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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भारतनेट परियोजना

1st July, 2020

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग’ (Department for Promotion of Industry and Internal Trade- DPIIT) द्वारा तमिलनाडु में ‘भारतनेट परियोजना’ (Bharat Net project) की 1,950 करोड़ रूपए की निविदाओं को रद्द करने का आदेश दिये गए हैं।

प्रमुख बिंदु:

चेन्नई की एंटी करप्शन गैर सरकारी संगठन ‘अय्यक्कम’द्वारा निविदा में अनियमितताओं को उजागर किया गया, जिसके चलते केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु में 1,950 करोड़ रुपए की भारत नेट प्रोजेक्ट की निविदाओं को रद्द कर दिया गया है।

तमिलनाडु में इस परियोजना को तमिलनाडु फाइबरनेट कॉर्पोरेशन (Tamil Nadu FiberNet Corporation- TANFINET) के माध्यम से संचालित किया जाना है।

गैर सरकारी संगठन द्वारा आरोप लगाया गया कि TANFINET द्वारा जारी निविदाओं की शर्तों के कारण केवल कुछ ही कंपनियाँ आवदेन की पात्र हैं।

भारत नेट परियोजना:

भारत नेट परियोजना का उद्देश्य ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fiber) के माध्यम से भारतीय गाँवों को उच्च गति ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ना है।

तमिलनाडु में इस परियोजना के माध्यम से राज्य के सभी 12,524 ग्राम पंचायतों को जोड़ने की योजना थी।

परियोजना के चरण:

प्रथम चरण में, अंडरग्राउंड ऑप्टिक फाइबर केबल लाइनों के माध्यम से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को एक लाख ग्राम पंचायतों तक उपलब्ध कराया गया है।

इस चरण को दिसंबर, 2017 तक पूरा कर लिया गया है।

द्वितीय चरण में , भूमिगत फाइबर, पावर लाइनों, रेडियो और उपग्रह मीडिया पर फाइबर के इष्टतम मिश्रण का उपयोग करके देश में सभी 1.5 लाख ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।

चरण-2 के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिये , बिजली के ध्रुवों/खंभों पर ऑप्टिक फाइबर केबल को भी लगाया गया है।

इस परियोजना का तीसरा चरण वर्ष 2019 से वर्ष 2023 तक पूर्ण होना है।

इस चरण में अत्याधुनिक, फ्यूचर प्रूफ नेटवर्क, ज़िलों एवं ब्लॉकस के बीच फाइबर समेत, अवरोध को समाप्त करने के लिये नेटवर्क को रिंग टोपोलॉजी के आधार पर स्थापित किया जाना है।

ऑप्टिकल फाइबर:

ऑप्टिकल फाइबर मुख्यत: सिलिका से बनी पतली बेलनाकार नलिकाएँ होती हैं जो प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती हैं।

ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश का उपयोग कर डेटा को ट्रांसफर किया जाता है।ऑप्टिकल फाइबर में बिजली का संचार नहीं बल्कि प्रकाश का संचार होता है। अतः इनमें प्रकाश के रूप में जानकारी का प्रवाह होता है।

ऑप्टिकल फाइबर में जहाँ डेटा को रिसीव किया जाता है वहाँ एक ट्रांसमीटर लगा होता है।

यह ट्रांसमीटर इलेक्ट्रॉनिक पल्स इनफार्मेशन को सुलझाता है तथा इसको प्रोसेस करके लाइट पल्स के रूप में ऑप्टिकल फाइबर लाइन में ट्रांसमिट कर देता है।

भारतनेट परियोजना का महत्त्व:

भारतनेट परियोजना विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड संपर्क परियोजना है।

इस परियोजना को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है अतः देश में ही रोज़गार के नए अवसर विकसित होंगे।

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में संचरण सुविधा बिना किसी नेटवर्क बाँधा के उपलब्ध कराई जा रही है।

परियोजना में राज्य और निजी क्षेत्रों के साथ साझेदारी करके अब ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में नागरिकों/लोगों को सस्ती ब्रॉडबैंड सेवाएँ प्राप्त हो सकेगी।

आसियान का 36वां शिखर सम्मेलन

चर्चा में क्यों

हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आसियान के 36वें शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस वर्ष 2020 के सम्मेलन की मेजबानी वियातनाम कर रहा है जिसके कारण वियतनामी प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुच इस सम्मलेन के अध्यक्ष हैं.

आसियान के 36वें शिखर सम्मेलन से सम्बंधित मुख्य बिंदु-

  • इस शिखर सम्मलेन का मुख्य जोरकोविड-19 की चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए पर रहा क्योंकि इसके गंभीर दुष्प्रभाव के कारण सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया समेत आसियान की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं गंभीर आर्थिक मंदी का सामना कर रही हैं.
  • वियतनाम द्वारा शिखर वार्ता के पश्चात् आसियान राष्ट्रों की ओर से प्रारूप विज्ञप्ति में कहा गया कि, “हम क्षेत्र में और विश्व पर कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण आई अभूतपूर्व चुनौतियों एवं इसकी कीमत को पहचानते हैं. हम मानवीय और सामाजिक आर्थिक स्थिति पर कोविड-19 के कारण उत्पन्न चुनौतियों एवं कीमतों को समझते हैं और उन लक्षित नीतियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो यह विश्वास जगाए कि आसियान इस नाजुक संघर्ष से अग्रिम मोर्चे पर लोहा लेने के लिए तैयार है.”
  • इस सम्मलेन में उच्च प्रथामिकता के अंतर्गतआसियान कोविड-19 प्रतिक्रिया कोष स्थापित किया जाएगा जिसका प्रयोग चिकित्सीय आपूर्ति एवं सुरक्षात्मक उपकरणों की खरीद में सदस्य राष्ट्रों की मदद करना है.
  • इस सम्मलेन में आसियान देशों के द्वारा चीन की क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध एकजुटता भी प्रदर्शित किया किया गया.

आसियान क्या है?

  • ASEAN का full-form है – Association of Southeast Asian Nations.
  • ASEAN का headquarters जकार्ता, Indonesia में है.
  • इसकी स्थापना8 अगस्त, 1967 को थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुई थी.
  • इसका Motto है – “One Vision, One Identity, One Community” अर्थात् एक सोच, एक पहचान, एक समुदाय.
  • आसियान में10 सदस्यदेश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम) हैं और 2 पर्यवेक्षक देश हैं (Papua New Guinea और East Timor).
  • ASEAN देशों की साझी आबादी 64 करोड़ से अधिक है जो कि यूरोपियन यूनियन से भी ज्यादा है.
  • अगर ASEAN को एक देश मान लें तो यह दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
  • इसकी GDP 28 हजार करोड़ डॉलर से अधिक है.
  • सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के वर्णानुक्रम के आधार पर, आसियान की अध्यक्षता प्रतिवर्ष परिवर्तित होती है.
  • आसियान में महासचिव का पद सबसे बड़ा है.पारित प्रस्तावों को लागू करने का काम महासचिव ही करता है. इसका कार्यकाल 5 साल का होता है.
  • क्षेत्रीय सम्बन्ध को मजबूत बनाने के लिए 1997 में ASEAN +3 का गठन किया गया था जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया और चीन को शामिल किया गया.
  • बाद में भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड को भी इसमें शामिल किया गया. फिर इसका नाम बदलकर ASEAN +6 कर दिया गया.
  • 2006 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने आसियान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया.
  • आसियान की बढ़ती महत्ता को देखते हुए अब कई देश इसके साथ करार करना चाहते हैं.

आसियान के चार्टर के अनुसारइसके शिखर सम्मेलन को संबल प्रदान करने के लिए चार महत्त्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय निकाय होते हैं

  • आसियान राजनीतिक-सुरक्षा समुदाय परिषद् (ASEAN Political-Security Community Council)
  • आसियान आर्थिक समुदाय परिषद् (ASEAN Economic Community Council)
  • आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय परिषद् (ASEAN Socio-Cultural Community Council)
  • आसियान समन्वय परिषद् (ASEAN Coordinating Council – ACC)

भारतआसियान संबंधों का इतिहास एवं क्रमिक विकास

  • भारत ने वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की नीति का पालन किया एवं वह दक्षिण-पूर्व एशिया सहित अपने क्षेत्र में उपनिवेशवाद की समाप्ति का चैंपियन बन गया. परन्तु, 1970 के दशक के दौरान सोवियत संघ के प्रति भारत का झुकाव अनुभव किया गया जिसके चलते दक्षिण-पूर्व एशिया भारत से दूर होता गया क्योंकि सोवियत संघ एवं दक्षिण-पूर्व एशिया दोनों भिन्‍न -भिन्‍न प्रकार की आर्थिक एवं राजनीतिक विचारधाराओं का पालन कर रहे थे.
  • भारत ने अपनी नीतियों में शीत युद्ध युग से बड़ा बदलाव करते हुए, 1991 में आर्थिक उदारीकरण के ठीक बाद ही, चीन जैसे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को बढ़ाने के लिएलुकईस्ट नीति (LEP) को अपनाया. पिछले वर्षों में इस नीति द्वारा इस क्षेत्र में रणनीतिक और सुरक्षा पहलुओं पर घनिष्ठ संबंधों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है.
  • आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौता(AIFTA), आसियान के साथ भारत की संलग्नता के प्रमुख परिणामों में से एक रहा है. इसे गहन आर्थिक एकीकरण की ओर आवश्यक चरण के रूप में देखा गया था. इसके प्रारंभिक ढांचे पर बाली, इंडोनेशिया में 8 अक्टूबर 2003 को हस्ताक्षर किए गए थे एवं 1 जनवरी 2010 से प्रवर्तित होने वाले अंतिम समझौते पर 13 अगस्त 2009 को हस्ताक्षर किए गए थे. मुक्त व्यापार समझौते(FTA) ने भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार शुल्क बाधाओं को कम कर दिया एवं सेवाओं के व्यापार एवं निवेश को सुगम बनाने के लिए विशेष प्रावधानों को सम्मिलित किया.
  • भारत को आसियान क्षेत्रीय मंच में अपनी सदस्यता के वाद1995 में पूर्ण आसियान वार्ता साझेदार की प्रस्थितिप्रदान की गयी थी. भारत-आमियान संबंधों ने शीघ्र ही राजनीतिक और साथ ही सुरक्षा क्षेत्रों में अपना सहयोग विस्तारित किया. भारत 2005 में पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (ईस्ट एशिया समिट: EAS) में भी सम्मिलित हो गया.
  • आसियान 2012 से भारत का रणनीतिक साझेदार रहा है. भारत और आसियान के बीच 30 वार्ता तंत्र हैं जो नियमित रूप से बैठक करते हैं.
  • नवम्बर 2014 में म्यांमार में आयोजित 12वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन एवं 9वें पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन में ‘Act East Policy’ (AEP) की स्थापना के बाद आसियान एवं वृहत्तर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत की संलग्नता ने और अधिक गति प्राप्त कर ली है.
  • AEP के अंतर्गत भारत से न केवल क्षेत्र के साथ अपनी आर्थिक संलग्नता को सुदृढ़ करने की अपेक्षा है बल्कि यह संभावित सुरक्षा सम्तुलनकर्ता के रूप में उभरने के लिए भी उत्सुक है.

भारत के लिए आसियान का महत्त्व

आर्थिक रूप से:

भारत, आसियान का एक रणनीतिक साझेदार है. 1.8 बिलियन की कुल जनसंख्या एवं 3.8 ट्रिलियन डॉलर के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के साथ आसियान और भारत दोनों मिलकर विश्व का एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र निर्मित करते हैं.

भूराजनैतिक रूप से:

भारत, भूराजनैतिक रूप से एवं साथ ही साथ आसियान एवं अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ अपनी नवीन मित्रता से लाभान्वित होने की अपेक्षा करता है.

भारत ने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का प्रयास किया है. दक्षिण चीन सागर में नौसंचालन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व का उल्लेख कर भारत ने चीन को एक दृढ़ संकेत दिया है.

समुद्री (maritime) महत्व:

समुद्र के माध्यम से होने वाले अपने व्यापार को निर्वाध जारी रखने के लिए दक्षिण चीन सागर में नौसंचालन की स्वतंत्रता भारत के लिए आवश्यक है.

समुद्री मार्ग “विश्व व्यापार की जीवन रेखायें” हैं. भारत नौसंचालन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है, जोसमुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) पर आधारित हो.

नौसंचालन की स्वतंत्रता, नशीले पदार्थों की तस्करी एवं साइबर अपराध इत्यादि के क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देने के लिए आसियान महत्वपूर्ण है.

सुरक्षा से जुड़े पहुलू:

भारत और आसियान विविध क्षेत्रों जैसे आतंकवाद, मानव और नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध एवं मलक्का जलडमरूमध्य में समुद्री डकैती इत्यादि जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे पर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं.

कनेक्टिविटी से जुड़े पहलू:

भारत कनेक्टिविटी, भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता का विषय है. यही स्थिति आसियान देशों के लिए भी है.

भारत ने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कालादान मल्टी मोडल परियोजना को लागू करने में काफी प्रगति की है. दूसरी तरफ, भारत और ASEAN के बीच समुद्री व हवाई संपर्क बढ़ाने तथा संपर्क गश्तियारों को आर्थिक गलियारों में बदलने से संबंधित मुद्दों पर बातचीत चल रही है.

असीमित आर्थिक अवसर प्रदान करने वाले क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर स्थित भारत के अत्यधिक अविकमित पूर्वोत्तर राज्य, आर्थिक बदलाव के साक्षी बनेंगे.

ऊर्जा सुरक्षा:

विशेष रूप से म्यांमार, वियतनाम और मलेशिया जैसे आसियान देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में संभावित रूप से योगदान कर सकते हैं.

दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार विद्यमान हैं.

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपने नवीनतम अध्ययन में कहा है कि भारत, स्विट्जरलैंड से अपने निवासियों के बैंक खातों और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं के लाभकारी स्वामित्व के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल है।
  • आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के इस अध्ययन का मकसद कर मामलों में सूचनाओं की पारदर्शिता और लेनदेन को बढ़ावा देना है। इस रिपोर्ट में दुनिया भर में देशों द्वारा मांगी गई सूचनाओं और उस पर कार्रवाई का अध्ययन किया गया है।

अध्ययन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • ओईसीडी के इस अध्ययन के अनुसार वैश्विक मंच की जुलाई 2015 से जून 2018 के लिए नवीनतम समीक्षा में भारत को शीर्ष तीन देशों में शामिल किया गया, जिनके अनुरोध पर स्विट्जरलैंड ने जानकारी प्रदान की।
  • ओईसीडी के इस अध्ययन के अनुसार भारत, स्विट्जरलैंड से अपने निवासियों के बैंक खातों और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं के लाभकारी स्वामित्व के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल है। बाकी दो देश फ्रांस और जर्मनी हैं। वैश्विक मंच ने सूचनाओं के लेनदेन पर नवीनतम समीक्षा रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड की रेटिंग ‘व्यापक अनुपालन’ की है।
  • इस नवीनतम समीक्षा रिपोर्ट में भारत को भी ‘व्यापक अनुपालन’ की रेटिंग दी गयी है।
  • रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड ने कानूनी स्वामित्व की जानकारी देने, मृतक व्यक्तियों के बारे में सूचनाओं के आदान-प्रदान और चुराए गए डेटा के संबंध में अनुरोधों पर कार्रवाई करने में उल्लेखनीय सुधार किया है।
  • रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि स्वामित्व की जानकारी देने और सूचना तथा गोपनीयत के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं।
  • भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्विस बैंकों में जमा काले धन का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी अहम रहा है और स्विट्जरलैंड अपने वित्तीय संस्थानों के बारे में लंबे समय से इस प्रचलित धारणा को खत्म करने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहा है कि वहां विभिन्न देशों के लोगों द्वारा अघोषित धन को छिपाया जाता है।
  • स्विट्जरलैंड ने पिछले एक साल में भारत से संबंधित 500 से अधिक मामलों में विस्तृत जानकारी साझा की है। ये मामले कर धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हैं।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन क्या है?

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) एक अंतरसरकारी आर्थिक संगठन है जो बेहतर जीवन के लिए बेहतर नीतियां बनाने का कार्य करती है। आर्थिक प्रगति और विश्व व्यापार को प्रोत्साहित करने हेतु इस संगठन की स्थापना के लिए 1960 में कन्वेंशन को अपनाया गया। आधिकारिक रूप से 30 सितम्बर 1961 में कन्वेंशन के प्रवर्तन में आने पर OECD की स्थापना हुई। वर्तमान में इस संगठन के 36 सदस्य है एवं इसका मुख्यालय पेरिस-फ्राँस में स्थित है।

 

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