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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भूटान के क्षेत्र पर चीन का दावा

7th July, 2020

 (G.S. Paper-II)

         

चर्चा में क्यों?

अपनी विस्तारवादी नीति को आगे बढ़ाते हुए, चीन ने भारत के पारंपरिक सहयोगी भूटान के साथ एक नया सीमा विवाद पैदा कर दिया है।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि बीते माह आयोजित ‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility- GEF) की एक ऑनलाइन बैठक में पूर्वी भूटान स्थित ‘सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य’ (Sakteng Wildlife Sanctuary) के विकास से संबंधित एक परियोजना पर आपत्ति जताते हुए चीन ने कहा था कि यह चीन और भूटान के बीच एक विवादित क्षेत्र है।
  • हालाँकि भूटान ने चीन के दावे पर आपत्ति जताई और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) ने भूटान की परियोजना के वित्तपोषण के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी।

वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF)- 

  • वर्ष 1992 में स्थापित वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) पर्यावरण क्षेत्र में परियोजनाओं को वित्त प्रदान करने के लिये एक US-आधारित वैश्विक निकाय है।
  • अपने रणनीतिक निवेश के माध्यम से GEF प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने के लिये भागीदारों के साथ कार्य करता है।

चीन का दावा-

  • ‘सकतेंग वन्यजीव अभ्यारण्य’ चीन और भूटान के बीच विवादित क्षेत्र में स्थित है, जो कि चीन और भूटान सीमा वार्ता के एजेंडे में शामिल है।
  • चीन के अनुसार, चीन और भूटान के बीच सीमा को कभी भी सीमांकित नहीं किया गया है। दोनों देशों के बीच पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में लंबे समय से विवाद चल रहे हैं।

चीन के दावे का निहितार्थ-

  • विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन द्वारा किया गया यह दावा दोनों द्वारा सीमा विवाद को लेकर सुलझाने को लेकर चल रहे राजनयिक प्रयासों को कमज़ोर करता है।
  • चीन द्वारा भूटान के पूर्वी हिस्से पर दावा करने का एक कारण भारत पर दबाव बनाना भी हो सकता है, गौरतलब है कि भूटान का यह पूर्वी हिस्सा भारत के अरुणाचल प्रदेश के पास स्थित है, जिस पर चीन ‘दक्षिणी तिब्बत’ के एक हिस्से के रूप में अपनी संपूर्णता का दावा करता है।
  • भले ही चीन का दावा नया न हो, किंतु इसे मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के दृष्टिकोण से भारत और भूटान पर दबाव बनाने के एक रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

भूटान का पक्ष-

  • वहीं परिषद में चीन के दावे को खारिज करते हुए कहा कि सकतेंग वन्यजीव अभ्यारण्य भूटान का एक अभिन्न और संप्रभु क्षेत्र है और भूटान तथा चीन के बीच सीमा पर चर्चा के दौरान यह कभी भी एक विवाद का विषय नहीं रहा है।
  • ध्यातव्य है कि चीन और भूटान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध न होने के कारण भूटान ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास के माध्यम से चीन को अपनी स्थिति से अवगत कराया।

चीन-भूटान संबंध और सीमा विवाद-

  • भूटान और चीन के बीच संबंधों में एक स्पष्ट विरोधाभास है। भूटान की भौगोलिक स्थिति इसे हिमालयी क्षेत्र में राजनीतिक और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण बना देती है।
  • भूटान चीन का एकमात्र पड़ोसी देश है, जिसके पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (People’s  Republic  of  China- PRC) के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।
  • हालाँकि दोनों देशों के बीच अब तक केवल मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों पर ही सीमा विवाद, किंतु चीन के नए दावे के साथ ही यह विवाद पूर्वी क्षेत्र तक विस्तारित हो गया है।
  • चीन और भूटान ने वर्ष 1984 से वर्ष 2016 के बीच सीमा वार्ता के कुल 24 दौर आयोजित किये हैं। वर्ष 2017 में डोकलाम सीमा विवाद के बाद से दोनों देशों के बीच इस संबंध में कोई भी बैठक आयोजित नहीं की गई है।

सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य-

  • उल्लेखनीय है कि सकतेंग वन्यजीव अभ्यारण्य (Sakteng Wildlife Sanctuary) भूटान के पूर्वी भाग में स्थित अभयारण्य है और यह लगभग 650 वर्ग किमी. का क्षेत्र कवर करता है।
  • इससे पूर्व यह क्षेत्र कभी भी चीन और भूटान के बीच विवादित क्षेत्र नहीं रहा है।
  • भूटान के पूर्वी क्षेत्र में काफी बड़ी संख्या में भूटानी लोग रहते हैं।
  • यह अभयारण्य बांग्लादेश के अधिकांश पृथक खानाबदोश जनजाति के लोगों का निवास स्थान है।

इसरो ने भेजी मंगल ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा की तस्वीर

 (G.S. Paper-III)

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मंगलयान (Mars Orbiter Mission) ने मंगल ग्रह के नजदीकी और सबसे बड़े चंद्रमा फोबोस की तस्वीर भेजी है जब मंगलयान मंगल ग्रह से 7,200 किलोमीटर और फोबोस से 4,200 किलोमीटर दूर था.
  • इसरो के अनुसार, फोबोस पर एक बहुत बड़ा गड्ढा नजर आ रहा है, जिसे स्टिकनी नाम दिया गया है. यह बहुत पहले फोबोस से आकाशीय पिंडों के टकराने से बना होगा. इसके अलावा भी कई छोटे-छोटे गढ्डे इस तस्वीर में नजर आ रहे हैं. इनका नाम स्लोवास्की, रोश और ग्रिलड्रिग रखा गया है.

मिशन में आई लागत 450 करोड़ रुपये-

  • इसरो ने 05 नवंबर 2013 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी रॉकेट (PSLV rocket) के जरिए यह प्रक्षेपण किया था. इसमें 450 करोड़ रुपये लागत आई थी. इस मिशन का उद्देश्य मंगल की सतह और वहां खनिजों की संरचना का अध्ययन करना है. यही नहीं इसका उद्देश्य वहां के वायुमंडल में मिथेन की मौजूदगी के बारे में पड़ताल करना भी है. मंगल पर मिथेन की मौजूदगी जीवन की ओर संकेत करती है.

आपराधिक कानून सुधार पर समिति

(G.S. Paper-II)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने आपराधिक कानून में सुधार के लिये एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया है।

प्रमुख बिंदु

  • आपराधिक कानून में सुधार के लिये गठित की गई राष्ट्रीय स्तर की समिति में दिल्ली की ‘नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ के कुलपति रणबीर सिंह सहित न्यायिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
  • यह समिति विशेषज्ञों के साथ परामर्श करके अपनी रिपोर्ट के लिये ऑनलाइन राय एकत्रित करेगी।
  • रिपोर्ट की यह प्रक्रिया 4 जुलाई, 2020 से शुरू होगी और अगले तीन महीने तक चलेगी।

आपराधिक न्याय प्रणाली की पृष्ठभूमि– 

  • भारत में आपराधिक कानूनों का संहिताकरण (Codification) ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था जो कमोबेश 21वीं सदी में भी उसी तरह ही है।
  • लॉर्ड थॉमस बबिंगटन मैकाले (Lord Thomas Babington Macaulay) को भारत में आपराधिक कानूनों के संहिताकरण का मुख्य वास्तुकार कहा जाता है।
  • वर्ष 1834 में स्थापित भारत के पहले विधि आयोग की सिफारिशों पर चार्टर एक्ट-1833 के तहत वर्ष 1860 में आपराधिक कानूनों के संहिताकरण के लिये मसौदा तैयार किया गया था। और इसे वर्ष 1862 के शुरुआती ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश भारत में लागू किया गया।
  • भारत में आपराधिक कानून भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code, 1860), आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (Indian Evidence Act, 1872) आदि के तहत संचालित होते हैं।

सुधार की आवश्यकता-

  • औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानून: आपराधिक न्याय प्रणाली ब्रिटिश औपनिवेशिक न्यायशास्त्र की प्रतिकृति है जिसे राष्ट्र पर शासन करने के उद्देश्य से बनाया गया था न कि नागरिकों की सेवा करने के लिये।
  • प्रभाव-शून्यता: आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य निर्दोषों के अधिकारों की रक्षा करना और दोषियों को दंडित करना था किंतु आजकल यह प्रणाली आम लोगों के उत्पीड़न का एक उपकरण बन गई है।

विचाराधीन आपराधिक मामलों का बढ़ता बोझ  आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, न्यायिक प्रणाली में (विशेष रूप से ज़िला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में) लगभग 3.5 करोड़ मामले लंबित हैं।

अंडरट्रायल मामलों की बढ़ती संख्या भारत, दुनिया के सबसे अधिक अंडरट्रायल कैदियों की संख्या वाला देश है।  वर्ष 2015 की एनसीआरबी-प्रिज़न स्टैटिस्टिक्स इंडिया (NCRB-Prison Statistics India) के अनुसार, जेल में बंद कुल जनसंख्या का 67.2% अंडरट्रायल कैदी हैं।

जाँच पड़ताल में देरी भ्रष्टाचार, काम का बोझ और पुलिस की जवाबदेही न्याय की तेज़ और पारदर्शी न्याय देने में एक बड़ी बाधा है।

माधव मेनन समिति इस समिति ने वर्ष 2007 में भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System of India- CJSI) में सुधारों पर विभिन्न सिफारिशों का सुझाव देते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

मालीमठ समिति की रिपोर्ट इस समिति ने वर्ष 2003 में भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (CJSI) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस समिति ने कहा था कि मौजूदा प्रणाली ‘अभियुक्तों के पक्ष में अधिक झुकी हुई है और इसमें अपराध पीड़ितों के लिये न्याय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। समिति ने भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (CJSI) में सुधार हेतु विभिन्न सिफारिशें प्रदान की हैं किंतु इन्हें लागू नहीं किया गया था।

सुधार के सुझाव

  • ‘आपराधिक कानून’ को एक राज्य एवं उसके नागरिकों के बीच संबंधों की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति माना जाता है इसलिये भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में किसी भी संशोधन को कई सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिये।
  • अपराध पीड़ितों के अधिकारोंकी पहचान करने के लिये कानूनों में सुधार हेतु ‘पीड़ित होने का कारण’ पर खास तौर पर ज़ोर दिया जाना चाहिये। उदाहरण: पीड़ित एवं गवाह संरक्षण योजनाओं का शुभारंभ, अपराध पीड़ित बयानों का उपयोग, आपराधिक परीक्षणों में पीड़ितों की भागीदारी में वृद्धि, मुआवजे एवं पुनर्स्थापन हेतु पीड़ितों की पहुँच में वृद्धि।
  • नए अपराधों के निर्माण और अपराधों के मौजूदा वर्गीकरण के पुनर्मूल्यांकन को आपराधिक न्यायशास्त्र के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिये जो पिछले चार दशकों में काफी बदल गए हैं।
  • उदाहरण: ‘दंड की डिग्री’ (Degree of Punishments) देने के लिये आपराधिक दायित्व को बेहतर तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है। नए प्रकार के दंड जैसे- सामुदायिक सेवा आदेश, पुनर्स्थापन आदेश तथा पुनर्स्थापना एवं सुधारवादी न्याय के अन्य पहलू भी इसकी तह में लाए जा सकते हैं।
  • अपराधों का वर्गीकरण भविष्य में होने वाले अपराधों के प्रबंधन के लिये अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिये।
  • IPC के कई अध्यायों में दुहराव की स्थिति हैं। लोक सेवकों के खिलाफ अपराध, अधिकारियों की अवमानना, सार्वजनिक शांति और अतिचार पर अध्यायों को फिर से परिभाषित एवं संकुचित किया जा सकता है।

आगे की राह

  • भारत को एक स्पष्ट नीति मसौदा तैयार करना होगा जो मौजूदा आपराधिक कानूनों में परिकल्पित किये जाने वाले परिवर्तनों की सूचना दे। इसके लिये पुलिस, अभियोजन, न्यायपालिका एवं जेल सुधार को एक साथ करने की आवश्यकता होगी।
  • आपराधिक कानूनों में सुधार, मुख्य रूप से समाज में शांति लाने के लिये ‘सुधारवादी न्याय’ पर आधारित होना चाहिये।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • वेस्ट बैंक भूमध्यसागर के तट के निकट एक भूभाग है जो चारों ओर से अन्य देशों से घिरा (landlocked) हुआ है. इसके पूर्व में जॉर्डन तथा दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में इजराइल है.
  • वेस्ट बैंक के अन्दर मृत सागर (dead sea) के पश्चिमी तट का एक बड़ा भाग भी आता है.

वेस्ट बैंक विवाद का इतिहास-

  • 1948 केअरबइजराइली युद्ध में जॉर्डन ने वेस्ट बैंक पर आधिपत्य कर लिया था.
  • 1967 के छह दिवसीय युद्ध के समय इजराइल ने जॉर्डन से यह भूभाग छीन लिया और तब से इस पर इजराइल का ही कब्ज़ा है.
  • यहाँ 4 लाख इजराइली बस गये हैं. यहूदियों का मानना है कि इस भूभाग पर उनको बाइबिल में ही     जन्मसिद्ध अधिकार मिला हुआ है.
  • फिलिस्तीनी लोगों का कोई अलग देश नहीं है. उनका लक्ष्य है कि इस भूभाग में फिलिस्तीन देश स्थापित किया जाए जिसकी राजधानी पूर्वी जेरुसलम हो. इस कारण यहूदियों और फिलिस्तीनियों  में झगड़ा होता रहता है. फिलिस्तीनियों का मानना है कि 1967 के बाद वेस्ट बैंक ने जो यहूदी बस्तियाँ बसायीं, वे सभी अवैध हैं.
  • संयुक्त राष्ट्र महासभासुरक्षा परिषद् और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयभी यही मानता है कि वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा बस्तियाँ स्थापित करना चौथी जिनेवा संधि (1949) का उल्लंघन है जिसमें कहा   गया था कि यदि कोई देश किसी भूभाग पर कब्ज़ा करता है तो वहाँ अपने नागरिकों को नहीं बसा सकता है.
  • रोम स्टैच्यूट (Rome Statute) के अंतर्गत 1998 में गठित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) के अनुसार भी इस प्रकार एक देश के लोगों को कब्जे वाली भूमि पर बसाना एक युद्ध अपराध है.
  • इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच स्थगित वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पश्चिम एशिया के लिए एक शान्ति योजना (West Asia Peace Plan)  घोषित की गयी थी.
  • इस योजना में यह भी कहा गया था कि यदि फिलिस्तीनी इससे सहमत होता है तो अमेरिका दस वर्षों में इस शांति एवं पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए 50 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा.

 

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