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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारत-नेपाल वार्ता

13th August, 2020

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा के लिये भारत और नेपाल के राजदूत काठमांडू (नेपाल) में मुलाकात कर सकते है। COVID-19 महामारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक होने की संभावना है।

प्रमुख बिंदु-

  • यह बैठकभारतनेपाल ओवरसाइट मैकेनिज्मका एक हिस्सा होगी। चालू द्विपक्षीय आर्थिक और विकास परियोजनाओं की समीक्षा करने के लिये वर्ष 2016 में इसकी स्थापना की गई थी।
  • बजट 2020-21 में भारत सरकार ने नेपाल में संचालित परियोजनाओं के लिये 800 करोड़ रुपए का आवंटन किया था।
  • इन परियोजनाओं में तराई क्षेत्र में सड़कों का निर्माण, भूकंप (2015) के बाद के पुनर्निर्माण कार्यों में नेपाल की मदद, रेलवे लाइनों का निर्माण, एक पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, एक पॉलिटेक्निक कॉलेज, एक तेल पाइपलाइन और सीमा चेक पोस्ट का निर्माण शामिल हैं।
  • हाल ही में काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में एक स्वच्छता सुविधा के निर्माण के लिये भारत और नेपाल के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किये गए।
  • भारत और नेपाल के बीच बढ़ते हाल के तनावों के मद्देनज़र यह बैठक बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली है।
  • वर्ष 2017 में नेपाल ने चीन केबेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) पर हस्ताक्षर किये थे, जिससे नेपाल में राजमार्ग, हवाई अड्डे और अन्य बुनियादी ढाँचे के निर्माण का आश्वासन दिया। भारत ने BRI में शामिल होने से इनकार कर दिया और नेपाल के इस कदम को चीन के प्रति झुकाव के रूप में देखा गया।
  • वर्ष 2019 में भारत सरकार ने देश कानया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर का विभाजन करते हुए इसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों में दर्शाया गया साथ ही उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ ज़िले के हिस्से के रूप में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी प्रदर्शित किया गया।
  • भारत और नेपाल के मध्य कालापानी-लिम्पियाधुरा-लिपुलेख त्रिभुज पर भारत-नेपाल और चीन तथा सुस्ता क्षेत्र (पश्चिम चंपारण ज़िला, बिहार) के बीच सीमा विवाद हैं।
  • नेपाल ने भारत के इस नक्शे के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई और इस मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल करने की सलाह दी।
  • इसके अलावा चीनी सीमा के समीप लिपुलेख दर्रे पर (कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये) भारत सरकार द्वारा एक सड़क के उद्घाटन ने दोनों देशों के बीच विरोध को और अधिक बढ़ावा दे दिया।
  • इसके प्रत्युत्तर में नेपाल ने एक नया नक्शा जारी किया जिसमें भारत द्वारा दावा किये गए सभी विवादित क्षेत्र को नेपाल का अंग दर्शाया गया हैं।

आगे की राह

  • भारत और नेपाल, जिनके बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध हैं, दोनों देशों के बीच उपजे तनाव को दूर करने के लिये मिलकर प्रयास करने चाहिये।
  • चीन के साथ नेपाल की बढ़ती आत्मीयता भारत-चीन संघर्षों के बीच भारत के लिये चिंता का विषय है।
  • जैसा कि भारत ने पड़ोसी प्रथम (नेबरहुड फर्स्ट) की नीति को अपनाया हुआ है, ऐसे राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ लोगों के मध्य आपसी जुड़ाव जैसे पक्षों पर भी भारत को नेपाल के साथ अधिक सक्रिय रूप से काम करने की ज़रूरत है। इस संदर्भ मेंगुजराल सिद्धांत/डॉक्ट्रिन (Gujral Doctrine) जिसने भारत-बांग्लादेश विवाद को सुलझाने में मदद की, बहुत मददगार साबित हो सकता है।

टिक-बोर्न वायरस

G.S. Paper-III (S & T)

संदर्भ

चीन में एक नए टिक बोर्न वायरस (Tick Borne Virus) के संक्रमण ने दस्तक दी है। इस वायरस के कारण थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम सहित तेज बुखार (Severe Fever with Thrombocytopenia Syndrome- SFTS) नामक बीमारी से चीन में लगभग 7 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है।

चिंता का विषय

  • हालांकि, यहबीमारी मनुष्यों में किलनी (टिक) जैसे कीड़े के काटने से फैलती है, चीनी वायरस विज्ञानियों के अनुसार इसके मनुष्य से मनुष्य में संक्रमित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • वर्तमान में इस प्रकार के संक्रमण मेंमामला मृत्यु दर(case fatality rate) लगभग 16 और 30 प्रतिशत के बीच है।
  • जिस दर से यह वायरस फैलता है और इसकी उच्च मृत्यु दर के कारण, SFTS वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) द्वारा शीर्ष10 प्राथमिकता वाले रोगों की सूची में सूचीबद्ध किया गया है।
  • SARS-CoV-2 के विपरीत, यह पहली बार नहीं है जब SFTS वायरस ने लोगों को संक्रमित किया है।SFTS वायरस का संक्रमण इससे पहले वर्ष 2020 के आरंभ में चीन के जिआंगसू प्रांत में फैला था।

SFTS वायरस क्या है?

  • थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम सहित तेज बुखार(Severe Fever with Thrombocytopenia Syndrome- SFTS) वायरस, बुन्यावायरस (Bunyavirus) परिवार से संबंधित है तथाटिक के काटने से मनुष्यों में प्रेषित होता है।
  • सबसे पहले इस वायरस की पहचानचीन में शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा एक दशक पहले की गयी थी।

यह किस प्रकार फैलता है?

  • एक एशियाई टिक (Asian Tick) जिसे हेमाफिसलिस लॉन्गिकोर्निस(Haemaphysalis Longicornis) कहा जाता है, इस वायरस का प्राथमिक वाहक है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार यहवायरस प्रायः बकरियोंमवेशियोंहिरणों और भेड़ों जैसे जानवरों से मनुष्यों में फैलता है।

SFTFS वायरस के लक्षण

  • वर्ष 2011 में चीनी शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बीमारी की शुरुआत के बाद रोगोद्भवन अवधि (incubation period) सात से तेरह दिनों के बीच होती है।
  • इस बीमारी से पीड़ित रोगियों में आमतौर पर विभिन्न लक्षण पाए जाते है, जिनमें बुखार, थकान, ठंड लगना, सिरदर्द, लसीका तंत्र में समस्या (lymphadenopathy), क्षुधा-अभाव, मतली, , दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव, नेत्र रोग आदि सम्मिलित हैं।

SFTS का उपचार

हालाँकि इस बीमारी के उपचार हेतु अभी तक एक भी टीका सफलतापूर्वक विकसित नहीं किया गया है, लेकिन एंटीवायरल दवा रिबाविरिन (Ribavirin) को इस बीमारी के इलाज में प्रभावी माना जाता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

माउंट सिनाबंग

Mount Sinabung

हाल ही में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर माउंट सिनाबंग (Mount Sinabung) ज्वालामुखी  पुनः सक्रिय             हुआ है।

  • उल्लेखनीय है कि लगभग 400 वर्षों की निष्क्रियता के बाद यह ज्वालामुखी वर्ष 2010 में पुनः सक्रिय हुआ था। वर्ष 2010 के बाद वर्ष 2014 और वर्ष 2016 में भी इस ज्वालामुखी में उद्गार हो चुका है।

प्रमुख बिंदु

  • माउंट सिनाबंग, इंडोनेशिया में 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
  • इंडोनेशिया के रिंग ऑफ फायर(Ring of Fire) या परिप्रशांत महासागरीय मेखला (Circum-Pacific Belt) में अवस्थिति होने के कारण यहाँ कई सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं। और यह क्षेत्र भूकंप प्रवण क्षेत्र के अंतर्गत भी आता है।
  • ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring of Fire) या परिप्रशांत महासागरीय मेखला (Circum-Pacific Belt) प्रशांत महासागर के चारों ओर विस्तृत एक ऐसा क्षेत्र है जहाँविवर्तनिक प्लेटें आकर आपस में मिलती हैं। यह क्षेत्र निरंतर होने वाली भूकंपीय घटनाओं एवं ज्वालामुखी उद्गार के लिये जाना जाता है।
  • इस ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में 17,000 से अधिक द्वीप एवं द्वीप समूह शामिल हैं और इसमें लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखीहैं।
  • इस क्षेत्र मेंविश्व के लगभग 75% ज्वालामुखी पाए जाते है तथा कुल भूकंपीय घटनाओं में से 90% भूकंप इस क्षेत्र में आते हैं।

 

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