गयी है।
  • इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने गणितीय मॉडलिंग (mathematical modelling) को अपनाया और वर्ष 2011-12 के डेटा-सेट (data-sets) का इस्तेमाल किया, जिसमें अनाज के अंतरराज्यीय व्यापार (interstate trade of cereals), घरेलू अनाज उत्पादन (domestic cereal production), राज्यों के बीच रेल और सड़क द्वारा परिवहन की लागत (cost of transportation by rail and road between states) आदि की जानकारी थी।
  • इस अध्ययन में अनाज के उत्पादन और परिवहन (producing and transporting cereals) के आधार पर ‘वाटर फुटप्रिंट’ (water footprint) का अनुमान भी लगाया गया है।
  • वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार, गंभीर रूप से कम भूजल भंडार वाले राज्य (States with critically low groundwater reserves) 41% या लगभग6 मिलियन टन भारत के घरेलू अनाज व्यापार (India’s domestic cereal trade) के लिए जिम्मेदार हैं। इन राज्यों ने 41% या लगभग 38.6 मिलियन टन आनाज के उत्पादन और व्यापार में भारत के कुल भूजल (India’s total groundwater) का लगभग 39% हिस्से का उपयोग किया।
  • इसके अलावा, भारत में घरेलू स्तर पर कुल उत्पादित आनाज का 21% (अर्थात6 मिलियन टन) विदेशों में निर्यात ‘सेमीक्रिटिकल’ (semicritical) से लेकर क्रिटिकल (critical) स्टेटस (status) वाले छह राज्यों ने किया। इसके लिए इन राज्यों ने भारत में उपयोग होने वाले कुल भू-जल के 32% हिस्से का इस्तेमाल किया है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की चर्चा-

  • अध्ययन में भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की भी चर्चा की गयी है।
  • इसमें कहा गया है कि भारत में पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) और गैर-पीडीएस अनाज के बीच अंतरराज्यीय व्यापार पैटर्न (interstate trade patterns) में काफी विविधता है।
  • भारत में विभिन्न राज्यों के बीच अधिकतर अनाज का व्यापार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System- PDS ) के माध्यम से हुआ है।
  • भारत में विभिन्न राज्यों के बीच हुए आनाज के अंतरराज्यीय व्यापार पैटर्न (interstate trade patterns) में ग्रीन ब्लू जल (Green and blue water) की भी चर्चा की गयी है। इसमें बताया गया है कि कैसे आनाज के माध्यम से एक राज्य से दूसरे में ग्रीन व ब्लू जल का स्थानांतरण हुआ है।

ग्रीन व ब्लू जल (Green and blue water)-

  • ग्रीन व ब्लू जल (Green and blue water), वर्षा जल की उस मात्रा को संदर्भित करते हैं जो फसल उत्पादन के दौरान खपत होती है और अंतिम फसल उत्पाद (the final crop product) में शामिल होती है।
  • ग्रीन जल (Green water), मृदा में संचित वर्षा जल होता है, जिसे पौधे वाष्पोत्सर्जन (transpiration) क्रिया के दौरान उपयोग करते हैं।
  • जबकि ब्लू जल (blue water), पृथ्वी की सतह पर उपस्थित जल (surface water) और भू-जल(groundwater) को संदर्भित करता है। सिंचित कृषि(irrigated agriculture) में वाष्पोत्सर्जन(transpiration) को बनाए रखने के लिए ब्लू जल (blue water) का उपयोग किया जाता है।

‘वाटर फुटप्रिंट’ (Water footprint)-

  • कृषि क्षेत्र में ‘वाटर फुटप्रिंट’ (water footprint) के तहत फसल उत्पादन में खपत होने वाले जल का पता लगाया जाता है।
  • किसी उत्पाद का ‘वाटर फुटप्रिंट’, उसके उत्पादन में खपत हुए फ्रेशवाटर (freshwater) की कुल मात्रा को दर्शाता है।
  • किसी उत्पाद का वाटर फुटप्रिंट न केवल उपयोग किए गए पानी की कुल मात्रा को संदर्भित करता है; बल्कि यह पानी का उपयोग कब और कहाँ (where and when) हुआ है, यह भी प्रदर्शित करता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

HL-2M टोकामक

संदर्भ:

हाल ही में, चीन ने पहली बार अपने कृत्रिम सूर्य परमाणु संलयन रिएक्टर (HL-2M Tokamak रिएक्टर) को सफलतापूर्वक संचालित किया है। यह चीन की परमाणु ऊर्जा अनुसंधान क्षमताओं में एक महान उपलब्धि है।

प्रमुख बिंदु:

  • HL-2M टोकामक रिएक्टर चीन का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत परमाणु संलयन प्रायोगिक अनुसंधान उपकरण है।
  • मिशन को एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकामक (EAST) नाम दिया गया है।
  • यह सिचुआन प्रांत में स्थित इस रिएक्टर को अक्सर “कृत्रिम सूर्य” (artificial sun) कहा जाता है जो प्रचंड गर्मी और बिजली पैदा करता है।
  • यह तप्त प्लाज्मा को अवगलित करने हेतु एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है और इसका तापमान 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक तक पहुँच सकता है- जो कि सूर्य की कोर से लगभग दस गुना अधिक गर्म है।

 

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