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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारत-EU समझौता

20th July, 2020

G.S. Paper-III

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ 15वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में आगामी पाँच वर्षों 2020-2025 के लिये वैज्ञानिक सहयोग पर समझौते को नवीनीकृत करने पर सहमत हो गए हैं।

प्रमुख बिंदु-

  • भारत और यूरोपीय संघदोनों ने वर्ष 2001 में हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी समझौते के अनुरूप आपसी लाभ और पारस्परिक सिद्धांतों के आधार पर अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भविष्य में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • ज्ञात है कि वर्ष 2001 में हुआ यह समझौता 17 मई 2020 को समाप्त हो गया था।
  • दोनों पक्ष समयबद्ध तरीके से नवीनीकृत प्रक्रिया शुरू करने और अनुसंधान एवं नवाचार में 20 वर्षों के मज़बूत सहयोग को अंगीकृत करने के लिये वचनबद्ध हैं।

इस समझौते का महत्त्व-

  • इससे जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, एग्रीटेक, जैव स्वायत्ता, एकीकृत साइबर-भौतिक प्रणाली, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी और स्वच्छ प्रौद्योगिकी आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार सहयोग को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • इसके अलावा अनुसंधान, शोधकर्त्ताओं के आदान-प्रदान, छात्रों, स्टार्टअप और ज्ञान के सह-सृजन के लिये संसाधनों के सह-निवेश में संस्थागत संबंधों को और मज़बूती मिलेगी।

भारत-यूरोपीय संघ विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग-

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकीदोनों देशों के मध्य स्थापित वैज्ञानिक सहयोग की समीक्षा के लिये भारत-यूरोपीय संघ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचालन समिति की वार्षिक बैठक आयोजित होती है।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences-MoES) और यूरोपीय आयोग (European Commission-EC) ने जलवायु परिवर्तन एवं ध्रुवीय अनुसंधान से संबंधित यूरोपीय रिसर्च एंड इनोवेशन फ्रेमवर्क कार्यक्रम ‘Hoizon 2020’ के तहत चयनित संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का समर्थन करने के लिये एक सह-निधि तंत्र (Co-Funding Mechanism-CFM) की स्थापना की है।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी 1970 के दशक से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) यूरोपीय संघ के साथ सहयोग कर रहा है।

  • इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी पृथ्वी अवलोकन में सहयोग बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें वर्ष 2018 में हस्ताक्षरितकॉपरनिकस कार्यक्रम (Copernicus Programme) भी शामिल है।
  • कॉपरनिकस यूरोपीय संघ का पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम (Earth Observation Programme) है।

यूरोपीय संघ-

  • यूरोपीय संघ 27 देशों (पूर्व में इस संघ में 28 देश शामिल थे) की एक आर्थिक और राजनीतिक सहभागिता है। ये 27 देश संधि के द्वारा एक संघ के रूप में जुड़े हुए हैं जिससे कि व्यापार आसानी से हो सके और लोग एक-दूसरे से कोई विवाद न करें क्योंकि अर्थव्यवस्था का एक सिद्धांत है कि जो देश आपस में जितना ज़्यादा व्यापार करते हैं उनकी लड़ाई होने की संभावना उतनी ही कम हो जाती है।
  • यही कारण है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में यह कोशिश की गई कि सभी देश आर्थिक रूप से एक साथ आएँ और एकजुट होकर एक व्यापार समूह का हिस्सा बनें।
  • इसी व्यापार समूह की वज़ह से आगे चलकर वर्ष 1993 में यूरोपीय संघ का जन्म हुआ। वर्ष 2004 में जब यूरो करेंसी लॉन्च की गई तब यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक रूप से एकजुट हुआ।
  • यूरोपीय संघ मास्ट्रिच संधि द्वारा बनाया गया था, जो 1 नवंबर, 1993 को लागू हुई थी।

भारत-इजरायल के बीच साइबर सुरक्षा सहयोग बढ़ाने हेतु समझौता

G.S. Paper-III

चर्चा में क्यों?

भारत और इजरायल ने हाल ही में साइबर हमलों से निपटने में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट से पैदा हुई नई परिस्थितियों में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज हुई है जिसने वर्चुअल दुनिया के लिए नए खतरे उजागर किए हैं.

  • इजरायल में भारत और इजरायल ने 15 जुलाई 2020 को समझौते पर हस्ताक्षर किए. इजरायल ने कहा कि भारत के साथ सहयोग संबंधों को और गहरा करने, वैश्विक साइबर चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.
  • इजरायल ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि कोविड-19 संकट ने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेज किया है. इसी के साथ कई चुनौतियां भी उभरकर सामने आई हैं, साथ ही साइबर खतरा भी बढ़ा है. इसलिए साइबर सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था और सेवाओं को तेजी से तैयार करने की जरूरत है. उन्ना ने कहा कि इजरायल इस क्षेत्र में अपने अनुभव के माध्यम से योगदान कर सकता है. साथ ही भारत में साइबर हमलों से निपटने के व्यापक अनुभव का लाभ उठा सकता है.

सहयोग को मजबूत करने हेतु कई अहम बैठक-

  • यह समझौता दो पक्षों के बीच परिचालन सहयोग को और गहरा करेगा और क्षेत्र में सुरक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए साइबर खतरों पर सूचना के आदान-प्रदान के दायरे का विस्तार भी करेगा. दोनों देशों के बीच 2018 से साइबर स्पेस के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने हेतु कई बैठकें हुई थीं. जून 2019 में, भारत के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक भी साइबर सप्ताह में भाग लेने के लिए इज़राइल गए थे.

समझौता से क्या होगा फायदा?

  • इस समझौते में भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT) भी शामिल है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी और इजराइल के राष्ट्रीय साइबर निदेशालय (INCD) के तहत काम करती है. इस समझौते से साइबर खतरों पर देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के दायरे का विस्तार होगा. यह समझौता क्षमता निर्माण और क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आपसी आदान-प्रदान में सहायता करेगा.

साइबर सुरक्षा: पृष्ठभूमि-

  • साइबर सुरक्षा को भारत और इज़राइल के नेताओं द्वारा सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक के रूप में चिन्हित किया गया था जब प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2017 में इजराइल का दौरा किया. दोनों देशों ने साल 2018 में साइबर सुरक्षा समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये थे.

आत्मनिर्भर भारत के आयाम

G.S. Paper-II

  • कोरोना महामारी के कारण हुए तीसरे लॉकडाउन की समाप्ति के 5 दिन पहले अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का अभियान शुरू करते हुए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भर अभियान की अहम कड़ी के रूप में कार्य करेगा।
  • हाल ही में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थी जोकि रिजर्व बैंक के फैसले थे और जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है उसे जोड़ दें तो यह करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है यह पैकेज भारत की जीडीपी का करीबकरीब 10% है। 20 लाख करोड़ रुपए का यह पैकेज 2020 में देश की विकास गाथा को आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर मात्र 5% रह जाएगी , तो वही 2020-21 में तुलनात्मक आधार पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में भारी गिरावट आएगी जो घटकर मात्र8% रह जाएगी।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महामारी उस समय आई है जबकि वित्तीय क्षेत्र पर दबाव के कारण पहले से ही भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती की मार झेल रही थी। कोरोना वायरस के कारण इस पर और दबाव बढ़ गया है। सरकार इस स्थिति से उबरने वअर्थव्यवस्थाको पुनर्जीवित करने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान कर रही है जो सार्वजनिक व निजी निवेश को राहत प्रदान करने में सहायक होगी।

आत्मनिर्भर भारत के आयाम-

  • वर्तमान वैश्वीकरण के युग में आत्मनिर्भरता की परिभाषा में बदलाव आया है। आत्मनिर्भरता, आत्मकेंन्द्रिता से अलग है।
  • भारत वसुधैव कुटुंबकम की संकल्पना में विश्वास करता है। क्योंकि भारत विश्व का ही एक हिस्सा है, अतः भारत प्रगति करता है तो ऐसा करके वह दुनिया की प्रगति में भी योगदान देता है।
  • आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैश्वीकरण का बहिष्करण या संरक्षणवाद को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा अपितु विश्व विकास में मदद की जाएगी।
  • आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा के प्रथम चरण में वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, खिलौने जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा किया जाएगा।
  • सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में उन 10 क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा सरकार ने इन क्षेत्रों के आयात में कटौती का भी निर्णय किया है।
  • इसमें
  • फर्नीचर, फुटवियरऔरएयर कंडीशनर,पूंजीगत सामान तथा मशीनरी, मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न एवंआभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल आदि शामिल है।

आत्मनिर्भर भारत के पांच मुख्य स्तंभ

  • अर्थव्यवस्था: जो वृद्धिशील परिवर्तन के स्थान पर बड़ी उछाल पर आधारित हो।
  • अवसंरचना: ऐसी अवसंरचना जो आधुनिक भारत की पहचान बने।
  • प्रौद्योगिकी: 21वीं सदी प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्था पर आधारित प्रणाली।
  • गतिशीलजनसांख्यिकी: जो भारत के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
  • मांग: भारत की मांग और आपूर्ति श्रंखला की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए।

स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला का विकास-

  • भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कुछ हिस्सों में बड़ी प्रगति हुई है परंतु अन्यमें आज भी हम किसी ना किसी रूप में अन्य देशों पर निर्भर है।उदाहरण के लिए भारत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र वैश्विक बाजार में अपना स्थान बनाया है परंतु हार्डवेयर के निर्माण में भारतीय कंपनियां उतनी सफल नहींरहीहैं। अन्य उदाहरण में भारतीय दवा उद्योग मोबाइल असेंबली आदि हैं जहां स्थानीय आपूर्ति श्रंखला को मजबूत किया जाना अति आवश्यक है।

उत्पादन श्रृंखला में भागीदारी-

  • औद्योगिक विकास के साथ-साथ ही उत्पादन के स्वरूप और कंपनियों/उद्योगों की कार्यशैली में बड़े बदलाव होंगे।
  • ऐसे में कृषि और अन्य क्षेत्रों को इन परिवर्तनों के अनुरूप तैयार कर औद्योगिक विकास के साथ- साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ध्यान दिया जा सकता है।
  • उदाहरण के लिए विभिन्न प्रकार की कृषि उत्पादों की पैकेजिंग या उन से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण हेतु स्थानीय स्तर पर छोटे औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देकर औद्योगिक उत्पादन संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।

अभियान के समक्ष चुनौतियां-

  • हाल ही में भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में सक्रिय पूंजी और वित्तीय तरलता की चुनौती के मामलों में वृद्धि देखी गई है कोविड-19 की महामारी से औद्योगिक गतिविधियों के रुकने और बाजार की मांग में कम होने से औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं में वृद्धि हुई है।
  • वर्तमान में कई क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को बहुत अधिक अनुभव नहीं है ऐसे में लागत को कम से कम रखते हुए वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
  • सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादकों और व्यवसायियों को दी जाने वाली सहायता मुक्त व्यापार समझौतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संघ के मानकों के अनुरूप ही जारी की जा सकती हैं।

निष्कर्ष-

  • कोरोना के कारण उत्पन्न हुई परिस्थितियों के उपरांत देश के नागरिकों का सशक्तिकरण करने की आवश्यकता है जिससे देश से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर सकें।आत्मनिर्भर भारत अभियान के समक्ष अनेक चुनौतियों के होने के बावजूद भारत को औद्योगिक क्षेत्र में मजबूती के लिए उन उद्योगों में निवेश करने की आवश्यकता है जिनमें भारत के वैश्विक ताकत के रूप में उभरने की संभावना है।आत्मनिर्भर राहत पैकेज के माध्यम से ना केवल सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की गई अपितु इसमें दीर्घकालिक सुधारों जिनमें कोयला और खनन क्षेत्र जैसे शामिल हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘निष्ठा’ योजना

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा आंध्र प्रदेश के 1200 प्रमुख ज्ञानवर्धक व्यक्तियों (रिसोर्स पर्सन) के लिए पहला ऑनलाइन निष्ठाशिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों की समग्र उन्नति के लिए एक राष्ट्रीय पहल (National Initiative for School Heads and Teachers Holistic Advancement- NISHTHA) कार्यक्रम शुरू किया गया है.

ये रिसोर्स पर्सन आंध्र प्रदेश के शिक्षकों के लिए मार्दर्शन में सहयोग करेंगे, तथा उसके उपरान्त इन्हें दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन निष्ठा प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा.

NISHTHA क्या है?

  • NISHTHA योजना का पूरा नाम है – “विद्यालय प्रधानों एवं शिक्षकों की समग्र प्रगति हेतु राष्ट्रीय पहल / National Initiative for School Heads’ and Teachers’ Holistic Advancement.
  • यह पूरे विश्व में शिक्षकों के प्रशिक्षण का एक विशालतम कार्यक्रम है.
  • इसका उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर ज्ञानार्जन में सुधार लाना है.
  • यह कार्यक्रम छात्रों में आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने और संपोषित करने के लिए शिक्षकों को प्रेरित करेगा.

यह कार्यक्रम आवश्यक क्यों?

  • समय की माँग है कि आज हमारे शिक्षक इन प्रावधानों की जानकारी रखें – लैंगिक समानता, दिव्यांग अधिकार अधिनियम और यौन अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम (POCSO).
  • NISHTHA कार्यक्रम सभी शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को ऐसा प्रशिक्षण देना चाहता है जिससे कि वे छात्रों की आवश्यकताओं के प्रति ध्यान दें और उन्हें उचित मंत्रणा दें. साथ ही वे ऐसा वातावरण बनाएँ कि बच्चे हँसते-हँसते ज्ञान अर्जित करें और निःशक्त बच्चों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखें.

 

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