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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड, एस्टोनिया व कैरीकॉम समूह के नेताओं के साथ बैठक

28thseptember 2019

समाचार में क्यों? 

25 सितंबर, 2019 को भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न (Jacinda Ardern), एस्तोनिया गणराज्य की राष्ट्रपति केर्स्टी कलजुलैद (Kersti Kaljulaid) तथा कैरेबियाई देशों के समूह कैरीकॉम (Caribbean Community- CARICOM) के प्रतिनिधित्व मंडल के साथ बैठक की।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा तथा दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संबंधों को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
  • न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रधानमंत्री को अपने नए महत्त्वपूर्ण पत्र ‘इंडिया 2022- इन्वेस्टिंग इन रिलेशनशिप के बारे में बताया जो न्यूजीलैंड इंक इंडिया स्ट्रैटिजी 2011 का ही विस्तार है।
  • दोनों नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के मामले सहित आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर भी चर्चा की तथा इस बारे में दोनों देशों के बीच वैचारिक समानता की सराहना की।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने एस्तोनिया गणराज्य की राष्ट्रपति केर्स्टी कलजुलैद के साथ ई-प्रशासन, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा की तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट (2021-2022) के लिये भारत की उम्मीदवारी पर समर्थन के लिये एस्तोनिया को धन्यवाद दिया।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने कैरेबियाई देशों के समूह के नेताओं के साथ अलग से बैठक की। इस मुलाकात में कैरेबियाई देशों और भारत के ऐतिहासिक तथा मधुर संबंधों में एक नई गति देखने को मिली।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर क्षमता निर्माण, विकास कार्यों में सहायता और आपदा प्रबंधन में कैरीकॉम देशों के साथ भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने कैरीकॉम देशों को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने तथा आपदा प्रतिरोधी संरचना के निर्माण के के लिये आमंत्रित किया।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने कैरीकॉम में सामुदायिक विकास परियोजनाओं के लिये 14 मिलियन अमेरिकी डॉलर तथा सौर, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन संबंधित परियोजनाओं के लिये 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट की घोषणा की।
  • प्रधानमंत्री ने इन देशों में भारत द्वारा वित्तपोषित केंद्रों को उन्नत करके जॉर्जटाउन, गुयाना में क्षेत्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र तथा बेलीज में क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करने की भी घोषणा की।

कैरेबियन समुदाय (Caribbean Community- CARICOM):

  • इसे वर्ष 1973 में चैगुआरामास की संधि (Treaty of Chaguaramas) के तहत स्थापित किया गया है।
  • यह कैरेबियन देशों का साझा बाजार क्षेत्र है। जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और सहयोग को बढ़ावा देना है ।
  • यह सुनिश्चित करता है कि एकीकरण के लाभ समान रूप से सदस्य देशों के मध्य साझा किये जाएं ।
  • इसका सचिवालय- जॉर्ज टाउन (गुयाना) में स्थित है ।

कैरीकॉम संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक पर्यवेक्षक भी है।

 

साइबरडोम    (Cyberdome)

समाचार में क्यों? 

केरल पुलिस ने इंटरनेट की डार्कनेट (Dark Net) जैसी आपराधिक गतिविधियों को रोकने हेतु सॉफ्टवेयर को सक्षम करने के लिये एक अत्याधुनिक लैब की स्थापना की है।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • डार्क नेट की चैबीस घंटे निगरानी के लिये चार विश्लेषकों के समूह को प्रशिक्षित और तैनात किया गया है।
  • इजराइल के विशेषज्ञों द्वारा 14 दिन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, क्योंकि देश में डार्क नेट पर नजर रखने हेतु विशेषज्ञता का अभाव है।
  • केरल साइबरडोम की स्थापना करने वाला पहला राज्य था इससे प्रेरित होकर असम ने भी साइबरडोम की स्थापना की है।

साइबरडोम (Cyberdome) :

साइबरडोम केरल पुलिस विभाग का एक तकनीकी अनुसंधान और विकास केंद्र है, जो साइबर सुरक्षा हेतु प्रौद्योगिकी संवर्द्धन के माध्यम से प्रभावी पुलिसिंग (Policing) में सक्षमता प्रदान करता है।

  • यह सक्रिय रूप से साइबर अपराधों से निपटने के लिये साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उच्च तकनीक युक्त सार्वजनिक-निजी साझेदारी केंद्र है।
  • साइबरडोम देश के विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों, अनुसंधान समूहों, गैर-लाभकारी संगठनों, समुदाय विशेष के विशेषज्ञों, नैतिक (Ethical)हैकर्स के मध्य सामूहिक समन्वय स्थापित करने का प्रयास करता है।

साइबरडोम (Cyberdome) के कार्य:

  • साइबरडोम ने साइबर निगरानी उपकरण (Cyber-Surveillance Tools) का विकास किया है, जो औद्योगिक जासूसी (Industrial Espionage) के लिये जिम्मेदार लोगों का पता लगाएगा जिससे उन्हें अपराधी घोषित किया जा सकेगा।
  • डार्कनेट पर बढ़ते आपराधिक गतिविधियों की जाँच और इन गतिविधियों को नियंत्रित करने हेतु सॉफ्टवेयर को सक्षम बनाने के लिये एक अत्याधुनिक लैब का निर्माण किया गया है।
  • ब्लू व्हेल (Blue whale) जैसे ऑनलाइन गेम के विरुद्ध प्रचार करना।
  • साइबरडोम ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी की घटनाओं को कम करने के लिये गुप्त साइबर निगरानी और घुसपैठ कार्यक्रम (Covert Cyber Surveillance and Infiltration Programme) शुरू किया है।
  • साइबरडोम ने सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) का इस्तेमाल कट्टरपंथी समूहों की निगरानी करने के लिये किया है जो चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

डार्कनेट (Dark Net):

  • डार्कनेट एक प्रकार की इंटरनेट पहुँच (Access) है। पहुँच (Access) के आधार पर डार्कनेट के तीन प्रकार के होते हैं-
  • सतही वेब (Surface Web): यह दिन-प्रतिदिन के कार्यों में प्रयुक्त होता है, जिसमें किसी विशिष्ट अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
  • डीप वेब (Deep Web): डीप वेब के किसी डॉक्यूमेंट तक पहुँचने के लिये उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉग-इन करना होता है। इसमें यूजर आईडी व पासवर्ड की जरूरत होती है।
  • जैसे- जीमेल अकाउंट (Gmail Account), सरकारी प्रकाशन आदि। यह अपनी प्रकृति में वैधानिक होते हैं।
  • डार्क नेट (Dark Net) इसे आमतौर पर प्रयुक्त सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता। इन तक पहुँचने के लिये एक विशेष ब्राउजर टॉर (The Onion Router- TOR) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • इस डार्क नेट का प्रयोग मानव तस्करी, मादक पदार्थों की खरीद और बिक्री, हथियारों की तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में किया जाता है।

 

प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती हेतु ‘नेतृत्व समूह

  • न्यूयार्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन (UN Climate Action Summit) के दौरान 11 देशों व कुछ संगठनो को मिलाकर एक ‘नेतृत्व समूह’ (Leadership Group) की घोषणा की गयी है।
  • यह समूह विश्व में सर्वाधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को उत्सर्जन कटौती में सहयोग कर निम्न कार्बन उत्सर्जन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
  • इस नेतृत्व समूह का उद्देश्य हार्ड-टू-डीकार्बोनाइज (भारी वाहन, शिपिंग, स्टील, सीमेंट आदि) और उर्जा गहन क्षेत्रों (Energy-Intensive Sectors)में बदलाव लाना है।
  • यह वैश्विक पहल भारी उद्योगों और ऑटो कंपनियों को पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये एक व्यावहारिक मार्ग उपलब्ध करवाएगी।
  • इस समूह में भारत, स्वीडन, अर्जेंटीना, फिनलैंड, फ्रांँस, जर्मनी, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंडस, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
  • इस समूह के संयुक्त नेतृत्व हेतु भारत और स्वीडन को चुना गया है।
  • इस वैश्विक पहल को विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum), एनर्जी ट्रांजिसन कमीशन (Energy Transitions Commission), मिशन इनोवेशन (Mission Innovation), स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (Stockholm Environment Institute) और यूरोपीय क्लाइमेट फाउंडेशन (European Climate Foundation) एवं अनेक कंपनियों द्वारा समर्थन प्रदान किया जाएगा।

 

 

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