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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)

24th July, 2020

G.S. Paper-III (Environment)

चर्चा में क्यों?

 सम्पूर्ण भारत के अनेक विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों के छात्र संघों ने प्रस्तावित पर्यावरण प्रभाव   आकलन अधिसूचना 2020 (EIA) के प्रारूप को स्थगित करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से माँग की है.

पृष्ठभूमि

भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environment Impact Assessment- EIA), को वैधानिक रूप सेपर्यावरण संरक्षण अधिनियम’, 1986 द्वारा स्थापित किया गया है. अधिनियम में EIA से सम्बंधित पद्धतियों तथा प्रक्रियायों के लिए कई प्रावधान किये गए हैं.

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (Environment (Protection) Act,), 1986 के अंतर्गत केंद्र सरकार कोपर्यावरण की सुरक्षा तथा सुधार के लिए सभी उपाय करने हेतु प्रारूप अधिसूचना निर्गत करने शक्ति प्रदान कई गयी है.

प्रस्तावित प्रारूप में विवाद के प्रमुख तथ्य

  1. प्रस्तावित प्रारूप मेंसार्वजनिक परामर्श सुनवाई की अवधि घटाकर अधिकतम 40 दिवस कर दिया गया है.
  2. प्रारूप में पर्यावरण स्वीकृति लेने हेतुकिसी आवेदन पर सार्वजनिक सुनवाई के दौरान जनता को अपनी प्रतिक्रियाएं देने की अवधि 30 दिनों से घटाकर 20 दिन कर दी गयी है.
  3. इसके अंतर्गत, कुछ क्षेत्रों कोबिना सार्वजनिक सुनवाई अथवा पर्यावरणीय स्वीकृति केआर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रोंके रूप में घोषित करने का प्रावधान किया गया है, तथा, साथ ही, लालऔरनारंगीश्रेणी में वर्गीकृत विषैले उद्योगों को ‘संरक्षित क्षेत्र’ से 0-5 किमी की दूरी पर स्थापित किया जा सकता है.
  4. खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण की स्वीकृति की बढ़ती वैधता, (वर्तमान में 50 वर्ष बनाम 30 वर्ष) और नदी घाटी परियोजनाएं (वर्तमान में 15 वर्ष बनाम 10 वर्ष), से परियोजनाओं के कारण होने वाले अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय, सामाजिक और स्वास्थ्य संबधी खतरों में वृद्धि होने की संभावना है.

EIA क्या है?

  • EIA एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग किसी विकास परियोजना के पर्यावरणीय परिणामों की भविष्यवाणी करने में किया जाता है. इस आकलन का वैधानिक आधार पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986 है जिसमें EIA की कार्य-पद्धति और प्रक्रिया के विषय विभिन्न प्रावधान किये गये हैं.
  • EIA भारत की पर्यावरणीय निर्णय लेने की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण घटक है जिसमें उन्हें प्रस्तावित परियोजनाओं के संभावित प्रभावों का विस्तृत अध्ययन माना जाता है.
  • EIA किसी प्रस्तावित विकास योजना में संभावित पर्यावरणीय समस्या का पूर्व आकलन करता है और योजना के निर्माण व प्रारूप निर्माण के चरण में उससे निपटने के उपाय करता है.
  • यह योजना निर्माताओं के लिये एक उपकरण के रूप में उपलब्ध है, ताकि विकासात्मक गतिविधियों और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच समन्वय स्थापित हो सके.
  • इन प्रतिवेदनों के आधार पर पर्यावरण मंत्रालय या अन्य प्रासंगिक नियामक निकाय किसी परियोजना को मंज़ूरी दे सकते हैं अथवा नहीं.
  • वैसे भारत में EIA इसका व्यावहारिक आरंभ 1978-79 में नदी-घाटी परियोजनाओं के प्रभाव आकलन से हुआ और कालांतर में इसके दायरे में उद्योग, ताप विद्युत परियोजनाएँ आदि को भी शामिल किया गया.

EIA के लाभ

  • स्वस्थ स्थानीय पर्यावरण विकास में सहायक.
  • पर्यावरण मानकों का पालन.
  • पर्यावरण की हानि या आपदाओं में कम जोखिम.
  • जैव विविधता का रख-रखाव.
  • सूचित निर्णयन के कारण संसाधनों के उपयोग में कमी.
  • समुदायों की भागीदारी में वृद्धि तथा सतत् विकास की सुनिश्चितता.

EIA के उद्देश्‍य

  • गहरे समुद्र खनिजों के साथ जुड़ी पर्यावरण स्थितियों का मूल्यांकन करना.
  • वितलीय क्षेत्रों में तलछट पारिस्थितिक तंत्र और जैव भूगोल का मूल्यांकन करना.
  • इन क्षेत्रों में भू-जैव रासायनिक प्रक्रियाओं के बीच परस्पर क्रिया को समझना.
  • गहरे समुद्र खनिज संसाधनों के खनन के लिए पर्यावरण डेटा को विकसित करना.
  • प्रथम पीढ़ी खनन (एफजीएम) स्‍थल के लिए ईएमपी तैयार करना.

GS III ( Agriculture)

पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PM FME) योजना

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के एक भाग के रूप में खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PM FME) योजना का प्रारम्भ किया है.

PM FME योजना के बारे में जानकारी

  • वर्तमान सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय स्‍तर पर प्रारम्भ की गई PM FME योजना को 10,000 करोड़ रू. के परिव्यय के साथ 2020-21 से 2024-25 तकपाँच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा.
  • PM FME योजना में होने वाले व्यय का वितरण कुछ इस प्रकार होगा –  केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के साथ 90:10 के अनुपात में, संघ शासित प्रदेशों में (जहाँ विधान सभा नहीं है) केन्‍द्र द्वारा 100 प्रतिशत.
  • PM FME योजना मेंएक जिला एक उत्पाद (One District One Product – ODOP) के दृष्टिकोण को अपनाया गया है.
  • एफपीओ / एसएचजी / निर्माता सहकारी समितियों को मूल्य शृंखला के साथ पूंजी निवेश के लिए35 प्रतिशत का क्रेडिट लिंक्ड अनुदान प्रदान किया जाएगा.
  • योजना मेंक्षमता निर्माण और अनुसंधान पर विशेष रूप से ध्यान दियागया है.

अन्य सूचनाएँ

  • ऑपरेशन ग्रीन्स का विस्तार: खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही ऑपरेशन ग्रीन्स योजना की अधिसूचना की तारीख से छह महीने की अवधि के लिए टमाटर, प्याज और आलू (TOP) फसलों से लेकर अन्य अधिसूचित बागवानी फसलों तक विस्‍तार कर दिया गया है.
  • विदित हो कि कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs), कृषि लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण सुविधाओं तथा व्यावसायिक प्रबंधन के प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय बजट 2018-19 के बजट भाषण मेंऑपरेशन फ्लड को ध्यान में रखते हुए 500 करोड़ रुपए के परिव्यय से एक नई योजना ऑपरेशन ग्रीन्स की घोषणा की गई थी.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

STARS Program :-

  • हाल ही में विश्व बैंक समूह की घोषणा की है कि भारत में गुणवत्ता और स्कूल शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए 500 मिलियन डॉलर (लगभग रुपये 3700 करोड़) के ऋण को स्वीकृति दी गयी है. स्वीकृत ऋण से भारत के 6 राज्यों के5 मिलियन स्कूलों में 10 मिलियन शिक्षक और 250 मिलियन स्कूली छात्र लाभान्वित होंगे.
  • STARS कार्यक्रम के एक भाग के रूप में ऋण को मंजूरी दी गई थी. यह 6 भारतीय राज्य राजस्थान, ओडिशा, केरल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र हैं.
  • स्टार्स का पूर्ण स्वरुप ‘Strengthening Teaching-Learning and Results for States Program’ है.
  • 1994 से इस कार्यक्रम ने भारत और विश्व बैंक के बीच एक लंबी साझेदारी स्थापित करने में मदद की है. इस कार्यक्रम के माध्यम से, विश्व बैंक समूह ने भारत सरकार को ‘सभी के लिए शिक्षा’ प्रदान करने के दृष्टिकोण को अधिक लचीलापन प्रदान किया है.

 

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