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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का महत्त्व

28th October, 2020

G.S. Paper-II

संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का भारत के लिए क्या महत्त्व है?

  • भारत के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध किसी भी अन्य द्विपक्षीय आर्थिक, रणनीतिक और सामाजिक संबंधो से अधिक मायने रखता है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति, व्यापार, आव्रजन नीतियों और महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों पर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं।
  • अमेरिका में भारतीय प्रवासी सबसे सफल प्रवासी समुदायों में से एक है। हालांकि, उनकी राजनीतिक प्राथमिकताएँ भिन्न हो सकती हैं – किंतु वे सभी अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि के मध्य घनिष्ठ संबंधो का समर्थन करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम का भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव-

  • भारत द्वारा अपने ‘गुट-निरपेक्ष’ दृष्टिकोण सेवर्ष 1971 में भारतसोवियत समझौतों की ओर पहली बार गंभीर परिवर्तन, पाकिस्तान के प्रति अमेरिका के झुकाव और वाशिंगटनबीजिंग समझौतों की शुरुआत की प्रतिक्रिया में किया गया था।
  • अब, वर्ष 2020 में, शक्तिशालीलड़ाकू और आधिपत्यवादी चीनके कारण भयावह स्थितियां उत्पन्न हो गयी है। जिस कारण नई दिल्ली और वाशिंगटन के मध्य अच्छे संबंध विकसित हुए हैं।
  • स्पष्ट रूप से, जो बिडेन और डोनाल्ड ट्रम्प, दोनों, चीन की ओर से संभावित गंभीर खतरों को पहचानते हैं, लेकिन इन दोनों नेताओं की इस संदर्भ प्रतिक्रियाएं भिन्न हो सकती है:
  1. ट्रम्प 0 द्वारा अधिक आक्रामक तरीके से चीन का मुकाबला किया जा सकता है।
  2. बिडेन, संभवतः कांगेज्मेंट (Congagement) नीति का पालन कर सकते है। कांगेज्मेंट अर्थात नियंत्रण सहित संबंध (Congagement– Containment with Engagement)।

भारत तथा विभिन्न अमेरिकी राष्ट्रपतियों के मध्य ऐतिहासिक संबंध-

  • रिपब्लिकन पार्टी का शासन प्रायः एकमात्र अमेरिकी हितों से संबंधित होता है।
  • लेकिन, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों द्वारा, पक्षपातपूर्ण रवैयों के बावजूद,  भारत के साथ जोश और उत्साह के साथ संबंध स्थापित किये गए हैं।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दो अमेरिकी राष्ट्रपतियों को भारत के प्रति सबसे अधिक सौहाद्रपूर्ण माना जाता है: 1960 के दशक में जॉन एफ कैनेडीऔर2000 के दशक में जॉर्ज डब्ल्यू बुश
  • इन दोनों राष्ट्रपतियों द्वारा अलग-अलग समयकाल में असाधारण उत्साह के साथ मित्रता और सहयोग संबंध स्थापित किये गए।दोनों ही मौकों परचीन के खतरेने भारतअमेरिका संबंधो को मात्र निजी झुकाव से आगे बढाने में एक उत्प्रेरक का कार्य किया

BECA समझौता

G.S. Paper-II

संदर्भ:

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 27 अक्टूबर, 2020 को 2 + 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के तीसरे दौर में BECA समझौते (भूस्थानिक सहयोग के लिए बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता) पर हस्ताक्षर किये हैं.

  • यह BECA समझौता भारत को अत्यंत सटीक भू-स्थानिक डाटा तक पहुंच प्रदान करेगा, जिसके आगे कई सैन्य अनुप्रयोग होंगे.
  • यह घोषणा केंद्रीय रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्क एस्पर के बीच एक बैठक के बाद की गई, जो अमेरिकी विदेश सचिव माइकल पोम्पेओ के साथ भारत-अमेरिका 2 + 2 वार्ता के लिए भारत का दौरा कर रहे हैं.

यह BECA समझौता क्या है?

  • यह आपसी भू-स्थानिक सहयोग के लिए बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता (BECA) मुख्य रूप से अमेरिकी रक्षा विभाग की नेशनल जियोस्पेशियलइंटेलिजेंस एजेंसी और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच प्रस्तावित एक संचार समझौता है.
  • यह समझौता भारत और अमेरिका को महत्वपूर्ण सैन्य सूचनाओं जैसेकि, उन्नत उपग्रह और स्थलाकृतिक डाटा का आदान-प्रदान करने की अनुमति देगा, जिसमें नक्शे, समुद्री और वैमानिकी चार्ट और भूभौतिकीय, भू-चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण डाटा भी शामिल है.
  • आपस में साझा की गई अधिकांश जानकारी अवर्गीकृत होगी और इसे डिजिटल या मुद्रित प्रारूप में साझा किया जाएगा. BECA समझौते में वर्गीकृत जानकारी को भी उचित सुरक्षा उपायों के साथ साझा करने का प्रावधान शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि, यह जानकारी अन्य किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं की गई है.
  • यह BECA समझौता भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए हस्ताक्षरित चार मूलभूत समझौतों में से अंतिम है.

भारत और अमेरिका के बीच हुए अन्य तीन समझौते निम्नलिखित हैं-

  1. वर्ष 2002 में हुआ सामान्य सुरक्षा के लिए सैन्य सुरक्षा समझौता (GSOMIA). इसका एक अनुवर्ती विस्तार समझौता – औद्योगिक सुरक्षा अनुबंध (ISA) – वर्ष 2019 में हस्ताक्षरित किया गया था.
  2. वर्ष 2016 में हुआ लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA).
  3. वर्ष 2018 में संचार संगतता और सुरक्षा समझौता (COMCASA).

इस BECA समझौते का लक्ष्य भारत और अमेरिका के बीच भू-स्थानिक सहयोग को बढ़ाना है.

BECA समझौते से भारत को मिलेगी कैसे मदद?

इस BECA समझौते के तहत, अमेरिकी सशस्त्र बल भारत के साथ उन्नत नेविगेशनल एड्स और एविओनिक्स प्रदान करने के साथसाथ भूस्थानिक खुफिया जानकारी साझा करेंगे जो भारतीय सेना के स्वचालित हार्डवेयर सिस्टम और ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हथियारों की सटीकता को बढ़ाने में मदद करेंगे.

चीन पर इस समझौते का क्या असर पड़ेगा?

  • इस BECA समझौते से भारत और अमेरिका को भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगी.
  • इन दोनों QUAD भागीदार देशों ने अपने अन्य दो QUAD साझेदारोंऑस्ट्रेलिया और जापानके साथ सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया है.
  • यह BECA समझौता भारत-चीन सीमा तनाव के मद्देनजर चीन के साथ भारत के सैन्य अंतर को कम करने में भी मदद करेगा.

पृष्ठभूमि-

इस BECA समझौते पर भारत और अमेरिका के बीच एक दशक से अधिक समय से बातचीत चल रही है, क्योंकि पिछली UPA सरकार इस बात को लेकर चिंतित थी कि, क्या यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा.

नासा ने चंद्रमा की सतह पर खोजा पानी, इंसानी बस्तियों को बसाने में मिलेगी सहायता

G.S. Paper-III (S & T)

संदर्भ:

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज की है. बड़ी बात यह है कि चंद्रमा की सतह पर यह पानी सूरज की किरणें पड़ने वाले इलाके में खोजी गई है. इससे चांद पर जीवन की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं.

  • इस खोज से यह साफ हो जाता है कि पानी को चंद्रमा की सतह तक वितरित किया जा सकता है, और यह सिर्फ ठंड या छाया वाले स्थानों तक सीमित नहीं है. पानी की खोज नासा की स्ट्रेटोस्फियर ऑब्जरवेटरी फॉर इन्फ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (सोफिया) ने की है. नासा के खोज से न केवल चंद्रमा पर भविष्य में होने वाले मानव मिशन को बड़ी मजबूती मिलेगी.

दक्षिणी गोलार्ध के क्रेटर में पानी मिला-

सोफिया ने चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध में स्थित,पृथ्वी से दिखाई देने वाले सबसे बड़े गड्ढों में से एक क्लेवियस क्रेटर में पानी के अणुओं (H2O) का पता लगाया है. पहले के हुए अध्ययनों में चंद्रमा की सतह पर हाइड्रोजन के कुछ रूप का पता चला था, लेकिन पानी और हाइड्रॉक्सिल (OH) की खोज नहीं हो सकी थी.

फायदा-

इस खोज से भविष्य में स्पेस मिशन को बड़ी ताकत मिलेगी. बल्कि, इनका उपयोग पीने और रॉकेट ईंधन उत्पादन के लिए भी किया जा सकेगा.

नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय ने क्या कहा?

नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय में एस्ट्रोफिजिक्स विभाग के निदेशक पॉल हर्ट्ज ने कहा कि पहले ऐसे संकेत थे कि चंद्रमा के सतह पर सूर्य की ओर H2O हो सकता है. अब इसे वहां खोज लिया गया है. इस खोज चांद के बारे में अध्ययन और आगे बढ़ेगा.

पानी बहुत ही कम मात्रा में मौजद-

नेचर एस्ट्रोनॉमी के ताजा अंक में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थान के डेटा से 100 से 412 पार्ट प्रति मिलियन की सांद्रता में पानी का पता चला है. यदि इस पानी की तुलना की जाए तो उसकी मात्रा अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में मौजूद पानी की तुलना में 100 गुना कम है.

2024 तक इंसानों को पहुंचाना चाहता है नासा-

नासा अपने आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए चांद की सतह पर साल 2024 तक इंसानों को पहुंचाना चाहता है. इसके जरिए चांद की सतह पर मानव गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा. वहीं चांद पर मौजूद इंसान उन क्षेत्रों का पता लगाएंगे जहां पहले कोई नहीं पहुंचा है या जो अब तक अछूते रहे हैं.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

एनिग्माचन्ना गोलम

  • यह प्रजाति ड्रैगन स्नेकहेड मछलियों के एक पुराने परिवार से संबंधित है।
  • यह भूमिगत जलभरों (underground aquifers) में वास करती है।
  • इस मछली का नामकरण फिल्म ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ के किरदार गोलम’ (Gollum) से प्रेरित होकर किया गया है। फिल्म में ‘गोलम’ हमेशा भूमिगत रहने वाला एक चरित्र है।
  • इसे हाल ही में केरल में देखा गया है।
  • वैज्ञानिकों को इस मछली के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला।
  • यह माना जाता है कि इस प्रजाति की उत्पत्ति गोंडवानालैंड में हुई थी, जो बाद में एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों में विभाजित हो गया।

 

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