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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारतीय रेलवे ने 2030 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन एमिशन का लक्ष्य रखा

9th July, 2020

(G.S. Paper-III)

  • भारतीय रेलवे ने अपनी दशकों से खाली पड़ी ज़मीनों पर सोलर पावर प्लांट लगाने का फ़ैसला किया है. रेलवे इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के माध्यम से ट्रेनों को सोलर पावर से चलाने की योजना पर काम कर रहा है. रेलवे ने 2030 तक नेट ज़ीरो’ कार्बन एमिशन मास ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क बनने का लक्ष्य रखा है, जिसके चलते रेलवे अब इस प्रोजेक्ट को शुरू करने जा रहा है.
  • इसके तहत रेलवे ने अपनी ख़ाली ज़मीनों पर सोलर प्रोजेक्ट लगाने के टेंडर देने भी शुरू कर दिए हैं. अब तक दो टेंडर निकाले गए हैं. इनके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के बीना में एक पायलट प्रॉजेक्ट जल्द ही शुरू होने वाला है. रेलवे ने अबतक देश में सौर ऊर्जा की मदद से कई रेलवे स्टेशनों की बिजली की जरूरतों को पूरा किया है.

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में भी एक बड़ा योगदान-

  • भारतीय रेलवे का लक्ष्य है कि सोलर एनर्जी के माध्यम से रेलवे एक पूरी तरह ग्रीन मोड ट्रांसपोर्टेशन बन सके. भारतीय रेलवे विश्व की पहली ऐसी रेल ट्रांसपोर्टेशन संस्था होगी जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतें स्वयं पूरी करेगी. सोलर एनर्जी से चलने पर रेलवे ग्रीन रेलवे तो बनेगी ही आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में भी एक बड़ा योगदान करेगी.
  • देश भर के रेलवे स्टेशनों के रूफ़ टॉप पर लगे सोलर सिस्टम को जोड़ दें तो रेलवे 100 एमडब्ल्यूपी क्षमता ऊर्जा का उपयोग शुरू कर चुका है. बीना के सोलर पॉवर प्लांट प्रॉजेक्ट से प्राप्त हो रही बिजली को ट्रेन चलाने के लिए बने ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से जोड़ कर ट्रेन चलाने के ट्रायल और टेस्टिंग का काम शुरू हो चुका है. दो हफ़्ते में इसे औपचारिक रूप से इस्तेमाल में ले लिया जाएगा.

सोलर ट्रेन की टेक्नॉलाजी क्या है?

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के साथ मिलकर किया गया ये दुनिया का पहला ऐसा प्रॉजेक्ट है जिसमें औपचारिक रूप से रेल को सोलर एनर्जी से चलाया जाएगा. इस टेक्नॉलोजी के तहत डाइरेक्ट करेंट को अल्टरनेट करेंट में बदला जाता है और इसे सीधे ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से जोड़ दिया जाता है.

बीना सोलर पावर प्लांट-

बीना सोलर पावर प्लांट से सालाना लगभग 25 लाख यूनिट बिजली बनेगी. इससे रेलवे की सालाना 1.37 करोड़ रूपए की बचत होगी. रेलवे और भेल के बीच बीना का ये प्रॉजेक्ट 09 अक्टूबर 2019 को अनुबंधित हुआ था.

रेलवे का सोलर पॉवर प्लांट-

पायलट प्रॉजेक्ट के तहत छत्तीसगढ़  के भिलाई में भी रेलवे का 50 एमडब्ल्यूपी का सोलर पॉवर प्लांट तैयार हो रहा है जिसे 31 मार्च 2021 से पहले इस्तेमाल में ले लिया जाएगा. रेलवे का तीसरा सोलर एनर्जी पायलट प्रॉजेक्ट हरियाणा के फ़तेहाबाद ज़िले के दीवाना गांव के पास रेलवे की ज़मीन पर लगाया गया है.

रेलवे लाईन के किनारे सोलर पैनल प्लांट लगाने की योजना-

इसके अलावा रेलवे लाईन के किनारे- किनारे भी सोलर पैनल प्लांट लगाने की योजना पर रेलवे काम कर रहा है. इससे रेलवे ट्रैक की सुरक्षा भी बढ़ेगी और रेलवे की ज़मीनों पर अवैध क़ब्ज़ों से भी बचत होगी. इन सब वजहों से ट्रेन की स्पीड बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

भारत और CAATSA

(G.S. Paper-II)

चर्चा में क्यों 

बीते माह वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control-LAC) पर भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प के बाद भू-राजनीतिक वास्तविकताओं में आए बदलाव के बावजूद रूसी हथियारों की खरीद से संबंधित प्रतिबंधों पर अमेरिका के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

प्रमुख बिंदु-

  • इस संबंध में अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि ‘अमेरिका अपने सभी सहयोगियों और साझेदारों से आग्रह करता है कि वे रूस से किसी भी प्रकार के सैन्य लेन-देन को तत्काल रोक दें, अन्यथा उन्हें अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) का सामना करना पड़ सकता है।

भारतरूस सैन्य संबंध के हालिया घटनाक्रम-

  • गौरतलब है कि बीते सप्ताह रक्षा अधिग्रहण परिषद’ (Defence Acquisition Council- DAC) ने रूस से 21 मिग-29 फाइटर जेट विमानों की खरीद और 59 मिग जेट विमानों को अपग्रेड करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी।
    • भारत के मौजूदा 59 मिग-29 विमानों को अपग्रेड करने का कार्य भी रूस द्वारा ही किया जाएगा। अनुमान के अनुसार, इस सौदे की कुल लागत 7,418 करोड़ रुपए है।
  • ध्यातव्य है कि रक्षा सहयोग सदैव ही भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ रहा है।
  • मौजूदा समय में भारत और रूस का सैन्य तकनीकी सहयोग एक खरीदार और विक्रेता के फ्रेमवर्क से आगे बढ़ कर एक संयुक्त अनुसंधान, विकास और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों के उत्पादन के फ्रेमवर्क तक पहुँच गया है।

क्या है CAATSA?

  • अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) को वर्ष 2018 में लागू किया गया था, इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य दंडनीय उपायों के माध्यम से ईरान, रूस और उत्तर कोरिया की आक्रामकता का सामना करना है।
  • हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अधिनियम प्राथमिक रूप से रुसी हितों जैसे कि तेल और गैस उद्योग, रक्षा क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित है।
  • यह अधिनियम अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी रक्षा और खुफिया क्षेत्रों से संबंधित महत्त्वपूर्ण लेन-देनों में शामिल व्यक्तियों पर अधिनियम में उल्लिखित 12 सूचीबद्ध प्रतिबंधों में से कम-से-कम पाँच प्रतिबंध लागू करने का अधिकार देता है।

CAATSA का प्रयोग?

  • गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब तक कुल 2 बार CAATSA प्रतिबंधों का प्रयोग किया है, और संयोगवश दोनों बार इसका प्रयोग उन देशों के विरुद्ध किया गया था, जिन्होंने अमेरिका के साथ रक्षा क्षेत्र से संबंधित कोई समझौता किया था।
  • सितंबर, 2018 में अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेज़री विभाग ने एस-400 वायु रक्षा प्रणाली और सुखोई एस-35 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिये चीन के उपकरण विकास विभाग (Equipment Development Department-EDD) पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी।
    • इन प्रतिबंधों को तब और बढ़ा दिया गया जब चीन की सेना को रूस से रक्षा प्रणाली की डिलीवरी प्राप्त हुई।
  • जुलाई 2019 में भी अमेरिका ने तुर्की को S-400 की पहली डिलीवरी के बाद F-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से निष्कासित कर दिया था और साथ ही यह भी कहा था कि प्रतिबंध तब तक विचाराधीन हैं जब तक कि तुर्की रूस के साथ अपने सभी समझौते को समाप्त नहीं कर देता।

भारत के लिये CAATSA के निहितार्थ-

  • गौरतलब है कि अमेरिका ने जब से यह कानून अधिनियमित किया है, तभी से भारत-रूस रक्षा संबंधों पर इसके संभावित प्रभावों का मुद्दा काफी चर्चा में रहा है, विशेष रूप से S-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद के संदर्भ में।
    • इसका मुख्य कारण यह है कि CAATSA को अधिनियमित करने का उद्देश्य ही रूस के रक्षा क्षेत्र के साथ व्यापारिक लेन-देन में संलग्न संगठनों और व्यक्ति विशिष्ट पर प्रतिबंध लागू करके रूस को दंडित करना था।
  • CAATSA की धारा 235 में कुल 12 प्रकार के प्रतिबंधों को सूचीबद्ध किया गया है, जानकारों का मानना है कि इनमें से कुल 10 प्रतिबंध ऐसे हैं, जिनका रूस या अमेरिका के साथ भारत के मौजूदा संबंधों पर बहुत कम अथवा कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
    • इस प्रकार ऐसे केवल 2 ही प्रतिबंध हैं, जिनका रूस या अमेरिका के साथ भारत के मौजूदा संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा।
  • इनमें से पहला प्रतिबंध बैंकिंग लेन-देन के निषेध से संबंधित है, यदि भारत पर लागू किया जाता है तो भारत को अमेरिकी डॉलर के माध्यम से भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
  • वहीं दूसरा प्रतिबंध निर्यात से संबंधित है, और इसका अमेरिका तथा भारत के संबंधों पर काफी गहरा प्रभाव हो सकता है। इस प्रतिबंध के माध्यम से अमेरिका स्वयं द्वारा नियंत्रित किसी भी वस्तु के लिये लाइसेंस प्रदान करने और उसके निर्यात को स्वीकार करने से मना कर सकता है।

CAATSA से बचाव का विकल्प

इस अधिनियम में एक बचाव खंड दिया गया है जिसके अनुसार “यदि अमेरिकी राष्ट्रपति चाहें तो वे CAATSA को रद्द कर प्रतिबंधों से मुक्त कर सकते हैं।”

अगस्त, 2018 में अमेरिकी का कांग्रेस ने इस खंड में संशोधन करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के लिये यह प्रमाणित करना आवश्यक कर दिया था कि ‘प्रतिबंधित देश अथवा संगठन अमेरिकी  सरकार के साथ अन्य मामलों पर सहयोग कर रहा है जो अमेरिका के रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिये महत्त्वपूर्ण है।

 

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